Hindi Kavita 2024: नया साल, नई कविता

Hindi Kavita 2024: साल के नए अवसर पर पेश है 2024 की सबसे नई कविता।

जबसे तुम्हें चाहा है
पल-पल कटे रतिया
जब-जब लगे अखियां
नींद चुराए तेरी बिंदिया
जबसे तुम्हें मांगा है
रुक-रुक चले दिनवा
ना भूख-प्यास लगे
बुझा-बुझा रहे दिलवा।

अब तेरे आने के सिवा
देखता नहीं रास्ता
दुनिया से तोड़ा नाता
रखता नहीं वास्ता
मन मोर बन नाचे
जब देखूं तेरी सुरतिया
जबसे तुम्हें चाहा है
बुझा-बुझा रहे दिलवा।

बड़ा बिगड़ गया मैं
लड़ी जबसे तुमसे नजरिया
कैसे तुम्हें हाल सुनाऊं
नैनन से बरसे बदरिया
यादों की आगोश में
उठे दर्द की लहरिया
जबसे ख़्वाब सजाया है
सुलग-सुलग जाए मनवा
जबसे तुम्हें चाहा है
बुझा-बुझा रहे दिलवा।

खोया-खोया रहता हूं
बस आहें भरता हूं
जहां-जहां पड़े नज़र
सब तुम-सा लगता है
जबसे तुम्हें पूजा है
खिल-खिल जाए तनवा
जबसे तुम्हें चाहा है
बुझा-बुझा रहे दिलवा।

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