Aindri Devi Mandir Prayagraj: जहां मिले सारे तीर्थों का फल

Prayagraj Ke Pramukh Darshaniya Sthal में Aindri Devi Dham Jamunipur का सबसे प्रसिद्ध, प्राचीन और शक्तिशाली स्थान है। Mandir में विराजमान मां ऐंद्री देवी को आनंदी माता के नाम से भी जाना जाता है।

Aindri Devi Mandir Prayagraj: जहां हर सुबह और हर शाम भक्तिमय हो जाती है, वह नगरी है प्रयागराज।

जहां सुबह चार बजे से ही कोसों चलकर लोग अपनी सुबह की शुरुआत गंगा स्नान के बाद करते हैं, वह जिला है प्रयागराज।

जहां हर गली, हर गांव Pramukh Darshaniya Sthal की तरह दिखते हैं, वह स्थान है प्रयागराज।

प्रयागराज कई देवी-देवताओं का घर है। उनमें से एक स्थान Aindri Devi Dham Jamunipur है।

चारों ओर खुशहाल और संपन्न गांव और बीच में विराजती हैं मां ऐंद्री देवी।

Mandir से लगभग चार-पांच किमी दूर दक्षिण दिशा में मां गंगा अलग अंदाज़ में बहती हैं।

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Aindri Devi Dham श्री ऋषि दुर्वासा की तपस्थली है। जहां उन्होंने कई वर्षों तक तपस्या की थी।

इस Mandir से श्री महर्षि दुर्वासा ऋषि का आश्रम लगभग 2 किमी की दूरी पर दक्षिण और पश्चिम दिशा में विराजमान है।

महर्षि अपने ककरा गांव स्थित आश्रम में रहते थे और तप Aindri Devi Dham Jamunipur में करते थे।

इसलिए इन दोनों स्थानों का आपस में गहरा कनेक्शन है।

यह पवित्र Dham प्रयाग पंचकोसी परिक्रमा के अंतर्गत आता है, इसलिए इस Sthal की महिमा बहुत अधिक है।

पौराणिक मान्यता है कि Prayagraj की पंचकोशी परिक्रमा करने से सारे तीर्थों के दर्शन का फल मिलता है।

तीर्थराज Prayagraj के साथ सभी देवी-देवताओं, ऋषियों-मुनियों, सिद्धों और नागों का पुण्य फल एक साथ मिलता है।

मां ऐंद्री देवी धाम कहां स्थित है? (Aindri Devi Mandir Prayagraj)

माता Aindri Devi Dham, Prayagraj Ke Jamunipur गांव में स्थित Pramukh Darshaniya Sthal है।

यह पौराणिक Mandir, Jamunipur, ककरा, कोटवा और बेलवार जैसे अन्य नजदीकी गांवों की धड़कन है।

आदिशक्ति मां ऐंद्री देवी जमुनीपुर गांव की कुलदेवी हैं और Jamunipur Prayagraj के समृद्ध गांवों में से एक है।

मां की दिव्य महिमा Prayagraj के अलावा वाराणसी और जौनपुर जिले तक बहुत ज़्यादा विख्यात है।

प्रयाग कुंभ और महाकुंभ के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और सैलानियों का आगमन होता है।

Prayagraj संगम तट से पूर्व दिशा में पांच कोस की दूरी पर दुर्वासा मुनि आश्रम, ककरा गांव में स्थित है।

ककरा गांव से Jamunipur की दूरी लगभग 2 किमी के करीब है।

Prayagraj शहर से इस Mandir की दूरी लगभग 15-20 किमी के करीब है।

इस प्रसिद्ध Mandir को ‘शक्ति पीठ मां Aindri Dham‘ कहा जाता है। कुछ लोग शिव-शक्ति पीठ भी कहते हैं।

यह Pramukh Darshaniya Sthal झूसी से लगभग 11 किमी दक्षिण-पूर्व दिशा में पंडित टीकाराम मार्ग पर गांव Jamunipur में स्थित है।

हनुमानगंज से शेयर ऑटो आदि से Jamunipur चौराहा बड़े आराम से पहुंचा जा सकता है।

Jamunipur चौराहे से Mandir का मुख्य गेट दिखाई देता है।

Prayagraj से हनुमानगंज की दूरी लगभग 18 किमी और वहां से Jamunipur की दूरी लगभग 10 किमी है।

हनुमानगंज बाज़ार Prayagraj-वाराणसी रोड पर पूर्व दिशा की ओर पड़ता है।

वहां से Jamunipur दक्षिण दिशा में पड़ता है।

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मां ऐंद्री देवी धाम क्यों प्रसिद्ध है? (Aindri Devi)

जहां समय बिना सिर झुकाए आगे नहीं बढ़ता, वह पावन Dham है Aindri Devi Mandir

जिनके दर्शन किए बिना हवाएं रुख नहीं बदलतीं, साक्षात् विराजती हैं मां आदिशक्ति।

जिनके नाम से बड़े-बड़े दानव मानव बन जाते हैं, शक्ति का स्वरूप हैं मां।

संगम स्नान के बाद जब तक भक्त मां Aindri Devi Mandir की परिक्रमा नहीं कर लेते, तब तक मन को पूरी शांति नहीं मिलती, Prayagraj की जगत-जननी हैं Aindri Devi मां।

स्कंद पुराण और दुर्गा सप्तशति में जिनका उल्लेख मिलता है, वो Devi हैं Aindri माता।

जहां हर सोमवार श्रद्धालुओं का मेला उमड़ता है, अनगिनत भक्तों की जान हैं मां।

नवरात्रि के अवसर पर जहां आराधकों का तांता लगता है, सुप्रसिद्ध Sthal है मां का यह Dham

होली के मौके पर जहां पूरा माहौल होलीमय हो उठता है, एकता की मिसाल है यह भव्य और प्राचीन Mandir

जो भक्त श्रद्धा और विश्वास से मां के दर्शन-पूजन करते हैं, सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

यही वजह है कि हर सोमवार के दिन यहां मेला लगता है, जिसमें दूर-दूर से लोग हिस्सा लेने आते हैं।

मंदिर के मुख्य गर्भगृह में मां Aindri Devi विराजमान हैं।

मां ऐंद्री देवी कैसे प्रकट हुईं? (Prayagraj Ke Pramukh Darshaniya Sthal)

Aindri Devi Mandir या Dham एक शक्ति पीठ है, जहां माता Aindri Devi स्वयं प्रकट हुई थीं।

यह पवित्र Sthal ऋषिराज दुर्वासा की तपोस्थली हुआ करती थी।

यहां वे प्रतिदिन तप किया करते थे। लेकिन उनकी तपस्या में दुर्गम नामक राक्षस विघ्न डालता था।

फिर एक दिन अपनी शक्ति से उन्होंने Devi जी को प्रकट किया।

कहते हैं कि श्री महर्षि दुर्वासा मुनि का यज्ञ सफल बनाने के उद्देश्य से Devi मां स्वयं अवतरित हुईं थीं।

तब से लेकर आज तक लोगों का यही मानना है कि इस मंदिर में मां Aindri Devi स्वयं निवास करती हैं।

मां ऐंद्री का स्वरूप कैसा है? Aindri Devi Dham Jamunipur

जो व्यक्ति एक बार मां के दरबार में पहुंचकर देवी मैया के दर्शन कर लेता है, वह आनंद की गंगा में डूब जाता है।

मां ऐंद्री देवी के दिव्य रूप को देखकर किसी का भी मन मंत्रमुग्ध हो जाता है।

माता Aindri Devi अपने हाथों में वज्र, शंख, गदा और पद्म धारण किए हुए ऐरावत हाथी पर सवार हैं।

देवी के इस चतुर्भुज रूप के दर्शन करने मात्र से इंसान सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति पा जाता है।

यही वजह है कि मां Aindri Devi को सहज स्वरूप में मां आनंदी (Anandi) के रूप में जाना जाता है।

Mandir के मुख्य गर्भगृह में माता Aindri Devi की मनमोहक प्रतिमा विराजमान है।

वहीं दक्षिण दिशा में श्री हनुमान जी महाराज और बाईं तरफ श्री काल भैरव बाबा एवं भगवान श्री शनिदेव की प्रतिमाएं स्थापित हैं।

Mandir के पीछे नवदुर्गा की 9 मनमोहक प्रतिमाएं स्थापित हैं।

मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के दिव्य दर्शन माता Anandi Devi की परिक्रमा करते समय होते हैं।

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माता ऐंद्री देवी के दर्शन-पूजन से लाभ?

पौराणिक मान्यता है कि जो भक्त लगातार ग्यारह सोमवार तक माता रानी के दर्शन-पूजन करता है, मां उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं।

आज के युग में भी इस Mandir की कहानी कई चमत्कारों से भरी हुई है।

स्थानीय निवासियों का पूरे यकीन के साथ मानना है कि भक्ति और समर्पित भाव से जिन्होंने जो मांगा है, वो पाया है।

मां सुख, शांति और समृद्धि के साथ-साथ बल, विद्या और बुद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

शक्ति पीठ मां Aindri Devi की पूजा-अर्चना करने वालों की इच्छाएं अवश्य पूरी होती हैं।

बड़ी मात्रा में Mandir पर चढ़ने वाले निशान इस बात के सबूत हैं कि मां भक्तों की पुकार सुनती हैं।

Aindri Devi Dham पर हर सोमवार के दिन मेला लगता है, जिसमें दूर-दूर से लोग हिस्सा लेने आते हैं।

मेला का मतलब यह हुआ कि सोमवार का दिन माता Anandi Devi के नाम समर्पित है।

इस दिन पूजा-अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

प्रसाद के रूप में माता रानी को इलायची दाना, मिश्री, नारियल, चुनरी, सिंदूर और चूड़ी आदि बड़े पैमाने पर चढ़ती है।

पुरुष के अलावा इस पारंपरिक मेले में स्थानीय गांवों की महिलाएं विशेष रूप से भाग लेती हैं।

मेले में महिला संबंधी सामग्री के साथ-साथ बच्चों के खिलौने आदि ज़्यादा बिकते हैं।

दर्शन-पूजन के बाद लोग फुलकी (पानीपुरी/गोलगप्पे) और चाट का आनंद उठाना नहीं भूलते हैं।

फुलकी और चाट मेले में सबसे ज़्यादा बिकने वाली सामग्रियों में से एक है!

मां ऐंद्री धाम पर कब लगता है मेला?

चिरकाल से चले आ रहे मां के इस विशाल मंदिर में प्रतिवर्ष वासंतीय नवरात्र में शतचंडी महायज्ञ का आयोजन होता है।

इसके अलावा यहां हर शारदीय नवरात्रि के अवसर पर भी भव्य शतचंडी यज्ञ का आयोजन किया जाता है।

शतचंडी यज्ञ के आयोजन से बुरी शक्तियों का नाश होता है और बाधाएं खत्म होती हैं।

इस यज्ञ का पाठ बहुत ही योग्य और विद्वान ब्राह्मणों द्वारा किया जाता है।

आठ/नौ दिन के पाठ के बाद भव्य भंडारा प्रसाद का आयोजन किया जाता है।

इस महायज्ञ में बढ़-चढ़कर लोग हिस्सा लेते हैं और अपनी क्षमता के अनुसार दान करते हैं।

नवरात्रि के अवसर पर चार बार मां का भव्य श्रृंगार एवं सामूहिक आरती की जाती है।

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सहस्त्र चंडी महायज्ञ का आयोजन

सहस्त्र चंडी महायज्ञ का महत्व हमारे धर्म-ग्रंथों में बताया गया है।

मार्कण्डेय पुराण में सहस्त्र चंडी यज्ञ की पूरी विधि देखी जा सकती है।

देवी मैया की कृपा सदा अपने भक्तों पर बनी रहे, इसी उद्देश्य से शारदीय नवरात्रि के अवसर पर Aindri Devi Dham Jamunipur में ‘सहस्त्र चंडी महायज्ञ’ का आयोजन किया जाता है।

पूरी नवरात्रि चलने वाले इस महायज्ञ में 101 योग्य और विद्वान पंडित दुर्गा सप्तशती के एक हजार पाठ करते हैं।

एक दिन में 100 पाठ किए जाते हैं।

पाठ पूर्ण होने के बाद यज्ञ और भंडारा प्रसाद की व्यवस्था की जाती है।

सहस्त्र चंडी यज्ञ का आयोजन 10 या 12 साल में एक बार किया जाता है।

इस धार्मिक कार्यक्रम के आयोजन में लगभग 15-20 लाख रुपए खर्च होते हैं।

पैसों की व्यवस्था स्वयं देवी भक्तों द्वारा की जाती है।

पिछले यज्ञ में मुख्य जजमान/यजमान ने पूरे ढाई लाख रुपए दान किए थे।

इस महायज्ञ में हिस्सा लेने के लिए बहुत दूर से लोग आते हैं।

मंदिर खुलने और बंद होने का समय

मंदिर हर दिन सुबह 4 बजे खुलता है और रात्रि 9 बजे बंद होता है।

दिन में दो बार मां की आरती की जाती है।

सुबह की आरती 6.30 बजे और रात की आरती रात 8 बजे की जाती है।

कब लगता है शिव भक्तों का मेला?

श्री Aindri Devi Mandir के ठीक सामने यानी सड़क के उस पार देवों के देव महादेव का Mandir है।

माता और Mandir का मुख पूर्व दिशा की ओर है और महादेव का मुख पश्चिम दिशा की ओर है।

सावन के मलमास के दौरान भोलेनाथ के इस मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ती है।

यहां Prayagraj के अलावा वाराणसी और जौनपुर जिले के लोग भारी मात्रा में रुद्राभिषेक करने आते हैं।

यूं तो पूरे सावन श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है, पर सोमवार के दिन भक्तों की संख्या और बढ़ जाती है।

भोले बाबा के इस मंदिर में भक्तों को सामूहिक रुद्राभिषेक का सौभाग्य मिलता है।

स्थानीय निवासियों का मानना है कि इस Mandir में रुद्राभिषेक करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

पूरे सावन इस पवित्र Dham पर भव्य मेला लगता है।

कांवड़ियों की टोली भी इसी मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद आगे बढ़ती है।

ऐसी कई मान्यताएं और विशेषताएं Aindri Devi Mandir को Prayagraj का Pramukh Darshaniya Sthal बनाती हैं।

Prayagraj जब भी जाना हो, Aindri Devi Dham Jamunipur अवश्य जाएं।

यहां आपको भक्ति की शक्ति के साथ-साथ मन की शांति मिलेगी।

रूरल इंडिया की असली खुशबू, अपनापन, बोली में मिठास और चटपटे स्वाद का आनंद मिलेगा।

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