Godavari River: भारत की अतुल्य नदी!

Nashik Godavari River Origin: भारत में हर नदी का अपना महत्व है। उनमें से एक है दक्षिण भारत की गंगा गोदावरी नदी। जिसमें डुबकी लगाने से सारे पाप धुल जाते हैं। इसी के किनारे प्रभु श्री राम ने वनवास काटे थे। इसी के तट पर ही नासिक कुंभ मेला लगता है। इस आर्टिकल के जरिए जानिए गोदावरी नदी के बारे में सबकुछ।

सबसे पहले हम यह जानेंगे कि गोदावरी नदी की उत्पत्ति (Nashik Godavari River Origin) कहां से होती है?

गोदावरी नदी की उत्पत्ति

Nashik Godavari River Origin: श्री त्र्यंबकेश्वर! बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक। बाबा भोलेनाथ की पावन नगरी।

रंगीले पर्वतों और इठलाती प्रकृति का घर। यही मां गोदावरी का मायका है। त्र्यंबक, ब्रह्मगिरी पर्वत इनके पिता हैं।

इन्हीं की गोद से निकलकर गोदावरी बंगाल तक बहती हैं।

गोदावरी नदी अरब सागर से 1,067 मीटर की ऊंचाई से निकलती है।

त्र्यंबकेश्वर, नासिक, महाराष्ट्र से बंगाल की खाड़ी तक कुल 1,465 किमी का सफ़र तय करती है।

यह मोक्षदायिनी नदी त्र्यंबकेश्वर से सीधे पूरब की ओर बहती है।

चलिए अब जानते हैं कि भारत और दक्षिण भारत की सबसे बड़ी नदी कौन-सी है?

दक्षिण भारत की सबसे बड़ी नदी

Nashik Godavari River Origin: महाकवि कालिदास जी ने गोदावरी को ‘गोदा’ कहा है, जिसे ‘दक्षिण गंगा’ भी बुलाया जाता है।

भारत की सबसे लंबी नदी गंगा है, जिसकी लंबाई लगभग 2,510 किमी है।

दूसरी सबसे बड़ी नदी गोदावरी है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 1,465 किमी है।

तीसरी सबसे बड़ी नदी कृष्णा है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 1,400 कि.मी है।

इस लिहाज से गोदावरी प्रायद्वीपीय भारत और दक्षिण भारत की सबसे लंबी नदी है।

गोदावरी नदी भारत के तीसरे सबसे बड़े बेसिन में बहती है, जिसका कुल भौगोलिक क्षेत्र लगभग 9.50% है।

नदी का बेसिन उत्तर में सतमाला पहाड़ियों, दक्षिण में अजंता व महादेव पहाड़ियों, पूरब में पूर्वी घाट व पश्चिम में पश्चिमी घाट से घिरा हुआ है।

चलिए अब यह जानते हैं कि गोदावरी नदी कितने राज्यों से गुजरती है?

गोदावरी नदी कितने राज्यों से गुजरती है?

Nashik Godavari River Origin: गोदावरी नदी को ‘वृद्ध या प्राचीन गंगा के रूप में भी जाना जाता है।

यह नदी महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और उड़ीसा राज्य से होकर बंगाल की खाड़ी तक बहती है।

गोदावरी त्र्यंबक पर्वत से निकलती हैं।

फिर त्र्यंबकेश्वर, नासिक, कोपरगांव, पैठण, नांदेड़, राजमुंदरी, आदिलाबाद, भद्राचलम, यनम आदि जैसे महत्वपूर्ण शहरों से होते हुए दक्कन पठार में बहती हैं।

गोदावरी नदी के तट पर बसे नासिक, नांदेड़ और भद्राचलम सबसे महत्वपूर्ण शहर हैं।

गोदावरी नदी का पुराना नाम क्या है?

Nashik Godavari River Origin: गोदावरी नदी को अनेकों नाम से जाना जाता है।

गोदावरी का नाम महर्षि गौतम से प्रेरित है। इसलिए, इन्हें गौतमी भी कहा जाता है।

कहानी युगों पुरानी है। जब घोर तपस्या से महर्षि गौतम ने प्रभु रूद्र को प्रसन्न किया था।

भगवान शिव ने अपने एक बाल से गंगा को प्रवाहित किया था।

गंगा की अविरल धारा की स्पर्श से मरी हुई गाय जीवित हो गई थी।

तब से इन्हें मां गोदावरी कहा जाने लगा।

कहते हैं कि गोदावरी नदी में नहाने से सारे पाप धुल जाते हैं।

इसी आस्था और विश्वास की बदौलत ही ‘नासिक कुंभ मेला’ के दौरान करोड़ों भक्त गोदावरी नदी में स्नान करते हैं।

श्री त्रयंबकेश्वर मंदिर के सामने गोदावरी में अहिल्या नदी का संगम होता है।

त्रयंबकेश्वर के बाद और नासिक से पहले चक्रतीर्थ नामक कुंड है।

इसी जगह से गोदावरी पूरी नदी के रूप में बहती हुई दिखाई देती हैं।

ऐतिहासिक घटना की साक्षी गोदावरी नदी

Nashik Godavari River Origin: पौराणिक, धार्मिक और ऐतिहासिक नज़रिए से गोदावरी नदी का महत्व बहुत विशेष है।

अपने वनवास के दौरान प्रभु श्री राम नासिक के पंचवटी में कुछ समय तक रुके थे।

यह स्थान गोदावरी नदी के तट पर स्थित है।

यहां प्रभु की पर्णकुटी थी, जिसे भगवान के प्रिय अनुज लक्ष्मण जी ने बनाई थी।

इसी पावन स्थली पर भगवान श्री राम और गिद्धराज जटायु की मुलाकात हुई थी।

यहीं लक्ष्मण जी द्वारा शूर्पनखा की नाक काटी गई थी। श्री राम ने खर-दूषण का वध किया था।

दशानन रावण ने माता सीता का धोके से हरण किया था।

ऐसी ही कई ऐतिहासिक घटनाओं की साक्षी रही हैं मां गोदावरी!

श्रद्धालु इन्हें दक्षिण भारत की गंगा यानी ‘दक्षिणी गंगा’ भी कहते हैं।

गोदावरी तट पर सुप्रसिद्ध तीर्थ स्थल

Nashik Godavari River Origin: गोदावरी नदी के निकट श्री त्र्यंबकेश्वर मंदिर है।

भगवान शिव का दसवां ज्योतिर्लिंग, जिनमें ब्रह्मा, विष्‍णु और महेश के दर्शन एक साथ होते हैं।

श्री त्रयंबकेश्वर मंदिर के पास पवित्र कुशावर्त सरोवर है।

कहते हैं कि ब्रह्मगिरि पर्वत पर मां गोदावरी बार-बार लुप्त हो जाती थीं।

इसलिए, महर्षि गौतम को उन्हें एक कुशा से घेरना पड़ा था।

तब से यह पवित्र स्थान कुशावर्त कहलाने लगा।

इस कुंड में डुबकी लगाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

नासिक, पैठण जैसे और कई प्रसिद्ध तीर्थस्थल गोदावरी नदी के तट पर स्थित हैं।

जीवनदायिनी गोदावरी नदी

Nashik Godavari River Origin: बात 1965 और कहानी पैठण तालुका के जयकवाड़ी गांव की है, जो महाराष्ट्र के संभाजीनगर (औरंगाबाद) ज़िले में स्थित है।

इस मराठवाड़ा क्षेत्र में हमेशा सूखे का प्रकोप रहता था और किसानों के लिए सिंचाई सबसे बड़ी चुनौती थी।

ऐसे में 18 अक्टूबर, 1965 को भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री, स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री जी ने जयकवाड़ी बांध के निर्माण की नींव रखी थी, जो कि जयकवाड़ी गांव के निकट गोदावरी नदी पर स्थित है।

24 फरवरी, 1976 को पूर्व प्रधानमंत्री, स्वर्गीय इंदिरा गांधी जी ने इस बांध की शुरुआत की थी।

आज जल, बिजली और पर्यटक के लिहाज से जयकवाड़ी बांध विशेष भूमिका निभा रहा है।

जयकवाड़ी एशिया के सबसे बड़े मिट्टी के बांधों में से एक है, जिसकी ऊंचाई लगभग 41.30 मीटर है।

बांध की लंबाई 9.998 किमी (लगभग 10 किमी) है।

कुल स्टोरेज क्षमता 2,909 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमक्यूएम) है।

यह महाराष्ट्र राज्य की सबसे बड़ी सिंचाई और बहुउद्देशीय परियोजना है।

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स्रोत

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