Harishchandragad Trek In Hindi: रोमांच का गढ़, देखो हरिश्चंद्रगढ़

Harishchandragad Trek In Hindi: अगर आपको Best Treks Near Mumbai-Pune की तलाश है, तो हरिश्चंद्रगढ़ आपके लिए बेहतर चॉइस हो सकती है। लेकिन, ट्रेकिंग पर निकलने से पहले यह जानना बेहद जरूरी है कि हरिश्चंद्रगढ़ क्यों प्रसिद्ध है? हरिश्चंद्रगढ़ कहां स्थित है? हरिश्चंद्रगढ़ कैसे पहुंचे? कहां रुकें? क्या देखें? क्या खाएं? क्या-क्या चीजें अपने साथ अवश्य रखें? कितने दिनों के लिए प्लान करें? जानिए और बहुत कुछ।

इस आर्टिकल में आप पर्सनल एक्सपीरियंस के साथ हरिश्चंद्रगढ़ ट्रेक (Harishchandragad Trek) के बारे में वह हर बात हिंदी में (In Hindi) जान-समझ सकते हैं, जो हर ट्रेकर के लिए जानना बेहद जरूरी है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि जो इंसान जंगलों के बीच गुजरने का कलेजा और पर्वतों की चुनौती भरे रास्तों पर बेधड़क चलने का साहस रखता है, केवल वही आसमान पर बसी अनोखी दुनिया का दीदार कर सकता है।

हरिश्चंद्रगढ़ गुफा मंदिर समुद्र तल से लगभग 1,424 फीट की ऊंचाई वाले विशाल पर्वत के सीने पर बसा है। शिखर तक पहुंचने के लिए एक बार में कम से कम दो-तीन घंटे या उससे अधिक समय लगता है।

एक्सपर्ट ट्रेकर एक-दो घंटे के भीतर या इससे कम समय में अपनी यात्रा पूरी कर देते हैं। हरिश्चंद्रगढ़ को महाराष्ट्र का सबसे प्रसिद्ध ट्रेक माना जाता है। वीकेंड पर यहां सैलानियों की भीड़ उमड़ती है।

Harishchandragad Trek In Hindi

हरिश्चंद्रगढ़ कहां स्थित है और कैसे पहुंचे?

इस सवाल का जवाब जानने से पहले यह जानना जरूरी है कि हरिश्चंद्रगढ़ क्यों प्रसिद्ध है?

क्यों वीकेंड पर यहां महाराष्ट्र और आसपास के राज्यों से हजारों ट्रेकर पहुंचते हैं?

क्या किसी पहाड़ का रूप किसी स्त्री से भी ज़्यादा आकर्षित कर सकता है?

तो इसका उत्तर है हां!

प्रकृति की जिस अनुपम छटा को देखने लोग हरिश्चंद्रगढ़ पहुंचते हैं।

उसकी खूबसूरती की तारीफ शायद शब्दों में बयां नहीं की जा सकती है।

क्योंकि, उसकी सुंदरता हर कल्पना और हर सोच से परे है।

उस सुहावने दृश्य का सिर्फ़ अनुभव किया जा सकता है।

पहली नज़र में प्रकृति से प्यार क्या होता है? इसका उत्तर भी यहां मिल जाता है!

हरिश्चंद्रगढ़ क्यों प्रसिद्ध है?

Harishchandragad Trek In Hindi & Best Treks Near Mumbai-Pune: 1,424 फीट ऊंचे पर्वत के शिखर पर बारह महीने जलमग्न रहने वाले अद्भुत शिवलिंग के दर्शन के लिए बड़ी दूर-दूर से लोग हरिश्चंद्रगढ़ आते हैं।

छोटी-छोटी गुफाओं में स्थापित देवी-देवताओं की अनोखी प्रतिमाओं का दीदार करने के लिए हरिश्चंद्रगढ़ में दस्तक देते हैं लोग।

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पहाड़ के टॉप पर टेंट लगाकर सारी रात चांद-तारों को निहारते हुए सुबह का अतुल्य नज़ारा देखने लोग पहुंचते हैं हरिश्चंद्रगढ़

ज़िंदगी में जब कभी कुछ अलग रोमांच का मन करता है, तो दो दिनों के लिए जिसे अपना गढ़ बना लेते हैं लोग, वह स्थान है हरिश्चंद्रगढ़

हरिश्चंद्रगढ़ के खिरेश्वर गांव में नागेश्वर के कई मंदिर मौजूद हैं, जो पर्यटकों को खूब लुभाते हैं।

वहीं हरिश्चंद्रेश्वर मंदिर और केदारेश्वर की गुफा ट्रेकर के बीच काफी लोकप्रिय है।

उन मंदिरों और गुफाओं की बेजोड़ नक्काशी देखकर यह पता चलता है कि उनका निर्माण मध्यकाल के दौरान किया गया था।

जानकारों का मानना है कि यह नक्काशी (कार्विंग) शैव, शाक्त या नाथ से संबंधित है।

अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ हरिश्चंद्रगढ़ मानव निर्मित मंदिरों, किलों और गुफाओं की बेजोड़ बनावट के लिए सबसे ज़्यादा प्रसिद्ध है।

पांच सबसे सुप्रसिद्ध स्थान, जिसके लिए हरिश्चंद्रगढ़ सबसे अधिक प्रसिद्ध है।

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सप्ततीर्थ पुष्करणीकेदारेश्वर गुफाकोंकण कड़ा-Cliffतारामती शिखर-Peakहरिश्चंद्रेश्वर मंदिर

और हरिश्चंद्रगढ़ क्यों प्रसिद्ध है?

Harishchandragad Trek In Hindi & Best Treks Near Mumbai-Pune: ऊपर बताई गई पांचों जगहें मुख्य आकर्षण का केंद्र हैं और हरिश्चंद्रगढ़ इसीलिए सबसे ज़्यादा प्रसिद्ध है।

इसके अलावा, ट्रेकिंग के दौरान पूरे रास्ते एक ट्रेकर जो रोमांचक अनुभव महसूस करता है, वह अहसाह केवल हरिश्चंद्रगढ़ में मिलता है।

हरिश्चंद्रगढ़ ट्रेक की कठिनाई की बात की जाए तो इसकी चढ़ाई मीडियम है।

न बहुत कम और न ही बहुत ज़्यादा है।

लेकिन, इस ऊंचाई को केवल वही छू सकता है, जिसका जिगर चट्टानों-सा मजबूत होगा।

इन आंखों ने कई ट्रेकर्स को आधे घंटे की चढ़ाई में ही थककर ज़मीन पर लेटते देखा है।

कई ट्रेकर्स को खड़ी पहाड़ी की चढ़ाई के दौरान हिम्मत हारकर पीछे आते देखा है।

पर हां, जिन्होंने इन चैलेंजेस को जीत लिया। यकीन मानिए, उन्होंने वह देखा, जो कभी नहीं देखा!

हरिश्चंद्रगढ़ ट्रेकिंग की शुरुआत

Harishchandragad Trek In Hindi & Best Treks Near Mumbai-Pune: हरिश्चंद्रगढ़ को मुंबई और पुणे का सबसे नजदीकी, बेहतरीन और ऊंचे किलों (फोर्ट) में से एक माना जाता है।

प्रसिद्ध हरिश्चंद्रगढ़ ट्रेक की शुरुआत तीन अलग-अलग गांवों से होती है।

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खिरेश्वर गांवपाचनई गांववाल्हिवाले/बेलपाड़ा गांव

खिरेश्वर और वाल्हिवाले/बेलपाड़ा गांव के रास्ते बहुत ज़्यादा चुनौतियों से भरे हुए हैं।

बेलपाड़ा गांव से हरिश्चंद्रगढ़ टॉप पर पहुंचने के लिए तीन अलग-अलग रास्ते हैं।

जिसमें नलीची वाट, माकड़ नाल और साधले घाट शामिल हैं।

आप साधले घाट और भैलघाट रूट का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

ध्यान रहे कि यदि आप एक अनुभवी ट्रेकर हैं, तभी इन मार्गों उपयोग करें।

साथ ही अपने पास मजबूत रस्सी और कैरबिनर जैसे रॉक-क्लाइंबिंग इक्विपमेंट जरूर रखें।

यदि आप एक नौसिखिया ट्रेकर हैं तो पाचनई गांव से शुरू होने वाले रास्ते को अपनाएं।

यह हरिश्चंद्रगढ़ किले तक पहुंचने का सबसे तेज़ और आसान रास्ता है।

यही ट्रेकिंग रूट ट्रेकर्स के बीच ज़्यादा प्रसिद्ध है।

हरिश्चंद्रगढ़ का पाचनई गांव क्यों प्रसिद्ध है?

Harishchandragad Trek In Hindi & Best Treks Near Mumbai-Pune: हरिश्चंद्रगढ़ के पाचनई गांव से शुरू होनी वाली यात्रा ट्रेकरों के बीच बहुत अधिक प्रसिद्ध है।

पाचनई की बात करें तो यह हरे-भरे और सफेद पर्वतों की गोद में बसा एक खूबसूरत गांव हैं।

गोद का मतलब चारों तरफ मन मोह लेने वाले पहाड़ की ऊंची-नीची मालाएं हैं और उनके बीच में बसा है पाचनई।

पेड़ों की हरियाली के बीच यहां आपको कई ग्रामीण घर मिलेंगे।

गांव के पास से एक छोटी-सी नदी निकलती है।

हरिश्चंद्रगढ़ की चढ़ाई का सुहाना सफर इसी मार्ग से शुरू होता है।

गांव से कुछ दूरी चलकर आने के बाद लकड़ी वाले आकार और डिज़ाइन में एक अट्रैक्टिव गेट दिखाई देता है।

गेट के ऊपर एक बोर्ड लगा है। जिसमें लिखा है ‘ग्राम पारिस्थितिकी विकास समिति, पाचनई, हरिश्चंद्रगढ़।’

जानकारी के लिए आपको बता दें कि ‘हरिश्चंद्रगढ़’ को मराठी भाषा में ‘हरिश्चंद्रगड’ लिखा-पढ़ा जाता है।

जैसे-जैसे आप आगे बढ़ते हैं, चढ़ाई हार्ड होती जाती है।

धीरे-धीरे लोग पोल, लकड़ी आदि पकड़-पकड़कर चढ़ते दिखाई देते हैं।

सांसों की गति तेज और चाल की स्पीड कम होने लगती है।

हर पांच मिनट की चढ़ाई के बाद बस बैठने का मन करता है।

बार-बार पानी पीने की इच्छा होती है।

चट्टान वाले पहाड़ के एकदम अंतिम छोर से आगे बढ़ते वक़्त बहुत से लोगों को वॉइस इको का लुफ्त उठाते देखा जा सकता है।

लोग वहां से अपना या अपने चाहने वाले का नाम पुकारते हैं और उधर से पहाड़ उस नाम को दोहराता है।

यानी वहां आवाज़ गूंजती है।

कितनी कठिन है चढ़ाई?

हरिश्चंद्रगढ़ क्यों प्रसिद्ध है, कहां स्थित है और कैसे पहुंचे: हर ट्रेकर का सफर शुरू होता है बड़े जोर-शोर के साथ। पर, आधे घंटे के बाद सारा उत्साह थकान में बदल जाता है।

वजह, जैसे-जैसे कदम आगे बढ़ता है, जमीन ऊपर उठती जाती है।

पाचनई गांव से हरिश्चंद्रगढ़ टॉप की दूरी 3-5 किमी और ट्रेकिंग समय 2-3 घंटे है।

हर एक किमी पर किलोमीटर स्टोन लगाया गया है।

अक्सर यहां से ट्रेकिंग की शुरुआत सुबह 8 बजे से होती है।

ट्रेकिंग पर निकलने से पहले लोग अपने एक्स्ट्रा लगेज को अपनी कार या फिर होम स्टे में सुरक्षित रख देते हैं।

फिर फ्रेश होकर और कुछ नाश्ता करके अपनी मंजिल की ओर निकल पड़ते हैं।

पैक्ड फूड्स आप अपने साथ रख सकते हैं। बढ़िया नाश्ता आपको होम स्टे में भी मिल जाएगा।

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कैसी हैं रास्तों की चुनौतियां?

हरिश्चंद्रगढ़ क्यों प्रसिद्ध है, कहां स्थित है और कैसे पहुंचे: शिखर पर पहुंचने के लिए कुछ समय बाद पहले घने जंगलों के बीच से गुजरना पड़ता है।

छोटे-बड़े और घने वनों के बीच का रोमांचक सफर कम से कम आधे घंटे तक जरूर चलता है।

उसके बाद शुरू होती है ऊबड़-खाबड़ चट्टानों वाली यात्रा।

कहीं एकदम खड़ी चढ़ाई से मुकाबला होता है तो कहीं एकदम सपाट रास्तों से पाला पड़ता है।

हर बढ़ते कदम के साथ रास्ते बदलते रहते हैं।

वंडरफुल नज़ारों की बैकग्राउंड पल-पल में चेंज होती रहती है।

जैसे-जैसे आप ऊंचाई पर पहुंचते हैं, गांवों के बड़े-बड़े घर अंडे के आकार में दिखाई देने लगते हैं।

एक पत्थर पकड़कर और दूसरे पत्थर पर पैर रखकर ऊपर चढ़ने का रिस्क गजब की फिलिंग देता है।

जब चढ़ाई एकदम सीधी होती है और कमजोर दिल वाला इंसान सिर उठाकर ऊपर की तरफ देखता है तो हाथ-पैर अपने आप कांपने लगते हैं।

यह कठिन चढ़ाई आपको नीचे से ऊपर आने तक 30-45 मिनट के बीच मिलता है।

इसी स्थान से जिस व्यक्ति को ऊंचाई से डर लगता है, वे हिम्मत हारकर लौट जाते हैं।

इस पड़ाव को पार करने के बाद आसान रास्ता मिलने लगता है।

जैसे-जैसे आप ऊंचाई पर चढ़ते जाते हैं, आसपास का नज़ारा बेहतर से बेहतरीन होता जाता है।

कैसे है आगे का रास्ता?

Harishchandragad Trek In Hindi & Best Treks Near Mumbai-Pune: धीरे-धीरे आगे का रास्ता सरल होता जाता है।

जो मार्ग पहाड़ के आखिरी सिरे से गुजरता है। सुरक्षा के लिहाज से उन रास्तों को मजबूत बाड़ द्वारा घेरा गया है।

कहीं-कहीं बाड़ की सुविधा मौजूद नहीं है।

ऐसे में ज़्यादा सावधानी बरतने की जरूरत पड़ती है।

क्योंकि, पैर फिसलते ही सीधे नीचे गिरने का खतरा हो सकता है।

इस कठिन पड़ाव को पार करने के बाद रास्ता एकदम आसान हो जाता है।

पहाड़ के ऊपर एक तरफ से छोटी नदी निकलती है और उसके बगल से रास्ता गुजरता है।

सेल्फी लेते रहिए, पानी पीते रहिए और झूले की तरह ऊपर-नीचे चलते आगे बढ़ते रहिए।

उसके बाद एक बार फिर आपको जंगलों के बीच से गुजरना पड़ेगा।

ऊबड़-खाबड़ और पथरीले रास्तों के साथ मीलों चलना पड़ता है।

इसके बाद आपको वह अद्भुत नज़ारा दिखाई देता है, जिसके लिए आप 2-3 घंटे पहाड़ के सीने पर चलते हैं।

याद रहे, पहाड़ और जंगल के बीच चलते समय अपनी दोनों आखें और कान जरूर खुली रखें।

क्योंकि, इस रोमांचक सफर के दौरान आपकी मुलाकात जंगली जीवों से भी हो सकती है।

सांप और अजगर की अक्सर ट्रेकर से भेंट होती रहती है। हमेशा अपने समूह के साथ चलें।

हरिश्चंद्रगढ़ टॉप पर क्या दिखता है?

Harishchandragad Trek In Hindi & Best Treks Near Mumbai-Pune: पर्वत के ऊपर की जादुई दुनिया देखकर कुछ समय के लिए अपनी आंखों पर यकीन नहीं होता है।

ऐसा इंजीनियरिग चमत्कार उस जमाने में हुआ होगा, विश्वास नहीं होता है।

चट्टान के ऊपर कई प्राचीन मंदिर और तालाब कुंड मौजूद हैं।

हैरानी की बात यह नहीं कि पहाड़ के ऊपर मंदिर है।

बल्कि हैरान करने वाली बात यह है कि 1,424 फीट की ऊंचाई पर जो तालाब है, वह हमेशा पानी से भरा रहता है।

मंदिरों में स्थापित जो शिवलिंग हैं, हमेशा जलमग्न होते हैं।

उतने ऊंचे पर्वत पर पानी आता कहां से है? धरती से कि आसमान से?

पृथ्वी के सतह से आ नहीं सकता, क्योंकि नीचे चट्टानों की भूमि है।

शायद बरसात का पानी बहकर आता होगा और कुंड आदि में जमा होता होगा।

लेकिन, गर्मी और ठंडी के समय जब अन्य बाकी जगह सूखा दिखाई देता है, वहीं कुंड जल से भरा रहता है।

शिवलिंग हमेशा जलमग्न रहते हैं।

पता ही नहीं चलता कि पानी कहां से आता है और कैसे रुकता है।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि शिवलिंग छोटा हो या चाहे बड़ा, जिसका जितना आकार है, वह उसी हिसाब से जलमग्न हैं!

पुराने जमाने का यह अद्भुत इंजीनियरिंग चमत्कार देखकर दिमाग हिल जाता है।

अद्भुत इंजीनियरिंग चमत्कार

Harishchandragad Trek In Hindi & Best Treks Near Mumbai-Pune: हरिश्चंद्रगढ़ के टॉप पर कई छोटे-छोटे लिंग स्थापित हैं।

केदारेश्वर गुफा में स्थापित शिवलिंग सबसे भव्य है।

यह बड़े चबूतरे पर स्थापित बड़े आकार वाला शिवलिंग है।

भगवान शिव के इस गुफा मंदिर को पहाड़ काटकर बनाया गया है।

इसमें तीन बड़े और सुंदर नक्कासी वाले खंभे हैं।

मंदिर का गर्भगृह हमेशा पानी से डूबा रहता है।

ज़्यादातर भक्त अपने साथ कपड़े लेकर जाते हैं।

उसी जल में स्नान करते हुए भगवन शिव के दर्शन-पूजन करते हैं।

मौजूदा समय में गुफा मंदिर के दो खंभे टूटे हुए हैं।

फिर भी मंदिर एक खंभे पर मजबूती से खड़ा है।

कब मिट जाती है थकान?

हरिश्चंद्रगढ़ क्यों प्रसिद्ध है, कहां स्थित है और कैसे पहुंचे: केदारेश्वर गुफा मंदिर में स्थापित दिव्य और भव्य शिवलिंग है।

जिसे देखने के बाद कुछ और देखने का जी नहीं करता है। पर अभी देखने के लिए बहुत कुछ है!

वहां मौजूद सभी मंदिरों के दर्शन-पूजन, फोटो और वीडियोग्राफी करने के बाद ट्रेकर, पर्यटक और श्रद्धालु अपने साथ ले गए फूड को किसी पेड़ की छाया में बैठकर खाते-पीते हैं।

वैसे ऊपर भी दो-चार खाने-पीने की दुकानें मिल जाती हैं।

उतने ऊपर पर्यटकों तक खाने-पीने की चीजें उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय लोग हर दिन सुबह शाम ट्रेकिंग करते हैं।

खाने-पीने के बाद अक्सर लोग पास ही मौजूद गुफाओं में जो कुछ मिलता है, बिछाकर सो जाते हैं।

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केदारेश्वर गुफा के आसपास के इलाके को ट्रेक का सबसे मुख्य पड़ाव माना जाता है।

यहीं आपको कई प्राचीन मंदिर, तालाब और गुफा आदि दिखाई देते हैं।

ज़्यादा करके यही स्थान ट्रेकर्स के बीच प्रसिद्ध है।

रोमांच का असली सफर अभी बाकी है

हरिश्चंद्रगढ़ क्यों प्रसिद्ध है, कहां स्थित है और कैसे पहुंचे: गुफा आदि में कुछ समय तक आराम करने के बाद कारवां आगे बढ़ता है।

घने जंगलों के बीच हाथों से रास्ता बनाते हुए लोग कोंकण कड़ा की ओर बढ़ते हैं।

यह रोमांचक यात्रा 20-30 मिनट में पूरी होती है।

उसके बाद रास्ता बंद हो जाता है।

ऊंचे-ऊंचे पर्वत सिर उठाए दूर-दूर तक दीवार बनकर न जाने कितने युगों से सीना ताने खड़े हैं।

कोंकण कड़ा पहुंचने के बाद जिस तरफ नज़र पड़ती है, उस तरफ केवल अद्भुत नज़ारे दिखाई देते हैं।

चारों तरफ विशाल पहाड़ों की माला और हरियाली का गहना दिखाई देता है।

हवा की स्पीड उतनी कि पैरों को जमीन में दबोचकर खड़ा होना पड़ता है।

पहाड़ की गहराई नीचे लेटकर देखना पड़ता है।

यहां से आसमान नजदीक और जमीन दूर दिखाई देती है।

शायद इसे कोंकड़ का घर भी कहा जाता है।

यहां अक्सर लोग सिक्के नीचे की तरफ फेंकते हुए दिखाई देते हैं।

हवा की गति बहुत तेज होती है, इसलिए सिक्के बहुत कम नीचे गिरते हैं।

यहां आवाज़ के साथ-साथ हवा भी गूंजती है। मधुर संगीत से मन मोह लेती है।

ऐसी एक्टिविटी का आनंद उठाते इस शिखर पर बड़ी संख्या में लोग दिखते हैं।

कोंकण कड़ा क्यों प्रसिद्ध है?

हरिश्चंद्रगढ़ कहां स्थित है और कैसे पहुंचे?: कोंकण कड़ा तीन वजहों से मुख्य रूप से प्रसिद्ध है

1. यहां पर्वत और प्रकृति का ऐसा अद्भुत नज़ारा दिखाई देता है, शायद ही महाराष्ट्र या भारत के अन्य स्थानों पर दिखाई देता होगा। यह स्थान अपनी बेहतरीन सुंदरता और ऊंचे-चट्टानों वाले पर्वतों के लिए प्रसिद्ध है।

2. कोंकण कड़ा की चट्टान कैंपिंग की सुविधा देती है। इसलिए, बहुत सारे लोग यहां कैंपिंग के उद्देश्य से आते हैं। कैंपिंग के लिए यह प्लेस ट्रेकर्स के बीच खूब प्रसिद्ध है।

3. कोंकण कड़ा की सुबह और शाम बेहद खूबसूरत होती है। यहां उगते और डूबते सूरज का कभी न देखा रूप देखा जा सकता है। सुबह का अद्भुत नज़ारा देखने के लिए लोग कोंकण कड़ा पर टेंट लगाकर रात बिताते हैं।

कहां रुकें और खाएं?

हरिश्चंद्रगढ़ क्यों प्रसिद्ध है, कहां स्थित है और कैसे पहुंचे: कोंकण कड़ा का सूर्योदय अद्भुत, अलौकिक और अतुलनीय होता है।

यहां के बाद सफर समाप्त हो जाता है।

कोंकण कड़ा शिखर और उसके आसपास मौजूद सभी प्रसिद्ध पर्वतों की खूबसूरती को अपनी रंगीन यादों के कैमरे में कैद करने के बाद लोग फिर घंटों चलकर अपने निर्धारित स्थान पर पहुंचते हैं।

शाम को ट्रेकिंग से लौटने के बाद ज़्यादातर लोग नीचे बसे गांवों में रात बिताते हैं।

पाचनई गांव में होम स्टे द्वारा रहने के लिए बेहतर टेंट उपलब्ध कराए जाते हैं।

आप अपने साथ भी टेंट ले जा सकते हैं। होम स्टे वाले अपने द्वार पर तंबू फैलाने की इजाजत देते हैं।

गांव के घर जैसे खाने का टेस्ट बहुत बेजोड़ होता है।

समूह में गए ट्रेकर पहले आधी रात तक पार्टी करते हैं।

गला फाड़-फाड़कर और गिटार बजाकर, वीराने में अपने छुपे हुए हुनर का परिचय देते हैं।

फिर भोजन करने के बाद टेंट में सुकून की नींद सो जाते हैं।

सुबह फ्रेश होने और नाश्ता करने के बाद लोग अपने घर लौट जाते हैं।

होम स्टे वाले टेंट में रुकने और खाने-पीने के लिए आपको बहुत ज़्यादा पैसे खर्च नहीं करने पड़ते हैं।

दाम वाजिब और तजुर्बा बेजोड़ है।

हरिश्चंद्रगढ़ कहां स्थित है?

Harishchandragad Trek In Hindi & Best Treks Near Mumbai-Pune: आइए अब जानते हैं कि हरिश्चंद्रगढ़ कैसे पहुंचे और हरिश्चंद्रगढ़ कहां स्थित है?

हरिश्चंद्रगढ़ महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित है।

आपको बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने अहमदनगर का नाम ‘अहिल्यादेवी नगर’ रख दिया है।

यानी हरिश्चंद्रगढ़ का जिला अब ‘अहिल्यादेवी नगर’ है।

हरिश्चंद्रगढ़ बेहद प्राचीन पर्वतीय दुर्ग है, जो मालशेज घाट पर 1,424 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

यह ऐतिहासिक पहाड़ी किला खिरेश्वर से 8 किमी, भंडारदरा से 50 किमी, अहिल्यादेवी नगर (अहमदनगर) मुख्यालय से 146.4 किमी और पुणे से 166 किमी की दूरी पर सुशोभित है।

महाराष्ट्र पर्यटन विभाग द्वारा लगातार हरिश्चंद्रगढ़ ट्रेक का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

कैसे पहुंचे हरिश्चंद्रगढ़ के पाचनई गांव?

Harishchandragad Trek In Hindi & Best Treks Near Mumbai-Pune: मुंबई, नासिक, पुणे आदि जैसे स्थानों से हरिश्चंद्रगढ़ बड़े आराम से पहुंचा जा सकता है।

ऑनलाइन सर्च करने पर हरिश्चंद्रगढ़ ट्रेक कराने वाली कई एजेंसियां मिल जाएंगी।

उनसे संपर्क कर आप अपनी प्लान को एग्जीक्यूट कर सकते हैं।

ग्रुप में ट्रेकिंग के लिए प्लान करना सबसे बेस्ट ऑप्शन हो सकता है।

इससे समय, परेशानी और पैसे में बचत होगी।

यदि आप मुंबई में रहते हैं तो मजबूत और वेल मेंटेन फोर व्हीलर निकालें और फ्राइडे नाइट ऑफिस का काम निपटाकर निकल जाइए।

मुंबई से हरिश्चंद्रगढ़ की ऐतिहासिक पहाड़ी 218 किमी की दूरी पर स्थित है।

फोर व्हीलर से पहुंचने में लगभग साढ़े पांच से छह घंटे का समय लगता है।

आप मुंबई से मुंबई-नासिक हाइवे पकड़ सकते हैं।

हरिश्चंद्रगढ़ कैसे पहुंचे?

Harishchandragad Trek In Hindi & Best Treks Near Mumbai-Pune: मुंबई से रोड द्वारा हरिश्चंद्रगढ़ पहुंचने के लिए रूट इस प्रकार है।

मुंबई<ठाणे<शाहपुर<कसारा<इगतपुरी<टाकेघोटी<दौन्दत<पिंपलगांव मोर<राजुर<पाचने<हरिश्चंद्रगढ़

हरिश्चंद्रगढ़ किले का इतिहास

महाराष्ट्र सरकार की अहमदनगर जिला वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हरिश्चंद्रगढ़ महाराष्ट्र का सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध पर्वतीय दुर्ग है।

ट्रेकिंग के लिहाज से हरिश्चंद्रगढ़ को महाराष्ट्र का सबसे लोकप्रिय स्थान माना जाता है।

इस दुर्लभ किले की ऊंचाई 1,424 मीटर है।

किले का निर्माण कलचुरी राजवंश के शासनकाल में 6वीं शताब्दी के दौरान किया गया था।

वहीं विभिन्न गुफाओं और मंदिरों का निर्माण 11वीं शताब्दी माना जाता है।

कहते हैं कि 14वीं शताब्दी के दौरान इस किले पर मौजूद मंदिरों और गुफाओं में ऋषि चांगदेव जी महाराज ध्यान किया करते थे।

उसके बाद कई सालों तक यह धार्मिक और पौराणिक धरोहर मुगलों के अधीन रहा।

सन 1747 में मराठों ने अपने शौर्य के दम पर इस किले पर मराठा साम्राज्य का परचम लहरा दिया।

खोज के दौरान यहां से माइक्रोलिथिक मानव निवासियों के अवशेष प्राप्त हुए थे।

हैरानी की बात यह है कि हरिश्चंद्रगढ़ की चर्चा मत्स्यपुराण, अग्निपुराण और स्कंदपुराण जैसे कई विभिन्न पुराणों में मिलती है।

हरिश्चंद्रगढ़ में रोहिदास, तारामती और हरिश्चंद्र नामक तीन चोटियां युगों-युगों से महाराष्ट्र सहित संपूर्ण भारतवर्ष को गौरवान्वित और रोमांचित करती रही हैं।

तालाब पक्का है और उसके सामने काले पत्थरों वाले कमरे और अलग-अलग दरवाजे बने हैं।

जहाज द्वारा हरिश्चंद्रगढ़ कैसे पहुंचे?

Harishchandragad Trek In Hindi & Best Treks Near Mumbai-Pune: यह तो आप जान ही गए हैं कि हरिश्चंद्रगढ़ कहां स्थित है?

आइए अब जानते हैं कि हरिश्चंद्रगढ़ हवाई जहाज द्वारा कैसे पहुंचे?

हरिश्चंद्रगढ़ का सबसे नजदीकी (Near) एयरपोर्ट पुणे माना जाता है।

वैसे तो सबसे नजदीकी (Near) एयरपोर्ट ‘शिर्डी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ है।

पर, मौजूदा समय में वहां से उड़ानें सीमित हैं।

आप पुणे इंटरनेशनल एयरपोर्ट या शिर्डी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से निजी टैक्सी आदि के जरिए पूरे रास्ते पहाड़ और प्रकृति के खूबसूरत दृश्य निहारते हुए हरिश्चंद्रगढ़ बड़े आराम से पहुंच सकते हैं।

ट्रेन द्वारा हरिश्चंद्रगढ़ कैसे पहुंचे?

Harishchandragad Trek In Hindi & Best Treks Near Mumbai-Pune: हरिश्चंद्रगढ़ का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन अहमदनगर है।

अहमदनगर रेलवे स्टेशन से हरिश्चंद्रगढ़ की दूरी लगभग 150 के करीब है।

वहां से बड़ी आसानी से कार आदि भाड़े पर मिल जाती है।

इसके अलावा सबसे नजदीकी (Near) रेलवे स्टेशन इगतपुरी है।

वहां से हरिश्चंद्रगढ़ की दूरी मात्र 80 किमी के करीब है।

क्या-क्या रखें अपने साथ?

Harishchandragad Trek In Hindi & Best Treks Near Mumbai-Pune: हरिश्चंद्रगढ़ की चढ़ाई करते समय अपने साथ इन वस्तुओं को जरूर साथ रखें और पहनें।

1. सबसे अच्छी क्वालिटी और मजबूत ग्रिप वाले ट्रेकिंग शूज पहनें।

2. अपनी जरूरत के अनुसार अपने साथ पानी की बोतल, एनर्जी ड्रिंक, छाछ आदि रखें।

3. अपने साथ पैक और रेडी फूड रखें। ब्रेड-बटर आदि भी ले जा सकते हैं।

4. पावर बैंक साथ रखना समझदारी होगी। पर्वत के शिखर पर ऐसे-ऐसे नज़ारे दिखते हैं कि फोटो और वीडियोग्राफी करते-करते मोबाइल की बैटरी जरूर खत्म हो जाएगी।

5. ऊपर भगवान शिव जी का गुफा मंदिर है। शिवलिंग के दर्शन-पूजन के लिए पानी में उतरना पड़ता है। इसलिए अपने साथ कुछ एक्स्ट्रा कपड़े जरूर रखें।

6. सनग्लासेस, कैप और सॉलिड ट्रैक सूट का इस्तेमाल करें।

7. फर्स्ट एड बॉक्स अवश्य साथ रखें।

8. ट्रेकिंग अर्ली मॉर्निंग शुरू करें।

9. ट्रेकिंग के नज़रिए से अक्टूबर से फरवरी और फिर बरसात का समय सबसे बेहतरीन माना जाता है।

10. बारिश के दौरान हरिश्चंद्रगढ़ का माहौल बेहद सुंदर और सुखद हो जाता है। पर, उस दौरान ट्रेकिंग करते समय फिसलने का खतरा बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है।

11. एक से दो दिन की ट्रिप प्लान की जा सकती है।

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ज्ञानमंच के इस आर्टिकल में आपने जाना: Harishchandragad Trek In Hindi । Best Treks Near Mumbai-Pune । हरिश्चंद्रगढ़ क्यों प्रसिद्ध है? । हरिश्चंद्रगढ़ कहां स्थित है? । हरिश्चंद्रगढ़ कैसे पहुंचे?

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