Gobardhan Scheme: गांव में करें 12 महीने कमाई वाला बिज़नेस

Gobardhan Scheme in Hindi: गोबरधन में छुपा है असली धन। समृद्धि और खुशहाली का ख़जाना। स्वरोजगार के अवसर। किसानों के लिए अतिरिक्त आय का साधन। पशुपालकों के लिए टिकाऊ आजीविका। गोबरधन गांव में टिकाऊ बिज़नेस का साधन बन सकता है।

गोबरधन योजना के लाभ

Gobardhan Scheme in Hindi: एक पुरानी कहावत है- “जब गांव प्रगति करता है, तब देश आगे बढ़ता है।”

भारत का ग्रामीण क्षेत्र नई संभावनाओं एवं नए अवसरों से भरा हुआ है।

जहां गोबर और कृषि अवशेष बड़ी मात्रा में मिलते हैं। इनसे धन और ऊर्जा बनती है।

इसे आप टिकाऊ आय का साधन बना सकते हैं।

जैविक कचरे से जैविक खाद, बायोगैस व बायो सीएनजी जैसी हरित ऊर्जा बनती है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अनुसार कचरा भी कमाई का जरिया बन सकता है।

इसके लिए आपको गोबरधन योजना के बारे में बारीकी से समझना होगा।

गोबरधन योजना 2023-24

Gobardhan Scheme in Hindi: गोबरधन भारत सरकार का एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है।

यह स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-2 के तहत संचालित है।

इसका उद्देश्य ग्रामीणों का जीवन बेहतर बनाना है।

मवेशियों के गोबर और जैविक कचरे की सही व्यवस्था करनी है।

किसानों और पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

गोबरधन को ‘जन आंदोलन’ बनाने के लिए कई संगठन साथ हैं।

गोबरधन में शामिल संगठन

  • पेयजल एवं स्वच्छता विभाग- नवीन एवं नवीकरण ऊर्जा मंत्रालय।
  • पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय।
  • पशुपालन एवं दुग्धपालन विभाग।
  • कृषि सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग।
  • कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग।
  • ग्रामीण विकास विभाग।
  • सभी प्रदेशों की राज्य सरकारें।
  • सरकारी और निजी क्षेत्र के संस्थान।
  • ग्राम समुदाय इत्यादि।

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा हर जिले को 50 लाख रुपये की वित्तीय/आर्थिक सहायता दिया जाता है।

गोबरधन का मुख्य लक्ष्य   
  1. मवेशियों के गोबर व जैविक कचरे का सदुपयोग करना  
  2. देश के गांवों को पूरी तरह से स्वच्छ, स्वस्थ व सुंदर बनाना
  3. किसानों व पशुपालकों को अतिरिक्त आमदनी का साधन देना
  4. जैविक कचरे व गोबर को बायोगैस एवं जैविक खाद में बदलना
  5. कचरे का बेहतर निपटान व रोगाणु-जनित बीमारियों का कम करना  
  6. ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार व आय सृजन के अवसरों को बढ़ाना
किसानों और पशुपालकों की चांदी 

Gobardhan Scheme in Hindi: इस बिज़नेस में ज़्यादा टेंशन नहीं है। बस पालतू जानवरों के गोबर का सदुपयोग करना है।

फसल अवशेषों को जलाएं नहीं। रसोई और अन्य जैविक कचरे को बहाए नहीं।

बल्कि इन कचरों से जैविक खाद बनाएं।

ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर व कृषि अपशिष्ट बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं। जिन्हें धन और ऊर्जा में बदला जा सकता है।

इसमें टिकाऊ खुशहाली की अपार क्षमता है।

भारत सरकार के प्रयास से जैविक अवशेषों से जैविक खाद, बायो गैस, बायो सीएनजी इत्यादि बनाए जा रहे हैं।

इससे गांव स्वच्छ होंगे। उर्वरक और ऊर्जा से देश आत्मनिर्भर बनेगा।

आपकी भी आमदनी बढ़ेगी। गोबर और जैविक कचरे कभी कम नहीं होने वाली चीज है।

कैसे बनाएं कचरे से धन?  

Gobardhan Scheme in Hindi: अपने मवेशियों के गोबर का सही इस्तेमाल करें।

अन्य जैविक अवशेषों- जैसे भूसा, पत्ते, इत्यादि का सदुपयोग करें।

यह आपकी कमाई का स्थाई साथी बन सकता है।

1. जैविक खाद बनाएं

Gobardhan Scheme in Hindi: जैविक खाद मिट्टी की उर्वरा शक्ति सदा बरकरार रखते हैं।

कृषि उपज में सुधार लाते हैं।

बाज़ार की उर्वरक निर्भरता कम करें। ख़ुद ही जैविक खाद बनाएं।

थोड़ी मेहनत ज़रूर है, पर लाभ कई हैं!

इससे खाद पर खर्च होने वाले पैसे बचेंगे, जो अन्य काम में आ सकते हैं।

जैविक खाद एक प्राकृतिक उत्पाद है। यह खेत, सेहत और आय वृद्धि के लिए बेहतर है।   

2. बायोगैस बनाएं

Gobardhan Scheme in Hindi: अभी हरित ऊर्जा का बोलबाला है।

आने वाले वक़्त में इसी का सिक्का चलेगा।

भारत सरकार ‘ग्रीन एनर्जी’ को बढ़ावा दे रही है।

बायोगैस उत्पादन से आमदनी बढ़ेगी और ज़्यादा बचत भी होगी।

आपको घर पर ही स्वच्छ ईंधन प्राप्त होगा। इससे एलपीजी लागत में कटौती होगी।

परिवार की सेहत अच्छी रहेगी। आसपास स्वच्छता रहेगी। गांव स्वच्छ, स्वस्थ और सुंदर होगा।

गोबरधन का काम   
  • ग्रामीण क्षेत्रों में गोबरधन इकाइयों की स्थापना करने में मदद करना   
  • जैविक खाद व बायोगैस उत्पादन के लिए गांवों में क्लस्टर्स का निर्माण करना
  • पशुओं के गोबर व जैविक अपशिष्टों को जमा एवं बेहतर निपटान करना 
  • प्लांट चलाने व संभालने में उद्यमियों/स्वयं सहायता/युवा समूहों को शामिल करना  
  • किसानों/पशुपालकों/ग्रामीणों को बेहतर आजीविका व आय के अवसर देना   
  • उद्यमशीलता, आत्मनिर्भरता, हरित ऊर्जा, जैविक खेती को बढ़ावा देना
गोबरधन की पात्रता  

Gobardhan Scheme in Hindi: गोबरधन के तहत छोटे और बड़े पैमाने पर चार बिज़नेस मॉडल विकसित किए जा सकते हैं।

स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार निम्न किसी भी मॉडल को चुन सकते हैं:  

1. घर आधारित या व्यक्तिगत मॉडल

जिन घरों में तीन या उससे अधिक पालतू पशु हैं। वे इस बिज़नेस मॉडल का लाभ उठा सकते हैं।  

2. सामुदायिक मॉडल

इस मॉडल के तहत गांव में एक गोबरधन प्लांट लगाया जाता है। इसे चलाने की ज़िम्मेदारी ग्राम पंचायत और गांव वालों की होती है।   

3. क्लस्टर मॉडल

इस श्रेणी के तहत कई घरों में बायोगैस प्लांट लगाए जाते हैं। इसमें गांव के सभी लोग शामिल होते हैं।

गोबर के घोल का इस्तेमाल अपने खेतों में मिल-जुलकर करते हैं।  

4. सीबीजी मॉडल

इसके तहत सहकारी समिति, गोशाला आदि एक बड़ा संयंत्र लगाते हैं।

इससे पैदा होने वाली बायोगैस को कंप्रेस्ड बायोगैस में बदला जाता है।

गोबर के घोल से जैविक खाद बनाया जाता है।

अब से गोबर को बहाएं नहीं। जैविक अपशिष्टों को जलाएं नहीं। बल्कि इनका सदुपयोग करें।

इन्हें अपनी आमदनी का अतिरिक्त जरिया बनाएं।

अपने गांव को स्वच्छ, सुंदर व स्वस्थ बनाएं।

जैविक उर्वरक व हरित ऊर्जा उत्पादन में देश का साथ दें।

कैसे उठाएं गोबरधन का लाभ

रजिस्टर करने के लिए जल शक्ति मंत्रालय, पेयजल और स्वच्छता विभाग, भारत सरकार की इस आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।

गोबरधन के बारे में अधिक जानने के लिए गोबरधन पोर्टल पर जाएं।

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