Chandrashekhar Azad Park Prayagraj: 2024 की यादगार ट्रिप

गर आप प्रयागराज (Prayagraj), उत्तर प्रदेश घूमने गए हैं और आपने अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पार्क (Chandrashekhar Azad Park) नहीं देखा, तो भारत का गौरवशाली इतिहास नहीं जाना। एक ऐसा ग्रीन स्थान, जहां इतिहास आज भी वर्तमान है! चलिए जानते हैं Best Tourist Places in Prayagraj.

अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पार्क की स्थापना कैसे हुई?

Best Tourist Places in Prayagraj: 1870– त्रिवेणी संगम प्रयागराज (Prayagraj) फिरंगियों का गढ़ हुआ करता था।

धार्मिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, राजनीतिक और पर्यटन का केंद्र बिंदु तीर्थराज प्रयाग उनके चंगुल में था।

इलाहाबाद यानी प्रयागराज (Prayagraj) पर अंग्रेज़ों का पूरा दबदबा था।

शाम 5 बजे के बाद आम हिंदुस्तानियों को उस क्षेत्र में कदम रखने की इजाजत नहीं थी।

जो सामान्य भारतीय जनमानस अंग्रेज़ों के बनाए उस नियम को तोड़ने की कोशिश करते थे।

उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती थी।

देवों की भूमि, हिन्दुओं की आस्था का केंद्र, गोरों की रंगीन महफिल की भूमि बन गई थी।

देर रात तक अंग्रेज़ पार्टी का लुफ्त उठाते।

शराब, शबाब और कबाब के साथ-साथ रंगारंग गीत-संगीत की चकाचौंध में खोए रहते।

प्रयागराज (Prayagraj) में गोरों की बैंड पार्टी और सिपाहियों की पूरी कंपनी निवास करती थी।

उस समय यह ‘कंपनी बाग’ के नाम से लंदन तक सुप्रसिद्ध था।

वर्ष 1870 में सक्स-कोबर्ग के राजकुमार अल्फ्रेड व गोथा प्रयागराज के दौरे पर आए थे।

उनकी इस यात्रा को ‘प्रतीक चिन्ह’ के रूप में संजोने के लिए एक भव्य पार्क का निर्माण किया गया।

जिसका नाम ‘अल्फ्रेड पार्क’ रखा गया।

अल्फ्रेड पार्क कैसे बना अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पार्क?

Chandrashekhar Azad Park Prayagraj: समय का पहिया चलता गया और 1931 में प्रवेश कर गया।

27 फरवरी, 1931 में इसी ‘अल्फ्रेड पार्क’ में भारत माता के वीर सपूत अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद का सामना अंग्रेज़ सिपाहियों से हो गया।

कहा जाता है कि उन्होंने पहले पांच गोलियां अंग्रेज़ सिपाहियों पर चलाईं और छठी गोली से ख़ुद शहीद हो गए।

यानी 1931 में 27 फरवरी के दिन ‘अल्फ्रेड पार्क’ में महान क्रांतिकारी, स्वतंत्रता सेनानी, शहीद चंद्रशेखर आज़ाद जी अंग्रेज़ों से लोहा लेते हुए, केवल 24 साल की उम्र में देश के लिए अजर-अमर हो गए।

अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद की पूरी जीवनी यहां पढ़ें: https://gyanmanch.in/chandrashekhar-azad-ki-kahani/

उनके शहीद होने के बाद प्रयागराज के ‘अल्फ्रेड पार्क’ का नाम बदलकर ‘अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पार्क’ कर दिया गया।

अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पार्क कहां है?

Best Tourist Places in Prayagraj: 133 एकड़ भूमि पर सुसज्जित अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पार्क, प्रयागराज का सबसे ग्रीन पार्क है।

जो प्रयागराज सिटी के अंग्रेजी क्वार्टर, सिविल लाइंस के सेंटर में स्थित है।

चंद्रशेखर आज़ाद पार्क प्रयागराज (Chandrashekhar Azad Park Prayagraj) का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण स्थान रहा है।

एक तरफ यह अमीर अंग्रेज़ों का हर मामले में गढ़ और दूसरी ओर आज़ादी के मतवालों के लिए ‘स्वतंत्रता संग्राम स्थल’ हुआ करता था।

यहां भारतीय आंदोलनकारी, अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, सत्याग्रह, आदि करते थे।

उस समय जब ‘इलाहाबाद संयुक्त प्रांत की राजधानी’ थी, तब यह स्थल ‘विधानसभा का घर’ हुआ करता था।

मैंने गूगल से पूछा कि प्रयागराज के अल्फ्रेड पार्क का नाम अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पार्क कब रखा गया, तो उसने इस विषय में कोई जानकारी नहीं दी।

मैंने यही सवाल चैटजीपीटी (ChatGPT) से पूछा, तो उसने बताया कि ‘चंद्रशेखर आज़ाद पार्क’ पहले ‘कंपनी बाग’ या ‘अल्फ्रेड पार्क’ के नाम से जाना जाता था।

लेकिन, साल 2017 में स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आज़ाद के सम्मान और स्मृति में इस पार्क का नाम आधिकारिक रूप से ‘अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पार्क’ किया गया।

क्यों प्रसिद्ध है यह पार्क?

अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पार्क प्रयागराज (Chandrashekhar Azad Park Prayagraj) प्राकृतिक हरियाली की गोद में बसा बेहद खूबसूरत स्थल है।

प्रकृति की सुंदरता और शांत माहौल, पार्क के हर कोने में दिल जीतने के लिए काफी है।

प्रशासन द्वारा बेहतर रखरखाव की वजह से पार्क की रौनक बरकरार है।

कई तरह के रंग-बिरंगे फूल-पौधे, हरी-भरी घासें, आंखों को ठंडक और मन को सुकून देती हैं।

इस भव्य पार्क में शहीद चंद्रशेखर आज़ाद की गौरवशाली स्मारक सुशोभित है।

प्रतिमा में वे अपनी मूंछ पर ताव देते हुए दिखाई दे रहे हैं।

पार्क के परिसर में पब्लिक लाइब्रेरी, जीएनझा इंस्टिट्यूट सहित ब्रिटिश दौर की कई शानदार इमारतें मौजूद हैं।

आप यकीन नहीं मानेंगे कि मौजूदा समय में यह पार्क ज्ञान, गौरव, सम्मान, पर्यटन, मनोरंजन, शिक्षा और स्वास्थ्य का प्रमुख केंद्र है।

यह प्रयागराज का सबसे बड़ा पार्क हो सकता है, जो कि 133 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है।

क्यों लुभाता है पर्यटकों को यह पार्क?

पर्यटन के नज़रिए से देखा जाए तो अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पार्क प्रयागराज (Chandrashekhar Azad Park Prayagraj) पर्यटकों को खूब भाता है।

इस भव्य ग्रीन पार्क में स्थानीय लोगों के अलावा, प्रयागराज आने वाले तीर्थयात्री और पर्यटक अपनों के साथ यादगार व खूबसूरत वक़्त बिताने ज़रूर जाते हैं।

बहुत से लोग अपने अमर महानायक की प्रवित्र प्रतिमा और शहीद की साक्षी रही उस माटी व पेड़ के दर्शन, पूजन व माथा टेकने जाते हैं।

युवा, बुजुर्ग सहित सभी वर्ग के लोग ‘आज़ाद पार्क’ की पवित्र मिट्टी का तिलक लगाने जाते हैं।

लोग उनकी उस ‘कोल्ट रिवॉल्वर’ को देखने भी जाते हैं, जो इलाहाबाद संग्रहालय में प्रदर्शित है। 

सुबह के समय हरियाली और शांत वातावरण के बीच हजारों युवाओं एवं बुजुर्गों को वॉक, रनिंग, योग, व्यायाम तथा कसरत आदि जैसी स्वास्थ्य गतिविधियों में देखा जा सकता है।

शहर के भीतर स्थानीय शहर-वासियों को बेहतर स्वास्थ्य का उपहार देने में इस पार्क का खास योगदान है।

एक तरीके से इसे फिटनेस पार्क भी कहा जा सकता है!

शाम के वक़्त बिजली की रंग-बिरंगी रोशनी में चंद्रशेखर आज़ाद पार्क प्रयागराज (Chandrashekhar Azad Park Prayagraj) की रौनक और पर्यटकों की चहल-पहल, दोनों बढ़ जाती है।

विकास कार्यों के उद्देश्य से पार्क में प्रवेश करने के लिए 5 रुपए का टिकट लेना पड़ता है।

यानी केवल पांच रुपए के टिकट में खूबसूरत और विशाल पार्क को देखा जा सकता है।

शुद्ध हवाओं के माहौल में सुकून के पल जिया जा सकता है।

फूलों और पौधों के मनमोहक रूप को निहारा जा सकता है।

अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पार्क प्रयागराज (Chandrashekhar Azad Park Prayagraj) हर सुबह 5:00 बजे से शाम 8:00 बजे तक जनता के लिए खुला रहता है।

परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ लाइट एंड साउंड का मज़ा भी उठाया जा सकता है।

पार्क के मुख्य आकर्षण

Best Tourist Places in Prayagraj: यह पार्क, छात्रों के लिए ‘सरस्वती का मंदिर’ है।

जहां हर वक़्त आईएएस-पीसीएस जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं आदि की तैयारी करने वाले विद्यार्थी पढ़ते हुए दिखाई देंगे।

इसकी सबसे बड़ी वजह इस पार्क के आस-पास ही इलाहाबाद विश्वविद्यालय और अन्य बड़े शैक्षिक संस्थान हैं।

पार्क के परिसर में विक्टोरिया मेमोरियल, प्रयाग संगीत समिति नामक संगीत महाविद्यालय और एक क्रिकेट मैदान तथा मदन मोहन मालवीय स्टेडियम है।

अष्टकोणीय बैंड स्टैंड और मील का पत्थर थॉर्नहिल मेने मेमोरियल है। 

वह इमारत स्कॉटिश बैरोनियल शैली में रिचर्ड रोस्केल बेने द्वारा बलुआ पत्थर और ग्रेनाइट बुर्ज और मेहराब के गुच्छों के साथ डिजाइन की गई है। 

विक्टोरिया मेमोरियल

अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पार्क प्रयागराज (Chandrashekhar Azad Park Prayagraj) में स्थित ‘विक्टोरिया मेमोरियल’ पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है।

सफेद संगमरमर वाले इस स्मारक की चमक आज भी बरकरार है।

इतालवी संगमरमर की बनी स्मारिका के नीचे, पहले विदेशी महारानी विक्टोरिया की विशाल प्रतिमा हुआ करती थी।

लेकिन, 1957 में उसे हटा दिया गया।

कहा जाता है कि ‘विक्टोरिया मेमोरियल’ रानी विक्टोरिया की याद में बनवाया गया था।

उस स्मारक को इतालवी संगमरमर के साथ इतालवी चूना-पत्थर से विशाल कैनोपी के रूप में निर्मित गया था।

उत्तर प्रदेश प्रयागराज जिला की वेबसाइट पर उपलब्ध डाटा के अनुसार ‘विक्टोरिया मेमोरियल’ का लोकार्पण 24 मार्च, 1906 में जेम्स दिग्ज लाटूश द्वारा किया गया था।

इलाहाबाद संग्रहालयजहां संरक्षित है अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद की पिस्टल

Best Tourist Places in Prayagraj: पार्क के परिसर में भव्य इलाहाबाद संग्रहालय स्थित है।

इस म्यूजियम में ‘आज़ाद की पिस्तौल’ सहित उनसे संबंधित अन्य कई तमाम चीज़ें संभालकर रखी गई हैं।

पर्यटक या भारतवासी जब अमर शहीद की उन पवित्र वस्तुओं को देखते हैं, तो गर्व और सम्मान के उत्साह से भर जाते हैं।

आज़ाद की ‘बलिदानी पिस्तौल’ को देखकर स्वतंत्रता संग्राम की यादें ताजा हो जाती हैं।

कहा जाता है कि आज़ाद ने इस पिस्तौल को 1906 से 1931 तक इस्तेमाल किया था।

जिन महानुभावों ने स्वतंत्रता आंदोलन के किस्से सुने या पढ़े हैं, यकीन मानिए, ‘आज़ाद’ से जुड़ी वस्तुओं को देखने के बाद रोमांचित, गौरवान्वित और भाव-विभोर हो उठते हैं।

यह तमाम ऐतिहासिक वस्तुएं आगंतुकों के लिए आकर्षण का केंद्र होती है।

हर हिंदुस्तानी को यह पार्क और म्यूजियम ज़िंदगी में एक बार ज़रूर देखना चाहिए।

इलाहाबाद लोक पुस्तकालय (थॉर्नहिल मेन मेमोरियल)

अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पार्क प्रयागराज (Chandrashekhar Azad Park Prayagraj) कैंपस में एक भव्य सार्वजनिक पुस्तकालय है।

जिला प्रयागराज की वेबसाइट के अनुसार, ‘इलाहाबाद लोक पुस्तकालय’ की स्थापना उत्तर-पश्चिमी सीमावर्ती प्रांतों की सरकार द्वारा की गई थी।

वर्तमान समय में यह राजकीय लोक पुस्तकालय ‘थॉर्नहिल मेन मेमोरियल भवन’ में स्थित है।

इस इमारत का निर्माण सीबी थॉर्नहिल और एफओ मेन की याद में किया गया था।

कहते हैं कि यह स्मारिका उनकी अटूट मित्रता एवं विद्वता के मूल्यों को समाज में दर्शाने के लिए किया गया था।

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इस पुस्तकालय में हिंदी, अंग्रेज़ी, संस्कृत, उर्दू, अरबी, फारसी, बांग्ला और फ्रेंच भाषा में पुस्तकों, पत्रिकाओं, समाचार-पत्रों, राजपत्रों सहित अन्य पढ़ने योग्य सभी प्रकार की सामग्री की विस्तृत श्रृंखला मौजूद है।

कुछ उल्लेखनीय पुस्तकों में ज्योतिष-शास्त्र एवं गणेश पुराण के साथ-साथ मज़्म-उल-बहरीन एवं फिरदौसी का शाहनामा जैसी प्राचीन पुस्तकें मिल जाएंगी।

कहते हैं कि उस पब्लिक पुस्तकालय में ब्रिटिश युग के महत्वपूर्ण दस्तावेज भी सुरक्षित रखे गए हैं।

नॉर्थ वेस्टर्न प्राविंसेज एंड अवध लेजिस्लेटिव कौंसिल की पहली बैठक 8 जनवरी, 1887 को इस भवन में हुई थी।

भव्य आज़ाद गैलरी

अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पार्क प्रयागराज (Chandrashekhar Azad Park Prayagraj) कैंपस में इलाहाबाद संग्रहालय है, जिसमें एक नई, भव्य और दिव्य ‘आज़ाद गैलरी’ स्थापित की गई है।

इस गैलरी में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से संबंधित चीज़ें प्रदर्शित की जाएंगी और आज़ादी के गुमनाम महानायकों की वीर गाथाएं सुनाई जाएंगी।

अभी डाटा बेस बनाया जा रहा है। कुछ चीज़ें आवाज़ द्वार, तो कुछ जानकारी चित्र के माध्यम से बताई जाएंगी।

यानी इतिहास की मुख्य घटनाओं को जानकारी ऑडियो और वीडियो के चलचित्र के जरिए दी जाएगी।

इलाहाबाद संग्रहालय में अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद के नाम से डेडिकेटेड ‘आज़ाद गैलरी’ बनकर तैयार है।

10 करोड़ रुपए की लागत से बनी यह देश की पहली ऐसी गैलरी है, जो ऑडियो, वीडियो, लाइट और साउंड जैसी अन्य कई अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगी।

आज़ाद गैलरी के मुख्य आकर्षण

Best Tourist Places in Prayagraj: गैलरी के जरिए दर्शक, आगंतुक, विद्यार्थी, पर्यटक आदि, आज़ाद की जीवनी और उनसे जुड़ी सभी यादों को बेहतर तरीके से देख-समझ सकेंगे।

मुख्य आकर्षण में आज़ाद की वह ‘रिवाल्वर’ होगी, जिससे उन्होंने अंग्रेज़ों के छक्के छुड़ाए थे।

गैलरी में 211 से अधिक हथियारों का प्रदर्शन किया जाएगा, जिनमें 12 तोपें शामिल हैं।

‘आज़ाद गैलरी’ पूरी तरह से सेंट्रलाइज एसी से लैस रहेगी।

एलईडी लैम्प जैसी इकोफ्रेंडली चमक से सुसज्जित होगी।

गैलरी में आज़ाद की रिवाल्वर, कुर्ता-पायजामा व उनसे जुड़ी अन्य सभी चीजें दिलचस्प और नए तरीके से प्रदर्शित की जाएंगी।

पर्यटक ‘प्रथम व द्वितीय विश्व युद्ध’ से जुड़ी तोपें, गोले और अन्य युद्ध के सामान भी प्रदर्शित होते देख सकेंगे।

इसके अलावा, आज़ादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बारे में जानकारी उपलब्ध होगी।

देश की आज़ादी की झलकियां जैसे काकोरी कांड, जलियावाला बाग हत्याकांड, दांडी मार्च-सत्याग्रह सहित अन्य कई महत्वपूर्ण घटनाओं का इतिहास भी देखा जा सकेगा।

रंग-बिरंगी लाइटों से सजने वाली यह गैलरी ज्ञान और शोध के उद्देश्य से बनाई गई है।

आज़ाद गैलरी के उद्घाटन की पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।

प्रयागराज यानी इलाहाबाद कैसे पहुंचें, कहां रुकें, क्या खाएं? इन सभी चीज़ों की सटीक जानकारी के लिए यह लेख पढ़ें: https://gyanmanch.in/prayag-magh-mela-2024/