Best Tourist Places in Pratapgarh | मां चौहरजन धाम

Best Tourist Places in Pratapgarh: अगर आप प्रतापगढ़ में घूमने के लिए सबसे बेहतरीन और पवित्र स्थान देख रहे हैं, तो यह लेख आपकी मदद कर सकता है। जिस स्थान के बारे में मैं आपको बताने जा रहा हूं, वह आस्था, विश्वास, इतिहास और कुछ हद तक रोमांच से भरपूर है। तो चलिए जानते हैं, प्रतापगढ़ की आन, बान, शान ‘मां बाराही उर्फ चौहरजन माई (मां)’ की अद्भुत लीला के बारे में।

चौहरजन धाम की लीला

Best Tourist Places in Pratapgarh: चौहरजन धाम में विराजमान मां बाराही लाखों भक्तों की आस्था का प्रतीक हैं। श्रद्धालुओं की मुराद पूरी करने वाली महाशक्ति हैं। कहते हैं कि मां की चौखट से कभी कोई खाली नहीं जाता। मां बाराही के दर्शन-पूजन से लंबी आयु और यश की प्राप्ति होती है। मां बाराही प्रतापगढ़ के गौरवशाली इतिहास की शक्ति के रूप में जानी जाती हैं। तो चलिए पढ़ते हैं, आस्था जन-जन की, महिमा मां चौहरजन की!

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के रानीगंज तहसील में ‘मां बाराही या चौहरजन धाम’ है। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में मां बाराही देवी विराजमान हैं। मां की महिमा प्रतापगढ़ के अलावा, आसपास के जिलों तक प्रसिद्ध है। मां के दर्शन के लिए जौनपुर, प्रयागराज और सुल्तानपुर जिले के भक्त भी भारी संख्या में आते हैं।

प्रतापगढ़ जिले में क्या देखें?   

Best Tourist Places in Pratapgarh: प्रतापगढ़ जिले में मां बेल्हा देवी धाम, चिलबिला पार्क, शहीद उद्यान पार्क, हौदेश्वर नाथ मंदिर, श्री शनिदेव धाम और प्रतापगढ़ किला जैसे अन्य कई आकर्षक देखे जा सकते हैं। इनके अलावा, कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित मां बाराही धाम का महत्व विशेष है। जब आपके मन में यह सवाल आए कि प्रतापगढ़ जिले में क्या देखें? तो मां बाराही धाम यानी मां चौहरजन धाम आना बिल्कुल न भूलें।

रानीगंज के नजदीक तीर्थ स्थल

Best Tourist Places in Pratapgarh: मां बाराही देवी स्थानीय निवासियों की कुलदेवी हैं। कोई भी व्यक्ति मां की इजाजत के बिना कोई काम नहीं करता। शुभ कार्य हो या अशुभ कार्य, सबमें मां की सहमति ज़रूरी है। स्थानीय गांव वालों की सुबह-शाम की शुरुआत, मां के चरणों में दीप जलाकर होती है।

यह देखकर बेहद खुशी होती है कि वर्षों पुरानी परंपरा, आज भी लोग बड़ी शिद्दत से निभा रहे हैं। शादी, बर्थडे या अन्य किसी अवसर पर, जब घर में पकवान आदि बनते हैं, तो सबसे पहले बड़े भाव से मां को भोग चढ़ाया जाता है। उनको मनाया जाता है।

ऐसी ही और कई खूबियां मां चौहरजन धाम के महत्त्व को बढ़ाती हैं। यह पवित्र धाम, रानीगंज के नजदीक एक सुप्रसिद्ध तीर्थ स्थल है।   

मां बाराही उर्फ चौहरजन धाम का महत्त्व  

Best Tourist Places in Pratapgarh: मां बाराही देवी की बात निराली है। वे कभी अपने भक्तों को निराश नहीं करती हैं। जो सच्चे दिल से उनसे कुछ मांगता है, भले ही वक़्त लगे, पर वो पाता है। तभी तो दूर-दूर से भक्त समय-समय पर मां के दर्शन के लिए आते रहते हैं। मां की ऐसी कृपा है, जो व्यक्ति एक बार उनकी चौखट पर माथा टेक देता है, फिर वो सदा का लिए उनका भक्त बन जाता है।

चौहरजन धाम रानीगंज का इतिहास

Best Tourist Places in Pratapgarh: रानीगंज के चौहरजन धाम का इतिहास गर्व, भक्ति और साहस से भरा हुआ है। इतिहास पलटकर देखें, तो मां बाराही की कहानी इतिहास के दो अमर नायकों से जुड़ी हुई है। जानकारों के अनुसार, मां बाराही देवी की स्थापना महान योद्धा आल्हा जी और ऊदल जी ने की थी।

दोनों वीर चन्देल राजा परमल के सेनापति दसराज के पुत्र थे। आल्हा जी ऐतिहासिक बुंदेलखंड के सेनापति थे और अपनी वीरता के लिए जाने जाते थे। मां बाराही देवी की मौजूदगी के साथ-साथ, आज भी यहां आल्हा जी और ऊदल जी द्वारा बनाए गए कुएं और सुरंग मौजूद हैं, जो सीधे नदी से जुड़े हैं। लेकिन, बेहतर देखभाल न होने की वजह से अब यह अनमोल विरासतें विलुत होती नज़र आ रही हैं।

लोगों का कहना है कि आल्हा जी और ऊदल जी हर दिन इसी कुएं और सुरंग के जरिए नदी में स्नान करते थे। उसके बाद मां बाराही देवी की पूजा-अर्चना करते थे। उन्होंने सिर्फ़ देवी मां की स्थापना ही नहीं, बल्कि कठिन आराधना भी की थी। मां की कृपा और दया की बदौलत, दोनों भाइयों को कभी असफलता का मुंह नहीं देखना पड़ा।

कुछ ऑनलाइन रिसर्च के अनुसार, मां बाराही देवी की स्थापना बारहवीं या तेरहवीं सदी में की गई थी। मतलब, माता चौहरजन देवी सदियों से अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती आ रही हैं। स्थानीय लोग मां बाराही को ‘चौहरजन माई’ के नाम से पुकारते हैं।

मां बाराही कैसे बनीं चौहरजन माई?

Best Tourist Places in Pratapgarh: मान्यताओं के अनुसार, मुगल शासन के दौरान, मां बाराही की प्रतिमा को खंडित कर, सई नदी में फेंका गया था। एक रात मां ने राजा चौहरजा को सपने में दर्शन दिया। उन्होंने अपनी मौजूदगी की अनुभूति पानी में कराई।

अगली सुबह राजा ने तुरंत गहरे पानी से माता की प्रतिमा निकलवाई। प्राण-प्रतिष्ठा के साथ विधिवत मां की पूजा-पाठ की। उसी दिन से मां बाराही का नाम चौहरजन देवी पड़ गया। और मां बाराही धाम हमेशा के लिए चौहरजन धाम बन गया।

अब सभी भक्त अपनी मां को इसी नाम से जानते और पुकारते हैं। मंदिर में माता चौहरजन देवी के अलावा, और भी कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं। चौहरजन धाम के पुनर्निर्माण का श्रेय राजा चौहरजा को जाता है।   

आस्था और विश्वास का धाम – चौहरजन धाम    

Best Tourist Places in Pratapgarh: मां चौहरजन धाम सई नदी के तट पर स्थित है। कुछ श्रद्धालु नदी में आस्था की डुबकी लगाने के बाद पूजा-पाठ करते हैं। तो कुछ भक्त हाथ, पैर और मुंह धोकर, मां बाराही देवी के दर्शन करते हैं।

इस पावन स्थान पर मुंडन संस्कार, इत्यादि जैसे और कई धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। जो भक्त सच्चे मन से मां के धाम पहुंचता है। पूजा-अर्चना करता है। मां उनकी सभी मुरादें पूरी करती हैं।

जिन भक्तों की मनोकामना पूरी हो जाती है, वे धाम पर हलवा-पूड़ी बनाते हैं। पहले प्रसाद मां को चढ़ाते हैं, उसके बाद सगे-संबंधियों के साथ स्वयं ग्रहण करते हैं।  

दर्शन करने कब जाएं?

Best Tourist Places in Pratapgarh: यूं तो भक्त, मां चौहरजन देवी के दर्शन करने हर दिन जाते हैं। पर सोमवार और शुक्रवार को मेला लगने की वजह से हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। नवरात्रि के पावन पर्व पर भक्तों की संख्या बहुत ज़्यादा बढ़ जाती है।

नौ दिनों में लगभग लाखों श्रद्धालु चौखट पर माथा टेकने पहुंचते हैं। शीतला सप्तमी और कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर भी लाखों का मजमा लगता है। मां चौहरजन की महिमा अद्भुत है। जिसे चंद शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।

चौहरजन जाने का मार्ग

Best Tourist Places in Pratapgarh: मां बाराही या चौहरजन धाम, रानीगंज-जामताली-पट्टी रोड से पहुंचा जा सकता है। यह धाम रानीगंज से 8-9 किमी. उत्तर दिशा में स्थित है। बिल्कुल सई नदी के किनारे एक ऊंचे टीले पर। प्रतापगढ़ से धाम की दूरी 17.2 किमी है। इसके लिए आपको दिलीपपुर मार्ग पकड़ना होगा। नजदीकी रेलवे स्टेशन प्रतापगढ़ जंक्शन (PBH) है। बाइक या अन्य किसी निजी साधन से जाने में ही समझदारी है।  

आस्था और विश्वास का प्रतीक, मां चौहरजन धाम, रानीगंज, जिला प्रतापगढ़ के बेहतरीन पर्यटन स्थलों में से एक है। मां बाराही के चौहरजन धाम में मन की शांति के साथ सुख का अहसास है। सई नदी की गाती धारा है। जब वक़्त मिले तो जाएं जरूर। मां बाराही सबकी सुनती हैं, सबकी झोली भरती हैं।

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जय मां बाराही! जय मां चौहरजन!  

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