Hindi Kavita: मन जेठ का बंडाला

पढ़िए नई Hindi Kavita और नई हिंदी शायरी

तू सई नदी की धारा

मैं बंजर धरती बेचारा 

तू सई नदी की धारा 

मैं बंजर धरती बेचारा

तू सुकून का प्याला 

मैं जेठ का बंडाला

तू सई नदी की धारा

मैं जेठ का बंडाला

Hindi Kavita 

रास्ते में मनचले कई मिलेंगे 

प्यारे-प्यारे बुलबुले कई खिलेंगे 

सब रिझाएंगे, पास बुलाएंगे

मीठी-मीठी बातों से लुभाएंगे

देखो तुम ठहर ना जाना 

याद रखना मेरा फसाना 

तू सुकून का प्याला 

मैं जेठ का बंडाला

तू सई नदी की धारा

मैं जेठ का बंडाला

Hindi Kavita 

नदियों से नदियों में मिलकर

पर्वत की बाँहों से बचकर

झटपट सागर में घुल जाना

बन घनघोर बादल तुम आना 

फिर दिल खोल के इतना बरसना

साफ हो जाए बुरे कास का छाला

तू सुकून का प्याला

मैं मदमस्त बंडाला

तू सई नदी की धारा 

मैं मदमस्त बंडाला

तो चलिए, अब पढ़ते हैं नई हिंदी शायरी

आपकी मुस्कान से होंठ खिलते हैं

देख आपकी ख़ुशी तन-मन हंसते हैं

आपकी फ़िकर में बेचैन रहते हैं

सलामत रहो आप, दुआ करते हैं 

फिर भी आप हमें मतलबी कहते हैं।

नई हिंदी शायरी

रंगारंग महफ़िल में आपको खोजते हैं

हर मूरत में आपकी सूरत देखते हैं

आपके ग़मों को अपना ग़म समझते हैं

आपकी झलक के लिए हम तरसते हैं

फिर भी आप हमें मतलबी कहते हैं।

नई हिंदी शायरी

संग जीने-मरने का वादा करते हैं

हर जनम पाने का इरादा रखते हैं

पथरीली राहों में पलकें बिछाते हैं

पूरी ईमानदारी से रिश्ता निभाते हैं

फिर भी आप हमें मतलबी कहते हैं।

नई हिंदी शायरी

सही-ग़लत से आपको रूबरू कराते हैं

दुनिया की जालिम नज़रों से बचाते हैं

फिर भी आप हमें मतलबी कहते हैं

ठीक है जी, हम मतलबी ही सही

पर नहीं मिलेगा कहीं हम-सा कोई!

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Kavita Kosh

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