Famous Shiva Temple In Jaunpur: उत्तर प्रदेश का सर्वोत्तम प्लेस

यह आर्टिकल जौनपुर के दिल सुजानगंज के नाम समर्पित है। जहां आप जानेंगे, श्री गौरी शंकर धाम सुजानगंज का रहस्यमयी इतिहास (Gauri Shankar Dham Sujanganj History), जौनपुर का सुप्रसिद्ध शिव मंदिर (Famous Shiva Temple In Jaunpur) और सुजानगंज की विश्वप्रसिद्ध एटम बम मिठाई के बारे में।

रूरल इंडिया का असली अनुभव चाहिए तो सुजानगंज आइए!

यह पहली बार है जब श्री गौरी शंकर धाम सुजानगंज के बारे में इतनी बारीकी से जानकारी मुहैया कराई जा रही है। या यूं कहें कि यह सुजानगंज के बारे में लिखा जाने वाला अपनी तरह का पहला यूनिक कंटेंट है। जहां आप श्री गौरी शंकर धाम सुजानगंज का अद्भुत इतिहास (Gauri Shankar Dham Sujanganj History) सहित अन्य कई जानकारी पाएंगे।

वैसे आप इस लेख को सिर्फ़ आर्टिकल मत समझिए, यह श्री गौरी शंकर धाम और सुजानगंज का वो आइना है, जिसे देखने के बाद आपको रूरल इंडिया का असली अनुभव मिलेगा।

चलिए सबसे पहले श्री गौरी शंकर धाम सुजानगंज के रहस्यमयी इतिहास (Gauri Shankar Dham Sujanganj History) और जौनपुर के सुप्रसिद्ध शिव मंदिर (Famous Shiva Temple In Jaunpur) के बारे में जानते हैं।

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श्री गौरी शंकर धाम का इतिहास (Famous Shiva Temple In Jaunpur)

Gauri Shankar Dham Sujanganj History: सुजानगंज, जौनपुर जिले का एक छोटा, मगर सुप्रसिद्ध स्थान है।

‘श्री गौरी शंकर धाम’ सुजानगंज (Gauri Shankar Dham Sujanganj) बाज़ार की आन-बान और शान का प्रतीक है।

वहीं सुजानगंज की फेमस मिठाई ‘एटम बम’ की अपनी अलग पहचान है।

श्री गौरी शंकर धाम का इतिहास (Gauri Shankar Dham Sujanganj History) के बारे में विस्तार से जानने से पहले यह जान लें कि सुजानगंज कहां है?

क्यों यह बाज़ार लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है?

Gauri Shankar Dham Sujanganj History: सुजानगंज, उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के पश्चिमी छोर पर स्थित है।

इस बाज़ार में सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर पीजी कॉलेज तक की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

देश के चुनाव में सुजानगंज खास भूमिका निभाता है।

भारत के कई बड़े और दिग्गज नेता एवं मंत्री इस धरती पर कई बार आ चुके हैं।

यह धार्मिक और राजनीतिक भूमि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई बड़े नेताओं और मंत्रियों के आगमन का साक्षी रहा है।

सुजानगंज की भूमि ने राजनेता के रूप में अभिनेता राज बब्बर जैसे कई सेलेब्रेटी को कई बार देखा है।

लोकसभा चुनाव 2024 में एक बार फिर यह बाज़ार कई बड़े राजनेताओं की मौजूदगी की गवाही दे सकता है।

सुजानगंज कहां है?

Famous Lord Shiva Temple In Jaunpur: जौनपुर मुख्यालय से सुजानगंज की दूरी लगभग 50 किमी के करीब है।

यह कई गांवों का ब्लॉक, थाना, पोस्ट और मुख्य बाज़ार है।

सुजानगंज की पूर्व की ओर मछलीशहर और जौनपुर शहर स्थित है।

उत्तर दिशा में बदलापुर, दक्षिण में मुंगरा बादशाहपुर और पश्चिम में लगभग 15 किमी के बाद प्रतापगढ़ जिला शुरू हो जाता है।

सुजानगंज बाज़ार से उत्तर की ओर 4-5 किमी की दूरी पर सई नदी बहती है।

यह आसपास के कई गांवों का मुख्य बाज़ार है, जहां हर तरह की सामग्री मिल जाती है।

सुजानगंज को बालवरगंज के नाम से भी जाना जाता है। बालवरगंज में ही बड़ा पोस्ट ऑफिस स्थित है।

पता में पोस्ट ‘बालवरगंज’ ही लिखा जाता है।

सुजानगंज मुंगरा बादशाहपुर विधानसभा क्षेत्र के तहत आता है।

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मौजूदा समय में बादशाहपुर विधानसभा के विधायक (सपा) पंकज पटेल हैं।

मुंगरा बादशाहपुर उत्तर प्रदेश विधानसभा का एक निर्वाचन क्षेत्र है, जो भारत के उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में स्थित है।

सुजानगंज क्षेत्र की पूर्व विधायक और मौजूदा राज्यसभा सांसद (भाजपा) सीमा द्विवेदी इस क्षेत्र की गरिमा हैं।

वहीं भाजपा के लोकप्रिय युवा नेता अजय शंकर दुबे सुजानगंज सहित बादशाहपुर विधानसभा क्षेत्र के उभरते और चमकते सितारे हैं।

इसके अलावा सरकारी पदों पर नियुक्त बड़े-बड़े अधिकारियों का गढ़ है सुजानगंज

सुजानगंज दो वजहों से मुख्य रूप से मशहूर है:

1. भगवान शिव जी का सुप्रसिद्ध मंदिर (Famous Lord Shiva Temple In Jaunpur) श्री गौरी शंकर धाम (Shri Gauri Shankar Dham) है यहां।

भगवान शिव जी का यह दिव्य मंदिर सुजानगंज की लाइफलाइन है। या यह कहें कि लाखों शिव भक्तों की अटूट आस्था का केंद्र है!

इस मंदिर की महिमा जौनपुर (Jaunpur) के अलावा वाराणसी, भदोही, प्रयागराज, प्रतापगढ़ और सुल्तानपुर सहित उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक प्रसिद्ध (Famous) है।

2. एटम बम: श्री गौरी शंकर धाम की तरह सुजानगंज की ‘एटम बम’ मिठाई अपनी खास पहचान रखती है।

मौजूदा समय में छेने की इस रसभरी मिठाई की मांग विदेशों तक पहुंच चुकी है।

आपको बता दें कि श्री गौरी शंकर धाम सुजानगंज (Gauri Shankar Dham Sujanganj) को आध्यात्मक के साथ-साथ जौनपुर के सबसे सुप्रसिद्ध मंदिर (Famous Lord Shiva Temple In Jaunpur) के लिए जाना जाता है।

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एटम बम की अद्भुत कहानी आगे जानेंगे।

इससे पहले हम श्री गौरी शंकर धाम सुजानगंज का इतिहास (Gauri Shankar Dham Sujanganj History) जानेंगे।

गौरी शंकर धाम सुजानगंज का इतिहास

Gauri Shankar Dham Sujanganj History: उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले की पश्चिमी ओर स्थित श्री गौरी शंकर धाम सुजानगंज लाखों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का जीवंत केंद्र है।

यह ऐतिहासिक शिव-शक्ति धाम अपनी विशेष महिमा के लिए सदियों से जाना जाता रहा है।

स्थानीय लोगों के लिए यह पवित्र धाम किसी स्वर्ग से कम नहीं है।

वैसे भी जिस स्थान पर स्वयं महादेव जी विराजते हैं, वह स्थान मोक्ष-मुक्ति और सुख-समृद्धि में बदल जाता है।

श्री गौरी शंकर मंदिर में भगवान शिव ‘लग स्वयंभू और कालातीत के साथ अ‌र्द्धनारीश्वर रूप में निवास करते हैं।

सुंदरता और आकर्षक के नजरिए से देखा जाए तो मंदिर के गर्भगृह में विराजमान ‘शिवलिंग’ को निहारते ही पहली नजर में मन खुश हो जाता है।

कैसे हुआ मंदिर का निर्माण?

Famous Shiva Temple In Jaunpur History: सुजानगंज पूरी तरह से एक ग्रामीण क्षेत्र है।

जिसका पूरा बाज़ार लगभग 2 किमी के दायरे में सिमट जाता है।

लेकिन, बाज़ार के चारों ओर गांव ही गांव और घर ही घर दिखाई देते हैं।

यह अनोखी घटना 14वीं सदी की है।

चौदहवीं सदी के शुरुआती वर्षों के दौरान सुजानगंज पूरी तरह से कृषि प्रधान क्षेत्र हुआ करता था।

किसानी के साथ-साथ पशुपालन यहां की विशेष परंपरा रही है।

आज भी आपको इस क्षेत्र में हरे-भरे खेत और घर के दरवाजों पर गाय-भैंस जैसे दुधारू पशु देखे जा सकते हैं।

श्री गौरी शंकर धाम सुजानगंज (Gauri Shankar Dham Sujanganj History) की कहानी का पशु और पशुपालक के साथ गहरा नाता रहा है।

इसीलिए आपको यहां के भौगोलिक स्थिति से रूबरू कराया गया।

हर दिन की तरह उस दिन भी गांव के एक किसान या पशुपालक ने अपने पालतू जानवरों को घास चरने के लिए छोड़ दिया था।

दिनभर चरने के बाद रोज की तरह अन्य सभी पशु अपने घर समय से पहुंच गए, पर एक गाय भटककर कहीं और चली गई।

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सूर्यदेव दूसरे देश पहुंच चुके थे और धुंधली शाम घनघोर रात में बदलने के लिए तैयार हो रही थी।

ऐसे में पशुपालक अपनी दुधारू गाय की तलाश में इधर-उधर भटक रहा था।

हर पहचानने वालों से पूछते जा रहा था कि “भाई, आपने मेरी गाय कहीं देखी है क्या?”

हर जगह निराशा हाथ लगी। बहुत खोजने पर भी गाय दिखाई नहीं दी।

अंत में हार मानकर गाय स्वामी खाली हाथ घर जाने की सोचने लगा।

वह जैसे ही थोड़ी दूर गया, अपनी पवित्र नज़रों से अद्भुत चमत्कार देखकर ठहर गया!

कदम रुक और आंखें फट गईं। सांसें तेज और धड़कन की रफ्तार बढ़ गई।

उसने देखा कि एक ऊंचे टीले पर गाय माता झाड़ियों की ओट में खड़ी हैं।

वह जैसे ही गौ माता के बेहद करीब पहुंचा तो उसने देखा कि गाय के स्तन से स्वयं दूध निकलकर एक ‘काले पत्थर’ पर गिर रहा है।

काफी प्रतीक्षा के बाद जब गाय बाहर निकली तो पशुपालक देर शाम उसे लेकर घर पहुंचा।

वैसे भी अपनी दिव्य दृष्टि से ऐसा अनोखा चमत्कार देखने के बाद पशुपालक कहां रुकने वाला था?

वह इस चकित करने वाली घटना से पूरे गांव को तुरंत आश्चर्यचकित कर देना चाहता था।

चमत्कार को सबने किया नमस्कार

Gauri Shankar Dham Sujanganj History: पशुपालक ने जब अपनी आंखों देखी घटना गांव वालों को सुनाई तो लोग उसकी बात पर हंसने लगे।

सबको उसकी बातें मनगढ़ंत लगीं। पर, सच्चाई में ताकत होती है और लोगों को उसकी बात माननी पड़ी।

देखते ही देखते इस आश्चर्यजनक और सत्य घटना की चर्चा जंगल में आग की तरह फैल गई।

नतीजा यह निकला कि स्थानीय लोगों ने खुदाई के जरिए सच्चाई जानने का फैसला किया।

अगले दिन भारी संख्या में लोग उस स्थान पर पहुंच गए, जहां पशुपालक ने अद्भुत चमत्कार का दीदार किया था। यानी जहां गाय माता स्वयं अपने स्तन से काले पत्थर को दूध से नहला रही थीं।

अंतत: काफी खुदाई के बाद भी पत्थर का आखिरी सिरा नहीं मिला।

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इसी बीच किसी को स्वप्न हुआ कि “यहां खुदाई नहीं, मंदिर बनवाओ। इस दिव्य और पवित्र पत्थर की पूजा-अर्चना करो। यह कोई मामूली पत्थर नहीं, बल्कि साक्षात भगवान भोलेनाथ प्रकट हुए हैं।”

यह बात सुनकर कुछ समय तक तो लोग जैसे सदमे में चले गए।

लेकिन, आज के दौर में लोग चमत्कार को नमस्कार करते हैं।

फिर क्या था? बिना समय गंवाए मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो गया।

कुछ समय बाद जब मंदिर बनकर तैयार हुआ तो भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी।

जैसे-जैसे लोगों की मनोकामनाएं पूरी होने लगी, वैसे-वैसे मंदिर की ख्याति दिन दूनी- रात चौगुनी बढ़ने लगी।

साल-दर-साल भक्तों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी।

गौरी शंकर भगवान के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आने लगे।

भक्तों की भीड़ संभालने और उनकी सुविधा के लिए समय-समय पर मंदिर का विकास होने लगा।

मौजूदा समय में मंदिर के बगल में श्री राम जानकी मंदिर सहित अन्य कई देवी-देवताओं के मंदिर मौजूद हैं।

आइए जानते हैं कि श्री गौरी शंकर धाम सुजानगंज (Gauri Shankar Dham Sujanganj) जौनपुर जिले में सबसे सुप्रसिद्ध मंदिर (Famous Lord Shiva Temple In Jaunpur) क्यों है?

लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र!

लोगों की अपार भक्ति और अटूट विश्वास की वजह से श्री गौरी शंकर धाम सुजानगंज (Gauri Shankar Dham Sujanganj) लाखों भक्तों के दिलों में विशेष स्थान रखता है।

इस मंदिर में भगवान भोलेनाथ एक काले पत्थर के शिवलिंग में अर्धनारीश्वर स्वरूप में निवास करते हैं।

अर्धनारीश्वर का अर्थ होता है ‘आधी स्त्री और आधा पुरुष।’

यानी भगवान शिव के इस अर्धनारीश्वर स्वरूप के आधे हिस्से में पुरुष रुपी शिव जी और आधे हिस्से में स्त्री रुपी माता गौरी का वास है।

माता पार्वती को देवी गौरी भी कहा जाता है। इसीलिए इस मंदिर का नाम श्री गौरी शंकर धाम है।

भगवान महादेव का यह दिव्य रूप सभी इंसानों विशेषकर पुरुषों को यह सीख देता है कि स्त्री और पुरुष एक ही गाड़ी के दो पहिए हैं और दोनों एक-दूसरे के बिना आधे-अधूरे हैं।

यही कारण है कि सुजानगंज के इस सुप्रसिद्ध मंदिर (Famous Temple) को श्री गौरी शंकर धाम कहा जाता है।

स्थानीय लोगों द्वारा भी यही उच्चारण सुना जा सकता है।

जब किसी शिव भक्त को बाबा भोलेनाथ के दर्शन का मन होता है तो अपने संगी-साथी से कहते हैं कि “चलो आज ‘गौरी शंकर’ चलना है।

कहने का अर्थ यह हुआ कि जौनपुर के सुजानगंज में स्थित महादेव के इस प्रसिद्ध मंदिर को ‘श्री गौरी शंकर धाम सुजानगंज‘ कहा जाता है।

दर्शन से पूरी होती है मनोकामना

Famous Lord Shiva Temple In Jaunpur: श्री गौरी शंकर धाम सुजानगंज आस्था और विश्वास का दूसरा नाम है। सबसे विश्वसनीय और प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है।

ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान भोलेनाथ की चौखट पर सिर झुकता है, उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

आज तक ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है, जिसने भगवान गौरी शंकर से कुछ मांगा हो और उसकी मनोकामना न पूरी हुई हो।

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कहते हैं कि बाबा गौरी शंकर अपने भक्तों की मुराद बड़ी जल्दी पूरी करते हैं।

जौनपुर विशेषकर सुजानगंज क्षेत्रवासियों का इस मंदिर से बहुत गहरा नाता है।

स्थानीय लोग बाबा गौरी शंकर से परिवार के सबसे श्रेष्ठ सदस्य यानी अभिभावक की तरह रिश्ता रखते हैं।

हर शुभ कार्य और नए बिज़नेस की शुरुआत में, इंगेजमेंट और शादी से पहले अपने प्रिय आराध्य से आज्ञा लेते हैं।

अपना हर दुःख-सुख उनके साथ बांटते हैं। जीवन के हर संघर्ष और सफलता में सबसे पहले उन्हें याद करते हैं।

शहर के लिए ट्रेन या फ्लाइट पकड़ने से पहले और शहर से गांव में दाखिल होने से पहले लोग श्री गौरी शंकर धाम सुजानगंज के दर्शन करते हैं।

अद्भुत महिमा या विश्वास?

Gauri Shankar Dham Sujanganj History: ऐसी मान्यता है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मन्नतें अवश्य पूरी होती हैं।

कई शिव भक्तों का पूर्ण विश्वास है कि श्री गौरी शंकर धाम सुजानगंज से आजतक कभी कोई भक्त निराश नहीं लौटा है।

भगवान सबकी सुनते हैं। हर सुख-दुःख में साथ निभाते हैं।

कहते हैं कि आरती के समय मंदिर में जो घंटा बजता है, उसकी आवाज़ जितनी दूर तक जाती है, उतनी दूर तक कोई भयानक प्राकृतिक आपदा नहीं आती है।

और दिलचस्प बात यह कि उस घंटे की ध्वनि लगभग 5 किमी चतुर्दिक (चारों दिशाओं) तक पहुंचती है।

ऐसी ही कई और मान्यताएं, प्रथाएं, आस्था और विश्वास हैं, जिसने भक्तों को श्री गौरी शंकर धाम सुजानगंज से जोड़ रखा है।

सुजानगंज की लाइफलाइन श्री गौरी शंकर धाम!

Famous Lord Shiva Temple In Jaunpur: जब किसी भक्त के मन की मुराद पूरी हो जाती है तो वह श्री गौरी शंकर धाम सुजानगंज की चौखट पर ‘रोट प्रसाद’ चढ़ाता है।

रोट प्रसाद का अर्थ हुआ कि मंदिर परिसर के भीतर भक्त पूड़ी, सब्जी और हलवा आदि बनाकर भगवान भोलेनाथ को श्रद्धापूर्वक अर्पित करते हैं।

उसके बाद उसी स्थान पर अपने पूरे परिवार, रिश्तेदार और दोस्तों के साथ प्रेमपूर्वक उस पवित्र प्रसाद को ग्रहण करते हैं।

इस दिव्य और रोमांचक नज़ारे का आनंद हर सोमवार के दिन लिया जा सकता है।

जैसा कि सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है, इसलिए हर सोमवार यहां भक्तों की भीड़ रहती है।

बड़ी दूर-दूर से लोग दर्शन करने और रोटा प्रसाद चढ़ाने आते हैं।

सोमवार के दिन शिशुओं और बच्चों के मुंडन कार्यक्रम भी बड़ी संख्या में दिखाई देते हैं।

यहां मुंडन संस्कार का अर्थ यह हुआ कि जिन लोगों को भगवान गौरी शंकर की कृपा और दया से संतान की प्राप्ति होती है, वे उस बच्चे का ‘पहला मुंडन’ श्री गौरी शंकर धाम सुजानगंज की पावन चौखट पर कराते हैं।

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शादी-विवाह के बाद वर-वधु सहित परिवार वाले भगवान शिव के दर्शन करने अवश्य जाते हैं।

बहुत सारे लोग मंदिर परिसर में भगवान श्री सत्यनारायण भगवान की कथा भी सुनते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि आजकल बहुत सारी शादियां श्री गौरी शंकर धाम पर तय हो जा रही हैं।

बच्चों के माता-पिता का मेल-मिलाप और लड़का-लड़की की देखा-देखी, तय-तमाम आदि वहीं हो जा रहा है।

रिश्तेदारों के स्वागत के लिए सुजानगंज का एटम बम जिंदाबाद है!

इसके अलावा जिन लोगों के पास पैसे की तंगी है, बजट कम या कोई अन्य कारण है, वे अपने बच्चों की शादी भी भगवान भोलेनाथ को साक्षी मानकर करा दे रहे हैं।

जहां भगवान शंकर स्वयं माता गौरी के साथ निवास करते हैं, उनकी पावन दृष्टि के सामने शादी करना जीवन का सबसे शुभ शुभारंभ है।

भक्तों के लिए सुविधाएं

Gauri Shankar Dham Sujanganj: भक्तों और तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए मंदिर परिसर के भीतर नहाने और हाथ-पैर धोने की सुविधा मौजूद है।

शौचालय की उचित व्यवस्था है। महिलाओं की सुविधा का विशेष ख्याल रखा गया है।

बैठने के लिए चबूतरे और छांव के लिए बड़े-बड़े हरे-भरे पेड़ हैं।

खाने के लिए छोला-समोसा, छोला-भटूरा, एटम बम और पान है!

चाय के स्वाद का बेजोड़ अंदाज़ है।

खरीदारी के लिए ख्वाहिशों से सजा बाज़ार है।

बोली-भाषा ठेठ, मगर एटम बम की तरह मिठास है। गाली में भी प्यार और अपनत्व है।

कब लगता है विशाल मेला?

Famous Lord Shiva Temple In Jaunpur: हर साल सावन का पूरा महीना भगवान शिव भक्तों के नाम समर्पित रहता है।

इस दौरान हर दिन और हर पहर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रहती है। भीड़ मतलब प्रचंड भीड़।

सुजानगंज बाज़ार में प्रवेश करने से पहले ही मालूम पड़ जाता है कि श्रावणी मेला चल रहा है।

यकीन मानिए सावन में लगभग लाखों श्रद्धालु कांवड़ (कांवर) लेकर गौरी शंकर धाम सुजानगंज पहुंचते हैं और बाबा भोलेनाथ पर जल अर्पण करते हैं।

कांवड़ यात्री गंगाजल प्रयागराज से भरते हैं।

सुजानगंज से प्रयागराज की दूरी लगभग 65 किमी है।

पैदल चलने वाले यात्री 24 घंटे में श्री गौरी शंकर धाम सुजानगंज पहुंचते हैं।

‘डाक बम’ यानी दौड़कर पहुंचने वाले भक्त 6 से 8 घंटे में जल अर्पित कर देते हैं।

बाइक, कार, ट्रैक्टर, ट्रक आदि साधनों से पहुंचने वाले श्रद्धालु 2-3 घंटे में पवित्र गंगाजल से गौरी शंकर भगवान को नहला देते हैं।

सावन के दौरान प्रयागराज से जल उठाने वाले कांवड़ियों को जल चढ़ाने के लिए मंदिर संचालक द्वारा प्राथमिकता दी जाती है।

पर उस दौरान भीड़ बहुत अधिक होती है। कांवड़ियों को संभालना आसान नहीं होता।

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जिस तरफ नजर पड़ती है, सिर्फ़ भगवा और केशरिया रंग ही दिखाई देता है।

प्रयागराज से सुजानगंज तक, सुजानगंज से अन्य सभी दिशाओं में सिर्फ़ बोलबम के दीवाने ही दीवाने दिखाई देते हैं।

सावन का यह त्योहार अद्भुत, रोमांचक और यादगार होता है।

जीवन में एक बार जो इंसान इस मेले में शामिल हो जाता है, फिर इसकी यादों को कभी भुला नहीं पाता है।

महाशिवरात्रि पर विशेष मेला

सावन के अलावा महाशिवरात्रि के अवसर पर श्री गौरी शंकर धाम सुजानगंज में भक्तों का तांता लगा रहता है।

इस दिन मंदिर परिसर के बाहर यानी सुजानगंज-मछली शहर रोड पर भव्य मेला लगता है।

आपको बता दें कि गौरी शंकर मंदिर इसी मार्ग पर स्थित है।

आम समय की बात करें तो यहां विशेषकर हर सोमवार के दिन भक्त भगवान शिव के दर्शन करने आते हैं।

मंदिर खुलने-बंद होने व आरती का समय

Gauri Shankar Dham Sujanganj: हर मौसम में हर दिन गौरी शंकर मंदिर का पट सुबह चार बजे दर्शनार्थियों के लिए खुल जाता है।

दोपहर में एक बजे से दो बजे तक पट बंद रहता है।

उस दौरान गर्भगृह की साफ-सफाई की जाती है।

महाशिवरात्रि पर्व पर मंदिर का पट आरती के बाद ब्रह्मवेला में सुबह चार बजे खुल जाता है।

दिन में दो बार गौरी शंकर भगवान की आरती की जाती है।

पहली आरती हर सुबह 4-5 बजे और शाम 6-7 बजे के बीच होती है।

सावन मेले और महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर का पट दोपहर में केवल 10 मिनट के लिए बंद किया जाता है।

साफ-सफाई के बाद तुरंत दरवाजा दर्शनार्थियों के लिए खोल दिया जाता है।

क्योंकि उस दौरान भीड़ पर काबू पाना मुश्किल हो जाता है

सावन माह और महाशिवरात्रि त्योहार पर दर्शनार्थियों के लिए लाइन से दर्शन करने की व्यवस्था की जाती है।

वैसे यह नियम बारहों महीने चलता है।

महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग पंक्ति की व्यवस्था की गई है।

महाशिवरात्रि और सावन के मेले के दौरान भक्तों की सुविधा और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है।

दर्शनार्थियों की सुरक्षा के लिए महिला और पुरुष पुलिस बल कदम-कदम पर तैनात रहते हैं।

मेला स्थल आने वाले सभी मार्गों पर बैरियर लगाया जाता है।

सीसीटीवी के जरिए मंदिर परिसर की सुरक्षा निगरानी की जाती है।

बिजली कटने की समस्या से निपटने के लिए इनवर्टर की सुविधा मौजूद है।

पानी के लिए कई हैंडपंप के अलावा पानी की कई टोटियां लगाई गई हैं।

कैसे पहुंचे गौरी शंकर धाम सुजानगंज?

Gauri Shankar Dham Sujanganj: यह ध्यान देने वाली बात है!

यदि आप जौनपुर के पड़ोसी जिलों के निवासी हैं, तो आप सुजानगंज बड़े आराम से पहुंच सकते हैं।

आप सुल्तानपुर से बदलापुर और बदलापुर से सुजानगंज बड़े आराम से पहुंच सकते हैं।

यहां पहुंचने के लिए आप उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बस, प्राइवेट बस, बोलरो, टैक्सी, कार या अपनी निजी बाइक का इस्तेमाल सकते हैं।

अगर आप वाराणसी, भदोही या अन्य पड़ोसी जिलों के रहने वाले हैं, तो आप जौनपुर आइए और वहां से वाया सिकरारा-मछलीशहर होते हुए सुजानगंज पहुंच जाइए।

जौनपुर से सरकारी बस के साथ-साथ प्राइवेट साधन समय-समय पर मिलते रहते हैं।

अगर आप प्रयागराज के रहने वाले हैं तो आप वाया सहसों-फूलपुर-मुंगरा बादशाहपुर-सुजानगंज आ जाइए।

यदि आप प्रतापगढ़ के निवासी हैं तो आप प्रतापगढ़ से वाया पट्टी-जामताली-बीरापुर-बेलवार-सुजानगंज पहुंच सकते हैं।

या फिर प्रतापगढ़ से वाया दिलीपपुर-जामताली-बीरापुर-बेलवार-सुजानगंज का इस्तेमाल कर सकते हैं।

इसके अलावा आप प्रतापगढ़ से वाया रानीगंज-जामताली-बीरापुर-बेलवार-सुजानगंज के जरिए भी पहुंच सकते हैं।

इन रास्तों का इस्तेमाल तब करें, जब आपके पास निजी या रिजर्व साधन हो।

अगर बस या प्राइवेट साधन से सफर करना चाहते हैं तो आप प्रतापगढ़ से मुंगरा बादशाहपुर और वहां से बड़े आराम से सुजानगंज पहुंच सकते हैं।

यदि आप पर्यटक हैं तो आपको रुकने के लिए होटल केवल मछलीशहर, जौनपुर, प्रयागराज और वाराणसी जैसे बड़े शहरों में मिलेंगे।

श्री गौरी शंकर धाम सुजानगंज पहुंचने के लिए निजी या रिजर्व साधन का इस्तेमाल करें और एक दिन में दर्शन करके अपने होटल लौट जाएं।

कहां है स्थित श्री गौरी शंकर धाम

श्री गौरी शंकर धाम सुजानगंज जनपद मुख्यालय जौनपुर से लगभग 50 किलोमीटर दूर मछलीशहर-सुजानगंज मार्ग पर स्थित है।

यहां आने के लिए जौनपुर से वाया सिकरारा-मछलीशहर प्राइवेट साधन मिलते रहते हैं।

मुंगराबादशाहपुर और बदलापुर से सुजानगंज के लिए परिवहन की बसों के अलावा प्राइवेट साधन भी आते-जाते रहते हैं।

प्रतापगढ़ की तरफ से वाया बादशाहपुर के अलावा जामताली-बीरापुर-जगनीपुर-बेलवार होते हुए सुजानगंज के लिए प्राइवेट साधन समय-समय पर मिलते रहते हैं।

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एटम बम क्या है?

एटम बम छेने की रसभरी मिठाई है, जो करीब 150-200 ग्राम की होती है।

इस मिठाई के अंदर खोवा-मावा और ड्राई-फ्रूट्स भरे होते हैं।

यह सफेद रंग की मिठाई होती है, जिसके रंग की तुलना छेने की मिठाई से कर सकते हैं, लेकिन स्वाद नहीं।

टेस्ट में एटम बम का टेस्ट बेजोड़ है।

एक एटम बम खाने वाले का पेट भर जाता है।

दूसरी मिठाई बहुत कम लोग ही खा पाते हैं।

मौजूदा समय में एटम बम की मांग विदेशों तक है।

‘एटम बम’ मिठाई सुजानगंज ब्लॉक के अलावा भारत में कहीं और नहीं मिलती है।

एटम बम का इतिहास

इस मिठाई के इतिहास की बात करें तो कहा जाता है कि एटम बम का संबंध द्वितीय विश्व युद्ध से है।

उस युद्ध के दौरान एटम बम का उपयोग किया गया था।

यह उस ज़माने में किसी चमत्कार से कम नहीं था।

युद्ध समाप्त होने के बाद एटम बम और उसके विनाशकारी प्रभाव की खूब चर्चा हुई।

उसी दौरान सुजानगंज के हलवाई ने एक ऐसी अनोखी मिठाई बनाई, जिसे खाने के बाद लोगों ने उसकी तुलना एटम बम से कर दी।

फिर क्या था? उसी दिन से वह मिठाई हमेशा के लिए ‘एटम बम’ के नाम से विख्यात हो गई।

पहले की तुलना में ‘एटम बम’ मिठाई में बहुत बदलाव हो चुके हैं।

एक तरह जहां इसकी कीमत बढ़ी है, वहीं दूसरी तरफ क्वालिटी पर प्रभाव पड़ा है।

इस मिठाई में अब पहले जैसी बात नहीं रह गई है।

कुछ साल पहले तक एक पीस ‘एटम बम’ खाना मुश्किल होता था।

कारण आज की अपेक्षा तब मिठाई आकार में ज़्यादा बड़ी थी और अंदर माल भी मजबूत भरा जाता था।

जैसे-जैसे दौर बदला, मिठाई का आकार छोटा होता चला गया।

लेकिन मजे की बात यह है कि इस मिठाई की चर्चा हर दिन बढ़ती चली जा रही है।

सुजानगंज की मिठास है खास

बहुत कम लोग ही जानते हैं, पर यह बात सच है कि मौजूदा समय में एटम बम मिठाई की मांग विदेशों तक है।

यह मिठाई किलो के भाव नहीं, बल्कि प्रति पीस के हिसाब से बेची जाती है।

मौजूदा समय में एक पीस एटम बम की कीमत 30 रुपए के करीब है।

आइए जानते हैं एटम बम मिठाई को लेकर स्थानीय लोगों की सोच क्या है?

मौजूदा समय में एटम बम बड़प्पन की निशानी बन चुकी है।

शादी, पूजा-पाठ, शुद्ध-तेरहवीं आदि तक अपनी जगह बना चुकी है।

पहले यह मिठाई केवल सुजानगंज बाज़ार में मिलती थी, लेकिन अब आसपास के सभी नजदीकी बाज़ारों में आसानी से मिल जाती है।

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले का सुजानगंज क्षेत्र अपनी शादी खर्च, धार्मिक समारोह खर्च और शुद्ध-तेरहवीं आदि पर बड़े खर्च के लिए जाना जाता है।

इस तरह कई छोटे-बड़े अवसरों पर आपको एटम बम चखने का मौका जरूर मिल जाएगा।

किसी समारोह आदि में जो लोग अपने मेहमानों का स्वागत एटम बम मिठाई से करते हैं, उन्हें बड़ा आदमी समझा जाता है।

यानी उनकी गिनती अमीरों में होती है।

यदि कभी सुजानगंज जाना हुआ तो इस लजीज मिठाई का स्वाद लेना मत भूलिएगा!

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जिला जौनपुर

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