Bijethua Mahaviran: एक रहस्य, जो कोई नहीं जान पाया

इस लेख में आप जान सकते हैं विजेथुवा महावीरन (Bijethua Mahaviran) का इतिहास, विजेथुवा महावीरन धाम का महत्त्व और मकड़ी कुंड का महत्त्व। बिजेथुआ महावीरन धाम कहां है? बिजेथुआ महावीरन कैसे पहुंचें? बिजेथुआ महावीरन में कहां ठहरें?

Bijethua Mahaviran: भारत देवों की भूमि है। इसकी चारों दिशाओं में कई ऐसे प्राचीन, दिव्य और भव्य मंदिर हैं, जो अपने स्वर्णिम इतिहास के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं।

अगर ‘श्री हनुमान मंदिर’ की बात की जाए, तो भारतभर में अनगिनत ऐसे मंदिर हैं, जिसकी महिमा सबसे अद्भुत और निराली है। इन दिव्य मंदिरों का वर्णन कई शास्त्रों और पुराणों में किया गया है।

ऐसा ही एक अनूठा मंदिर उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले के कादीपुर तहसील में स्थित है। बिजेथुआ महावीरन धाम के नाम से विख्यात यह पवित्र स्थल सुलतानपुर ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश सहित संपूर्ण भारत की शान है। बिजेथुआ महावीरन धाम का उल्लेख महाकाव्य श्री रामायण में पढ़ा जा सकता है।

बिजेथुआ में स्थापित भगवान श्री हनुमान के इस मंदिर को ‘विजेथुवा महावीरन धाम’ के नाम से जाना जाता है। कहते हैं कि इस मंदिर में स्थापित हनुमान जी की मूर्ति का एक पैर पाताल लोक तक धंसा हुआ है। मंदिर के पुजारियों और अन्य जानकारों का कहना है कि एक बार पुरातत्व विभाग द्वारा सौ फीट तक की खोदाई कराई गई थी, लेकिन पैर के अंत का पता नहीं चल सका।

बिजेथुआ महावीरन का इतिहास

दशानन रावण पुत्र मेघनाद के शक्ति-बाण से लक्ष्मण जी मूर्छित थे। भगवान श्री राम अपने प्रिय अनुज के वियोग में डूबे हुए थे। लक्ष्मण जी के प्राण बचाने के लिए लंका में रहने वाले सुषेन वैद्य ने उपाय बता दिए थे।

संकटमोचन महाबली श्री हनुमान संजीवनी बूटी लाने के लिए निकल चुके थे। वे ढाई हजार किलोमीटर प्रति घंटे की गति से द्रोणगिरी पर्वत की ओर बढ़े जा रहे थे। उन्हें केवल दो घंटे में कुल पांच हजार किलोमीटर (जाने-आने सहित) की यात्रा तय करनी थी।

भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्र अवतार भगवान हनुमान जी के उड़ने की गति का वर्णन ‘श्री हनुमान चालीसा’ में पढ़ा जा सकता है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा है कि:-

“जुग सहस्त्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।”

अर्थात् अपने बचपन-काल में भगवान श्री हनुमान ने एक युग सहस्त्र योजन की दूरी पर स्थित भानू यानी श्री सूर्यदेव को मीठा फल समझकर मुंह में निगल लिया था।

बिजेथुआ महावीरन का इतिहास

संजीवनी बूटी लाने के लिए जब भगवान बजरंगबली तीव्र गति से बढ़े जा रहे थे, तो उन्हें बड़े जोर की प्यास लग गई। उन्होंने आकाश से पृथ्वी पर एक जल से भरा हुआ निर्मल तालाब देखा। अगले क्षण वे उस जलकुंड के पास थे। श्री हनुमान जी जैसे ही जल ग्रहण करने के लिए आगे बढ़े, ‘राम’ नाम की एक मधुर आवाज़ सुनकर उनके कदम रुक गए।

“इतनी भी क्या जल्दी है, अंजनी पुत्र पवनसुत हनुमान? दो क्षण रुकिए। इस पवित्र जल में स्नान कीजिए। फिर कुछ खा-पीकर, थोड़ा विश्राम कर लीजिए। आप जिस कार्य से जा रहे हैं, वह अतिशीघ्र हो जाएगा। आपको घबराने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है।”

बिजेथुआ महावीरन का इतिहास: तालाब के पास तपस्या वाली अवस्था में बैठा कालनेमि साधु के वेश में ‘श्री राम-राम’ का जप कर रहा था, जिसे सुनकर हनुमान जी उसके पास चले गए। कालनेमि ने हनुमान जी को स्नान करने और माया से बनाए अपने आश्रम में विश्राम करने के लिए आग्रह किया।

“जैसी प्रभु की इच्छा! जय श्री राम।” वृक्ष के नीचे बैठे तपस्वी की बातें मानकर भगवान श्री हनुमान ने मुस्कुराते और हाथ जोड़ते हुए कहा।

जब भगवान हनुमान जी स्नान करने के लिए तालाब में गए, तो कालनेमि मगरमच्छ का वेश धारण करके उन पर हमला कर दिया।

तभी एक मकड़ी ने श्री राम भक्त बजरंगबली से कहा- “हे प्रभु! आप किसी महान कार्य के उद्देश्य से जा रहे हैं। अपना बहुमूल्य समय बर्बाद मत कीजिए। आप जिसे महान और ज्ञानी तपस्वी समझ रहे हैं, वास्तव में वह ‘कालनेमि’ नामक दैत्य है। इसे रावण ने आपको मारने और आपका समय बर्बाद करने के लिए भेजा है।”

बिजेथुआ महावीरन का इतिहास: पहले तो भगवान उस जीव की हत्या करने से बच रहे थे। लेकिन, मकड़ी की बात सुनते ही वीर बजरंगबली के क्रोध का पारा सातवें आसमान के परे था। उन्होंने बिना समय गंवाए तत्काल उस राक्षस का वहीं वध कर दिया। इसके बाद उस तालाब में स्नान किया और थोड़ा विश्राम करने के बाद फिर संजीवनी की खोज में निकल पड़े थे।

लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र

त्रेता युग में भगवान श्री हनुमान ने जिस स्थल पर कालनेमि नाम के राक्षस का वध किया था। आज उसी स्थल पर श्री हनुमान जी का शानदार मंदिर बना हुआ है। जिस तालाब या कुंड में भगवान ने स्नान किया था। अब वह ‘मकड़ी कुंड’ के नाम से विख्यात है। मंदिर में विराजमान भगवान श्री हनुमान को ‘बिजेथुआ महावीरन’ के नाम से जाना जाता है। वर्तमान समय में ‘बिजेथुआ महावीरन धाम’ लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।

बिजेथुआ महावीरन धाम का महत्त्व

यह सूरापुर यानी सुलतानपुर जिला का सुप्रसिद्ध, प्राचीन और पौराणिक मंदिर है। इस पवित्र स्थल का वर्णन गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री रामचरितमानस में पढ़ा जा सकता है। श्री रामायण में इस स्थान की अपनी ऐतिहासिक कथा है।

बिजेथुआ महावीरन धाम का महत्त्व: पूजा-अर्चना के लिए यहां उत्तर प्रदेश के कई जिलों से लाखों भक्त आते हैं। संकट, दुःख और दरिद्रता से मुक्ति पाने के लिए हर मंगलवार व शनिवार को यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। कहते हैं कि बिजेथुआ महावीरन यानी श्री हनुमान जी के दर्शन करने से मन की शांति के साथ, सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। अधिकांश भक्तजन अपनी मनोकामना की सिद्धि के लिए यहां घंटियां चढ़ाते हैं।

बिजेथुआ महावीरन धाम का महत्त्व: वर्तमान समय की बात करें तो इस पवित्र स्थल की महिमा सिर्फ़ सुलतानपुर जनपद तक ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों के लोगों के लिए आस्था का केंद्र है। जाैनपुर, प्रतापगढ़, अयोध्या, अंबेडकरनगर सहित अन्य जिले के लोग दर्शन-पूजन करने आते हैं। तभी तो शनिवार और मंगलवार के दिन यहां मेले जैसा दृश्य रहता है।

मकड़ी कुंड का महत्त्व

Bijethua Mahaviran: बिजेथुआ महावीरन धाम आने वाले अधिकांश भक्त भगवान श्री हनुमान के दर्शन व पूजन से पहले ‘मकड़ी कुंड’ में हाथ-पैर धुलते या स्नान करते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कुंड के चारों ओर सीढ़ीनुमा पक्की घाट बनाई गई है। ऐसी मान्यता है कि ‘मकड़ी कुंड’ में स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है।

मुक्ति मिले या ना मिले। पापों का बोझ हल्का हो या ना हो। पर हां, ‘बिजेथुआ महावीरन’ के दर्शन करने से मन की अपार शांति अवश्य मिलती है। यह अद्भुत अनुभव केवल वही श्री हनुमान भक्त महसूस कर सकते हैं, जो सच्चे तन-मन और नेक विचारों से श्री हनुमान के दर्शन और पूजा-अर्चना करते हैं।

श्री हनुमान की माया, जो कोई नहीं जान पाया!

Bijethua Mahaviran: कहते हैं कि बिजेथुआ महावीरन में विराजमान भगवान श्री हनुमान जी की मूर्ति का दाहिना पैर पाताल लोक तक धंसा हुआ है। यही कारण है कि यहां की मूर्ति थोड़ी टेढ़ी है।

कुछ समय पहले इस मूर्ति को सीधा करने का प्रयास किया गया था, पर पैर का सिरा ना मिल पाने की वजह से इस कार्य को स्थगित करना पड़ा था। कुछ वर्ष पहले पुरातत्व विभाग द्वारा सौ फीट तक की खोदाई कराई गई थी, लेकिन पैर के अंत का पता नहीं चल सका।

चलिए, अब जानते हैं कि बिजेथुआ महावीरन धाम कहां है और कैसे वहां बड़े आसानी से पहुंचा जाए?

बिजेथुआ महावीरन धाम कहां है?

Bijethua Mahaviran: यह पौराणिक, पवित्र और प्रसिद्ध मंदिर सुलतानपुर जिला के कादीपुर तहसील क्षेत्र में स्थित है। बिजेथुआ महावीरन जिला मुख्यालय से लगभग 40-50 किमी दूर कादीपुर तहसील के निकट आता है।

यहां बस, निजी टैक्सी या बाइक द्वारा पहुंचा जा सकता है। कादीपुर तहसील से विजेथुआ महाबीरन (श्री हनुमान मंदिर) लगभग 8-10 किमी की दूरी पर स्थित है।

बिजेथुआ महावीरन कैसे पहुंचें?

फ्लाइट द्वारा कैसे पहुंचें: सबसे नजदीकी डोमेस्टिक एयरपोर्ट प्रयागराज है। वहां से बिजेथुआ महावीरन धाम, सुलतानपुर लगभग दो घंटे की ड्राइव पर टैक्सी या निजी साधन द्वारा पहुंचा जा सकता है। दूसरा निकटतम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा चौधरी चरण सिंह हवाई अड्डा, लखनऊ है। वहां से सुलतानपुर लगभग 148 किमी दूर है।

Bijethua Mahaviran: लखनऊ या अन्य केंद्रों से सड़क मार्ग द्वारा सुलतानपुर या फिर डायरेक्ट बिजेथुआ महावीरन धाम निजी साधन या बस अथवा टैक्सी वाहनों से कादीपुर पहुंचा जा सकता है। कादीपुर से लगभग 10 किमी सूरापुर बाज़ार, फिर वहां से दो किमी दक्षिण की ओर चलने के बाद बिजेथुआ महावीरन धाम या श्री हनुमान मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।

ट्रेन द्वारा बिजेथुआ महावीरन कैसे पहुंचें?

सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन ‘सुलतानपुर जंक्शन’ (SLN) है। यह स्टेशन उत्तर प्रदेश के लखनऊ, प्रयागराज और कानपुर तथा दिल्ली, मुंबई, जयपुर और भोपाल जैसे सभी प्रमुख शहरों व अन्य राज्यों से जुड़ा हुआ है।

सड़क द्वारा बिजेथुआ महावीरन कैसे पहुंचें?
Bijethua Mahaviran: रोड द्वारा सुलतानपुर पहुंचने के कई तरीके हैं। सुलतानपुर शहर अयोध्या से 60 किमी, प्रयागराज से 103 किमी, लखनऊ से 148 किमी, वाराणसी से 162 किमी, कानपुर से 231 किमी, दिल्ली से 630 किमी, भोपाल से 662 किमी, जयपुर से 743 किमी की दूरी पर स्थित है।

उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) की बसों या निजी टैक्सी द्वारा सुलतानपुर बड़े आसानी से पहुंचा जा सकता है। सुलतानपुर से बिजेथुआ महावीरन की दूरी लगभग 50 किमी है।

बिजेथुआ महावीरन में कहां ठहरें?

Bijethua Mahaviran: ग्रामीण क्षेत्र होने की वजह से यहां ठहरने के लिए होटल या होम-स्टे की सुविधा नहीं है। लेकिन हां, मंदिर परिसर में एक धर्मशाला है, जहां ठहरा जा सकता है। इसके अलावा, कादीपुर में ठहरने की ठीक-ठाक व्यवस्था है। बेहतर होटल या रेस्टोरेंट न होने की वजह से नाश्ते और भोजन की व्यवस्था खुद ही करनी पड़ती है।

बिजेथुआ महावीरन के दर्शन करने आने वाले भक्त भोजन व नाश्ता अपने साथ लाते हैं। कुछ लोग धाम पर ही कड़ाही चढ़ाते हैं। हलवा-पूड़ी बनाकर भगवान श्री हनुमान को आस्था का भोग लगाते हैं। उसके बाद अपनों के साथ प्रसाद ग्रहण करते हैं।

इस आर्टिकल में आपने जाना विजेथुवा महावीरन (Bijethua Mahaviran) का इतिहास, विजेथुवा महावीरन धाम का महत्त्व, बिजेथुआ महावीरन धाम कहां है और बिजेथुआ महावीरन कैसे पहुंचें?

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