Hartalika Teej 2023 Date: व्रत पावन करो, सदा सुहागन रहो

Hartalika Teej 2023 Date: इस लेख के जरिए जानिए कि कब है तीज पर्व? तीज क्यों मनाते हैं? तीज व्रत का महत्त्व, तीज व्रत की विधि, तीज व्रत का फल, तीज व्रत कैसे खोलें, किस रंग की साड़ी पहनें, तीज पर्व कहां मनाया जाता है?

आस्था, श्रद्धा, भक्ति, विश्वास और संकल्प का प्रतीक है हरतालिका तीज।

सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं की उम्मीद का पर्व है हरतालिका तीज।

कहते हैं कि तीज का उपवास रखने वाली महिलाओं की जोड़ी सदा सलामत रहती है।

सुहाग की लंबी उम्र के साथ माथे की बिंदिया सदा चमकती रहती है।

शादीशुदा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की वृद्धि होती है।

सनातन धर्म में हरतालिका तीज का विशेष महत्व है।

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज व्रत किया जाता है।

करवा चौथ की तरह हरतालिका तीज व्रत भी कठिन उपवास है।

इसमें महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत करती हैं।

कठिन तपस्या वाला यह पवित्र व्रत माता पार्वती और भगवान शिव से संबंधित है।

चलिए जानते हैं कि हरतालिका तीज क्यों मनाते हैं?

तीज क्यों मनाते हैं

Hartalika Teej 2023 Date: ऐसा कहा जाता है कि भगवान महादेव को पति के रूप में दोबारा पाने के लिए माता पार्वती ने सैकड़ों वर्षों तक कठोर तपस्या की थी।

107 बार जन्म लेने और कड़ी तपस्या करने के बाद 108वीं बार माता पार्वती ने जन्म लिया था।

कई वर्षों तक फिर लगातार तपस्या करने के बाद माता को भगवान शिव पति के रूप में प्राप्त हुए थे।

मान्यता है कि माता पार्वती ने सबसे पहले हरतालिका तीज का व्रत किया था।

तब भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि चल रही थी।

इसके बाद उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाया था।

भगवान शिव और माता पार्वती के उस मिलन से तीज व्रत का आरंभ हुआ था।

तब से आज तक यह परंपरा चलती आ रही है। तीज को हरतालिका तीज के नाम जाना जाता है।

या यूं कहें कि तीज पर्व माता पार्वती और भगवान भोलेनाथ के पुनर्मिलन का प्रतीक है।

माता पार्वती और भगवान शिव को समर्पित तीज का यह त्योहार सावन महीने के अंत में मनाया जाता है।

उम्मीद है कि आपको यह पता चल गया होगा कि तीज क्यों मनाते हैं?

चलिए जानते हैं कि तीज व्रत का महत्त्व क्या है?

तीज व्रत का महत्त्व

सनातन धर्म में तीज व्रत का बहुत महत्व है। गौर किया जाए तो यह प्राचीन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इस प्रवित्र त्योहार को कई विशेष कारणों से मनाया जाता है।

तीज व्रत का महत्व माता पार्वती और भगवान शिव के जीवन से जुड़ा हुआ है।

माता उमा ने भगवान भोले को पति के रूप में पाने के लिए सख्त साधना की थी।

उसी पौराणिक मान्यता के अनुसार यह कहा जाता है कि जो सुहागिन महिलाएं माता पार्वती के नाम का व्रत रखती हैं और पूजा-पाठ करती हैं, उन्हें सदा सुहागन रहने का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

सुखद वैवाहिक जीवन के उद्देश्य से सुहागिनें हरतालिका तीज का पर्व बड़े सच्चे भाव से मनाती हैं।

तीज व्रत का महत्त्व बहुत है। यह पर्व सुहागिन महिलाओं की शक्ति और साहस का प्रतीक है।

चलिए अब जानते हैं कि तीज व्रत की विधि क्या है?

तीज व्रत की विधि

हरतालिका तीज के दिन सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान और स्वच्छ कपड़े पहनना चाहिए।

उसके बाद हाथ में जल या गंगाजल लेकर व्रत शुरू करने का संकल्प लेना चाहिए।

माता गौरी से उपवास सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करनी चाहिए।

एक चौकी पर माता पार्वती और भगवान शिव सहित उनके पूरे परिवार की मिट्टी की मूर्तियां बनाकर घर के मंदिर में स्थापित करना चाहिए।

श्री शिव परिवार में माता पार्वती, भगवान श्री कार्तिकेय, भगवान श्री गणेश और नंदी बाबा आदि आते हैं।

उमा देवी को नई चुनरी पहनाकर, उनका विधिवत श्रृंगार करना चाहिए।

कई भक्त माता पार्वती को सोलह श्रृंगार से सजाते हैं। माता गौरी की पूजा शुभ मुहूर्त पर करनी चाहिए।

पूजा में ताजे फूल, अगरबत्ती, धूप और चंदन आदि शामिल किए जा सकते हैं।

भगवान शिव जी को भांग, धतूरा, बेलपत्र और सफेद फूल बहुत पसंद है।

आप इन चीजों को भी पूजा में शामिल कर सकते हैं।

भगवान शिव की पूजा करते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करना चाहिए।

माता पार्वती की आराधना करते वक़्त ‘ॐ उमायै नम:’ मंत्र जपना चाहिए।

श्री गणेश भगवान की पूजा करते समय ‘हरतालिका तीज’ की कथा पढ़नी या सुननी चाहिए।

दिन-भर निर्जला व्रत और रात में निर्धारित मुहूर्त पर विधिवत पूजा-पाठ, भजन कीर्तन, आदि के साथ माता की आराधना करनी चाहिए।

माता पार्वती और भगवान शिव की आरती के साथ अपनी पूजा पूरी करनी चाहिए।

अलग-अलग राज्यों के अनुसार तीज व्रत की विधि अनेक हो सकती है।

अपने पति की लंबी उम्र की कामना करने वाली सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं।

अगर आपको सेहत संबंधी कोई दिक्कत है, तो व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।

तीज व्रत का फल

हरतालिका तीज देवी पार्वती और भगवान शिव के अटूट रिश्ते का प्रतीक है।

16 श्रृंगार करके माता गौरा और भगवान महादेव की पूजा और व्रत करने वाली सुहागिनों को अखंड सौभाग्य का फल मिलता है।

आजकल कुंवारी लड़कियों में भी इस दिन उपवास रखने का प्रचलन देखा जा सकता है।

वे अपनी मनपसंद जीवन-साथी पाने के लिए यह व्रत करती हैं।

ऐसा कहा जाता है कि वैवाहिक जीवन सुखमय बनाए रखने के लिए सुहागिन महिलाओं को तीज का उपवास करना चाहिए।

तीज व्रत कैसे खोलें

हरतालिका तीज व्रत का पारण रात में चांद को अर्घ्य देने के बाद किया जाता है।

या फिर श्री गणेश चतुर्थी यानी गणपति उत्सव के पहले दिन सूर्योदय के बाद हरतालिक तीज व्रत खोला जाता है।

याद रहे अगर आप अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत खोलना चाहते हैं तो शुभ मुहूर्त अवश्य देख लें।

व्रत खोलने से पहले स्नान करके साफ कपड़े पहनें। माता पार्वती और भगवान शिव की विधिवत पूजा करें।

पूजा-अर्चना के बाद पूजन सामग्री और मिट्टी की मूर्तियों को किसी नदी, तालाब, समुद्र आदि में श्रद्धापूर्वक विसर्जन करें।

उसके बाद प्रसाद खाकर व्रत खोलें। पारण के लिए पूजा में लगाया गया भोग ही सबसे पहले खाना चाहिए।

उसके बाद कुछ और खाना चाहिए।

तीज व्रत में किस रंग की साड़ी पहनें

Hartalika Teej 2023 Date: कुछ जानकारों का मानना है कि हरतालिका तीज के दिन लाल रंग की साड़ी शुभ मानी जाती है।

सुहागिन महिलाओं को लाल साड़ी पहनने के साथ सोलह श्रृंगार करनी चाहिए।

इसके अलावा राशि के अनुसार रंग वाली साड़ी पहनकर माता पार्वती और भगवान महादेव की पूजा करने से शुभ आर्शीर्वाद मिलता है।

राशि अनुसार साड़ी के रंग

मेष राशि: लाल रंग की साड़ी

वृष राशिः गोल्डन रंग की साड़ी

मिथुन राशिः हरे रंग की साड़ी

कर्क राशिः नारंगी या लाल रंग की साड़ी

सिंह राशिः लाल रंग की साड़ी

कन्या राशिः हरे रंग की साड़ी

तुला राशिः गुलाबी रंग की साड़ी

वृश्चिक राशिः मैरून रंग की साड़ी

धनु राशिः पीले रंग की साड़ी

मकर राशिः हल्के नीले रंग की साड़ी

कुंभ राशिः हल्के नीले रंग की साड़ी

मीन राशिः पीले रंग की साड़ी

चलिए अब यह भी जान लेते हैं कि इस साल कब है तीज पर्व?

कब है तीज पर्व

Hartalika Teej 2023 Date: हरतालिका तीज पर्व इस साल 18 सितंबर, 2023 (सोमवार) को बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा।

विश्वास और आस्था का यह पर्व 17 सितंबर, 2023 (रविवार) की रात 11 बजकर 8 मिनट पर शुरू हो रहा है और 18 सितंबर, 2023 (सोमवार) को दोपहर 12 बजकर 39 मिनट पर समाप्त होगा।

पूजा का शुभ मुहूर्त 18 सितंबर को सुबह 6 बजे से रात 8 बजकर 24 मिनट तक है।

उदयातिथि के अनुसार हरतालिका तीज व्रत 18 सितंबर, 2023 (सोमवार) को रखा जाएगा।

कब है तीज पर्व के बाद यह भी जानिए कि तीज पर्व कहां मनाया जाता है?

तीज पर्व कहां मनाया जाता है

हरतालिका तीज का पर्व बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और झारखंड आदि राज्यों में प्रमुख रूप से मनाया जाता है।

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नोट: यह ख़बर विभिन्न स्रोतों, ज्‍योतिषी और पौराणिक मान्‍यताओं पर आधारित है। gyanmanch इसकी प्रमाणिकता का पुष्टि/दावा/वादा नहीं करता है।

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