Jivdani Mandir Virar: 2024 में यादगार ट्रिप प्लान

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महाराष्ट्र: पालघर जिले के विरार पूर्व में लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र श्री जीवदानी मंदिर (Jivdani Devi Mandir Virar) विराजमान है।

पहले इस मंदिर को ‘माता एकविरा देवी’ के नाम से जाना जाता था।

इसीलिए, लोग इस शहर को ‘एकविरा’ के नाम से पुकारते थे।

मुगलों और पुर्तगालियों द्वारा किए गए हमले में मंदिर के साथ-साथ सनातन की आस्था को काफी चोट पहुंचाया गया था।

उन हमलों के बाद तब सिर्फ़ कुछ स्थानीय लोग ही माता के दर्शन करने आते थे।

परंतु, जैसे-जैसे भक्तों को मां की महिमा और चमत्कार की अनुभूति हुई, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी होती चली गई।

यह उन्हीं भक्तों की देन है कि आज माता जीवदानी का मंदिर (Jivdani Devi Mandir Virar) लाखों श्रद्धालुओं के दिलों में विराजमान है।

इस आर्टिकल में जानिए:

1जीवदानी माता मंदिर विरार का इतिहास (Jivdani Mandir Virar History)
2देवी जीवदानी माता की रोचक गाथा
3जीवदानी माता के दर्शन-पूजन का महत्त्व
4कैसे पड़ा जीवदानी नाम?
5जीवदानी देवी मंदिर कहां है?
6कैसे पहुंचें जीवदानी देवी मंदिर
7 मुख्य आकर्षण (Virar Tourist Places)
8आरती का समय
9होटल कहां लें
10ध्यान देने वाली बातें
11क्या खरीदें और क्या खाएं?
12पर्यटक के नजरिए
13फनिक्युलर से सफर हुआ आसान
14कब लगता है भव्य मेला

जीवदानी माता मंदिर विरार का इतिहास

Jivdani Mandir Virar History: अपने कौरव भाइयों से जुएं में मान-सम्मान सहित सबकुछ हारने के बाद, पांडवों को कठोर दंड का सामना करना पड़ा, जिसमें 13 वर्ष ‘वनवास’ और एक वर्ष ‘अज्ञातवास’ शामिल था।

यानी कुल 14 वर्ष उन्हें वनवास में बिताना था।

अपनी वनवास यात्रा के दौरान पांडवों ने भारत के कई स्थलों का दौरा किया।

उस दौरान पांचों भाइयों ने समाज हित में कई नेक कार्य किए।

कई मंदिर, तालाब, गुफा, आश्रम, आदि बनाएं।

भारतभर में आज भी कई ऐसे प्राचीन, प्रवित्र और धार्मिक स्थल मौजूद हैं, जो पांडवों के होने के प्रतीक हैं।

उनमें से एक सुप्रसिद्ध मंदिर है माता ‘जीवदानी’ का।

महाराष्ट्र के पालघर जिले के विरार शहर में उपस्थित यह मंदिर लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र है।

भगवती एकवीरा की स्थापना

Jivdani Mandir Virar History: ऐसी मान्यता है कि अपनी प्रभास यात्रा के दौरान पांडव आराम के उद्देश्य से कुछ समय तक ‘वैतरणी नदी’ के तट पर रुके थे।

जहां उन्होंने विरार तीर्थ के तट पर ‘भगवती एकवीरा’ की पूजा-अर्चना की।

कहते हैं कि उस समय विरार के ‘सतपुरा पर्वत’ की अद्भुत खूबसूरती देखकर पांडव मोहित हो गए थे।

यहां रहते हुए उन्होंने सबसे ऊंचे ‘सतपुरा पर्वत’ की एक गुफा में माता एकवीरा देवी के योग लिंग की स्थापना और पूजा की।

वे माता को ‘भगवती जीवदानी’ पुकारते थे।

जीवदानी का अर्थ होता है जीवन देने वाली देवी।

लेकिन यहां जीवदानी का अर्थ होता है – “वह शक्ति, जो जीवन का सबसे असली धन है।”

अपने निवास के दौरान पांडवों ने साधु/संतों के लिए ‘शिरगांव’ से लगभग एक मील की दूरी पर छोटी गुफाओं का एक समूह भी बनाया, जिसे ‘पांडव डोंगरी’ के नाम से जाना जाता है।

पांडव डोंगरी में ही योगी और साधु-संत रुकते थे तथा जीवदानी माता के दर्शन-पूजन करते थे।

कलयुग से बढ़ी मां महिमा

Jivdani Mandir Virar History: कलियुग की शुरुआत और बौद्ध धर्म का आगमन के बाद, ‘वैदिक योगियों’ की घटती संख्या के साथ लोग पहाड़ों वाली देवी को भूल गए।

उसके बाद पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य जी महाराज का आगमन हुआ।

उस समय विरार में ‘महार या मिराशी’ समुदाय के लोग रहते थे।

उनका काम था गांव के सभी मवेशियों को चराना।

अपनी इस मेहनत की वो उचित कीमत लेते थे।

महार समुदाय का एक व्यक्ति एक दिन जगद्गुरु शंकराचार्य पद्मनाभ स्वामी के दर्शन के लिए ‘निर्मल मंदिर’ आया और परमपावन से अनुरोध किया कि वे उन्हें आशीर्वाद दें, ताकि वे अपने प्रिय कुलदेवता के दर्शन कर सकें।

जीवदानी माता की रोचक गाथा

Jivdani Mandir Virar History: महार की भक्ति से प्रसन्न जगद्गुरु ने कहा कि “तुम जीवदानी की तलहटी में गौ-माता की सेवा करो।

माता रानी तुम्हारा कल्याण करेंगी। उचित समय पर मां तुम्हें दर्शन देंगी और तुम गोलोक प्राप्त करोगे।”

जगद्गुरु शंकराचार्य जी की सलाह पर महार पुनः अपने निवास लौट आया।

और, अपने गुरुदेव की आज्ञा के अनुसार वैतरणा नदी के किनारे एवं सातपुरा पहाड़ी क्षेत्र में गायों की सेवा करने लगा।

वह नित्य गांव के मवेशियों को चराने लगा।

महार इसी पहाड़ी के नीचे हर दिन जब अपनी गाय चराने जाता।

तब अपनी गायों के साथ हरदिन एक अपरिचित गाय को चरते देखता।

वह जैसे ही उस स्थान पर पहुंचता, गाय पता नहीं कहां से आकर, गायों के झुंड में मिल जाती और दिनभर उनके साथ घुल-मिलकर रहती, लेकिन शाम होते ही गायब हो जाती।

कैसे मिला महार को मेहनत का फल

Jivdani Mandir Virar History: यही सिलसिला काफी समय तक चलता रहा।

महार ने एक दिन अपने मन में सोचा कि मैं हर दिन इस गाय को इस उम्मीद से चराता हूं कि एक दिन इसका मालिक आएगा और मुझे मेरा उचित मेहनताना देगा।

लेकिन, अब सब्र का बांध टूट चुका है।

जो कर्म मैंने पूरी जिम्मेदारी से किया है, उसका फल लेने का सही समय आ चुका है।

इसी लालसा को अपने मन में दबाए एक दिन महार गाय के मालिक की तलाश में शाम के वक़्त उसके पीछे-पीछे चल पड़ा।

जीवदानी की पहाड़ी पर आगे-आगे गाय हवा से बातें करते हुए दौड़ रही थी।

पीछे-पीछे चरवाहा घुटनों के बल, जोर-जोर सांसें खींचते हुए पहाड़ पर चढ़ा जा रहा था।

महार गाय से काफी दूर था।

फिर भी उसने साफ-साफ देखा की पहाड़ की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचते ही गाय कहीं गायब हो गई।

चरवाहे ने ठान लिया था कि आज किसी भी कीमत पर गाय के मालिक का पता जरूर लगाना है।

इसी जिज्ञासा के साथ वह गाय के पीछे-पीछे जीवदानी पहाड़ी की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंच गया।

लेकिन, गाय का दूर-दूर तक कोई पता-ठिकाना नहीं।

काफी समय तक वह इधर-उधर गाय को ढूंढ़ता रहा, पर उसकी मौजूदगी का कोई निशान नहीं मिला।

इतनी मेहनत के बाद भी आशा निराशा में बदल गई।

उदास मन से महार फिर से पहाड़ उतरने की सोचने लगा।

मन में खुद से द्वंद चल रहा था।

गजब है यार! बरसों से जिस गाय की सेवा करते आ रहा हूं।

उसका कोई मालिक ही नहीं। मालिक नहीं, मतलब कोई मेहनताना नहीं मिलेगा।

मां ने दिया महार को दर्शन

Jivdani Mandir Virar History: सोच की गहराई में डूबा महार, जैसे ही पहाड़ से उतरने के लिए पहला कदम आगे बढ़ाया।

सामने दिव्य गुणों से युक्त एक सुन्दर स्त्री को देखकर उसके कदम ठहर गए।

आंखें खुली की खुली रह गईं। जैसे समय के साथ महार की सांसें भी ठहर गईं।

वह एकटक बस उस रूपवान और ऊर्जावान देवी के अतुल्य रूप को निहारता ही रहा।

सहसा, महार को जगद्गुरु शंकराचार्य जी द्वारा कही गई बात याद गई।

वह झट से समझ गया कि यह देवी कोई और नहीं, बल्कि हमारी कुलदेवी माता रानी ‘जीवदानी’ हैं।

अपनी कुलदेवी को अपनी नज़रों के सामने देखकर उसकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा।

माता जीवदानी के साक्षात दर्शन करते ही उसका जीवन धन्य हो गया।

मुक्ति के द्वार खुल गए।

या यूं कहें कि माता जीवदानी स्वयं ही उसे जीवन-मरण के चक्र से आज़ाद कराने के लिए प्रकट हुई थीं।

महार ने मांगा दिलचस्प वरदान!

Jivdani Mandir Virar History: माता जीवदानी के दिव्य दर्शन के बाद, महार ने कहा-“हे आई (मां)! मैंने आपकी गाय की बहुत सेवा की है।

नंगे पांव घूम-घूमकर, उसे हरी-भरी घासें खिलाई हैं।

प्यास लगने पर पानी पिलाया है।

धूप लगने पर पेड़ की छांव दी है।

क्या मुझे मेरी उस मेहनत का कुछ फल नहीं मिलेगा?

महार की बात सुनकर मां हंसने लगीं।

उसके बाद मेहनताना देने के लिए देवी ने अपना हाथ आगे बढ़ाया।

महार ने झट से पीछे हटते हुए कहा-“मुझे मत छुइए माता। मैं महार हूं।

मुझे धन, संपत्ति या वैभव नहीं, बल्कि कोई ऐसा वरदान दीजिए, जो स्पर्श, शब्द, महक, बनावट और रंग के भेदभाव से नष्ट न हो सके।”

महार के ज्ञान से मां हुईं हैरान

Jivdani Mandir Virar History: महार के ‘वर्णाश्रम और मोक्ष धर्म’ के अनोखे ज्ञान से मां हैरान थीं।

उन्होंने महार से पूछा कि ‘वर्णाश्रम और मोक्ष धर्म’ का ज्ञान तुम्हें कहां से प्राप्त हुआ?

इस पर महार ने उत्तर दिया कि यह ज्ञान जगद्गुरु शंकराचार्य जी की कृपा से प्राप्त हुआ है।

महार के इस उत्तर से भगवती देवी अतिप्रसन्न हुईं और उन्होंने कहा-“अपनी पुण्य दृष्टि से इस गाय को देखो।

यह कोई साधारण गाय नहीं, बल्कि साक्षात कामधेनु हैं।

यह वही गौ माता हैं, जिन्होंने अपनी पूंछ से तुम्हारे पूर्वजों को वैतरिणी पार कराकर स्वर्गलोक ले गई थीं।

मां जीवदानी की बात सुनते ही महार ने गाय को पहाड़ी की चोटी से छलांग लगाते हुए देखा।

देवी ने कहा-“अब मैं तुम्हें वह वरदान देती हूं, जो तुमने मुझसे मांगा था, वह है मोक्ष।”

माता जीवदानी जब महार को मोक्ष का वरदान दे रही थीं, तो थोड़ी दूर खड़ी एक महिला इस दिव्य पल का आनंद उठा रही थी।

महार के साथ बांझ महिला का कल्याण

Jivdani Mandir Virar History: महार को मोक्ष (वास्तविक जीवन धन, जीवन की असली संपदा) का वरदान देने के बाद देवी जैसे ही गुफा में प्रवेश करने ही वाली थी, तभी उस औरत ने जोर से चिल्लाते हुए कहा- “देवी-देवी, अम्बा-अम्बा, क्या आप अपनी इस ‘बांझ बेटी’ को जीवन-धन दिए बिना ही चली जाएंगी। एक बच्चे के बिन मेरी गोद सूनी है मां।”

अपनी ‘बांझ बेटी’ की करुणामयी पुकार सुनकर मां जीवदानी का ह्रदय पिघल गया।

देवी ने उस महिला से कहा-“आप महान हैं देवी, जिन्होंने हम तीनों (माता जीवदानी, कामधेनु गाय और महार) के एक साथ अलौकिक दर्शन किए।

इसलिए, मैं तुम्हें एक बच्चे का आशीर्वाद देती हूं।”

महिला माता जीवदानी के वरदान से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुई।

उसने कहा-“हे तीनों लोकों की माता, मैं आपसे हाथ जोड़कर विनती करती हूं कि आज से आप सदा-सदा के लिए यहां निवास करें।

मेरी तरह जो भी बांझ बहनें आपकी चौखट पर आएं, आपकी पूजा-पाठ करें, उन सभी पर आपकी कृपा बरसें और संतान की प्राप्ति हो।”

उस महिला द्वारा मांगे गए वरदान से देवी मां बहुत प्रभावित हुईं।

उन्होंने कहा- “ऐसा ही होगा। परंतु, कलियुग आने वाला है।

इसलिए, पूजा-अर्चना और अनुष्ठानों की शुद्धता बनाए रखने के लिए मैं गुफा के अंत में एक छिद्र में सदा निवास करूंगी।

जो बांझ महिलाएं इस छिद्र के जरिए मुझे पान-सुपारी अर्पित करेंगी, उन्हें संतान सुख अवश्य प्राप्त होगा।”

यह कहकर देवी अदृश्य हो गईं।

अपने संग घटी हर घटना का वृतांत जब महिला दुनिया को सुनाने लगी, तो एक बार फिर जीवदानी माता के पर्वत पर भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी।

जीवदानी माता मंदिर विरार का इतिहास (Jivdani Mandir Virar History) जानने के बाद चलिए वर्तमान समय के मुख्य आकर्षण और महिमा के बारे में जानते हैं।

भव्य आकर्षण

Virar Tourist Places: वर्तमान में स्थापित माता जीवदानी की प्रतिमा बिल्कुल नई है।

मूल गर्भगृह गुफा के निचले हिस्से में छिद्र है, जो पूजा का मुख्य स्थान है।

देवी का मंदिर पूरी तरह से पुनर्निर्मित है और सफेद संगमरमर से बनी देवी की सुंदर मूर्ति है।

जीवदानी माता मंदिर परिसर में अन्य कई देवी देवताओं के मंदिरों की स्थापना की गई है।

गर्भगृह में माता जीवदानी के साथ मां लक्ष्मी और मां सरस्वती की पवित्र प्रतिमा स्थापित है।

माता जीवदानी के दाईं तरफ श्री गणेश भगवान की छोटी-सी मनमोहक मूर्ति स्थापित है।

बाईं ओर पूजा-अभिषेक के उद्देश्य से माता जीवदानी की छोटी प्रतिमा विराजमान है।

वहीं दीवार पर चांदी में मढ़ी देवी लक्ष्मी और बाईं ओर देवी सरस्वती विराजमान हैं।

कुछ भक्त सीढ़ी पर दीपक या मोमबत्ती जलाते हुए मां के दरबार तक पहुंचते हैं।

जिन भक्तों की मनोकामना देवी मां पूर्ण कर देती हैं, वे घुटनों के बल सीढ़ियां चढ़ते हुए मां के गर्भगृह तक पहुंचते हैं।

ऐसा करने वाले भक्तों की संख्या हजारों हो सकती है।

सीढ़ियां चढ़ते समय एक कोने में नीचे से ऊपर तक दीपक या मोमबत्ती की जलती धार दिखाई देती हैं।

भक्त जीवदानी माता को मिठाई, कंगन, सिंदूर और नारियल आदि चढ़ाते हैं।

रविवार का दिन जीवदानी माता का विशेष दिन माना जाता है।

जीवदानी माता के दर्शन-पूजन का महत्त्व

Virar Tourist Places: ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से जीवदानी माता के मंदिर में आता है, उसकी सभी मनोकामनाएं देवी मां पूरी करती हैं।

भक्तगण को सुख, शांति, समृद्धि और लंबी आयु का वरदान मिलता है।

संतान की प्राप्ति होती है। कर्ज से मुक्ति मिलती है।

सभी रुके हुए कार्य पूरे होते हैं।

भौतिक सुख के अलावा देवी मां मोक्ष का आशीर्वाद भी देती हैं।

पर्यटक के नजरिए से

Virar Tourist Places: इस मंदिर की सुंदरता की जितनी प्रशंसा की जाए, उतनी कम है।

पहाड़ी के शिखर पर बसे होने के कारण मंदिर की सुंदरता और अधिक बढ़ जाती है।

पहाड़ के शिखर यानी जीवदानी माता मंदिर के ऊपर और कई मंदिर स्थित हैं।

जिनमें श्री काल भैरव मंदिर, श्री महाकाली देवी मंदिर, मां बरोडा देवी मंदिर और श्री कामधेनु मंदिर शामिल हैं।

पहाड़ के ऊपर से विरार शहर का अनोखा रूप निहारा जा सकता है।

चारों ओर दिव्य नजारों का अनुभव किया जा सकता है।

एक तरफ विरार और नालासोपारा शहर का अद्भुत रूप दिखाई देता है।

दूसरी तरफ सुंदर पर्वतमाला की श्रृंखला दिखाई देती है।

Virar Tourist Places: तीसरी तरफ नदी और समुद्र की खाड़ी का अद्भुत मेल नजर आता है।

ठंडी और बरसात के दिनों में ये नजारे और भी अधिक मनमोहक हो उठते हैं।

वहीं गर्मी के मौसम में पहाड़ी के शिखर पर खड़े होकर ठंडी हवाओं के झोंकों के संग सुकून के गीत गुनगुनाए जा सकते हैं।

जीवदानी देवी मंदिर, विरार (Jivdani Devi Mandir Virar) के ऊपर ही एक खूबसूरत चिड़ियाघर है, जो बच्चों सहित अन्य सभी आयु के लोगों को लुभाता है।

इस चिड़ियाघर में तरह-तरह के पक्षियों के झुंड पाए जाते हैं।

जीवदानी माता के दिव्य दर्शन के साथ-साथ चिड़ियाघर का अद्भुत नजारा, मन मोहित कर लेता है।

आरती के समय पुजारियों के मंत्रोच्चारण की गूंज पहाड़ों से गूंजते हुए जब कानों में पड़ती है तो वह अनुभव बेहद खास होता है।

कैसे पड़ा माता का जीवदानी नाम?

जीवदानी देवी मंदिर, विरार (Jivdani Devi Mandir Virar) वैतरणा नदी के किनारे सतपुरा पहाड़ी क्षेत्र में बसा है।

वर्तमान समय में लोग इस मंदिर को जीवदानी माता के नाम से जानते हैं।

स्थानीय लोग जीवदानी मंदिर कहते हैं। जीवदानी का अर्थ होता है “जीवन देने वाली माता”।

Virar Tourist Places: जानकारों का कहना है कि पहले सतपुरा पहाड़ियों की श्रृंखला ‘जीवन देने वाली औषधियों’ का घर हुआ करती थीं।

इन औषधियों से गंभीर से गंभीर रोगों का इलाज होता था।

ये औषधियां लोगों के प्राण बचाती थीं।

इसी वजह से माता का नाम ‘जीवदानी’ पड़ा गया।

तब से लोग इन्हें जीवदानी माता कहने लगे।

यह परंपरा आज भी जारी है।

आरती का समय
प्रातः 05:30 बजे I दोपहर 12:00 बजे I शाम 07:30 बजे

जीवदानी देवी मंदिर कहां है?

Jivdani Devi Mandir Virar: मुंबई से करीब 70 किमी दूर विरार की सतपुरा पर्वतमाला पर माता जीवदानी का पवित्र एवं सुप्रसिद्ध प्राचीन मंदिर बसा है।

यह मंदिर महाराष्ट्र के पालघर जिले के वसई-विरार शहर महानगरपालिका के तहत आता है, विरार पूर्व में स्थित है।

वैतरणी नदी के किनारे पर्वतमालाओं के शिखर पर विराजमान माता जीवदानी मंदिर तक पहुंचने के लिए दर्शनार्थियों को लगभग 1350 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं।

भक्तों की सुविधा के लिए रोपवे की सुविधा मौजूद है।

200 रुपए के किराये में 10-15 मिनट में मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचा जा सकता है।

बिना एक भी सीढ़ी चढ़ें।

कैसा है अंदर मंदिर का आकार

Jivdani Devi Mandir Virar: सबसे ऊंचे पहाड़ की सबसे ऊंची चोटी पर स्थापित है माता जीवदानी का असाधारण मंदिर।

यानी वसई, नालासोपारा और विरार के दूर-दराज इलाकों से देवी माता के दर्शन किए जा सकते हैं।

इस मंदिर में कुल आठ फ्लोर हैं। शायद जीवदानी मां की दिव्य प्रतिमा सातवें फ्लोर पर स्थापित है।

देवी मां की प्रतिमा जिस पवित्र स्थान पर विराजमान है।

यानी उनके पीछे की दीवार पहाड़ का एक भाग है, जिस पर सोने की परत चढ़ाई गई है।

मंदिर का एक भाग जहां पहाड़ के बल पर टिका है।

वहीं तीन भाग हुनरमंद मानव द्वारा बनाए गए हैं, जिस पर सोने की परत चमकते हैं।

मां की मनमोहन मूरत

Jivdani Devi Mandir Virar: माता जीवदानी की सफेद संगमरमर की मूर्ति सुंदरता की मिसाल है।

मां की प्रतिमा को बहुत ही बारीक हाथों से तैयार किया गया है।

पूजा-दर्शन के दौरान देवी मां का हंसता हुआ चेहरा देखकर भक्त विभोर हो उठते हैं।

सारे कष्ट, जन्मों के दुःख, मानो कहीं गायब हो जाते हैं।

सिर पर सुशोभित मुकुट और कान से नाक तक चमकती नथिया, मां की मुस्कुराती मूर्ति पर जंचती है।

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जीवदानी देवी मंदिर कैसे पहुंचें?

विरार रेलवे स्टेशन (VR) से जीवदानी देवी मंदिर (Jivdani Devi Mandir) की दूरी लगभग 2 किमी है।

स्टेशन से शेयर ऑटो की सुविधा मौजूद है।

किराया 20 रुपए के करीब है।

विरार रेलवे स्टेशन मुंबई उपनगरीय रेलवे नेटवर्क की पश्चिमी लाइन पर स्थित है।

यह स्टेशन मुंबई लोकल ट्रेन से वेल-कनेक्टेड है।

एसी और नॉन-एसी ट्रेनों की सुविधा हर 2 से 5 मिनट के अंतराल पर उपलब्ध है।

गुजरात, मध्य प्रदेश, दिल्ली और कुछ उत्तर प्रदेश जाने-आने वाली एक्सप्रेस ट्रेनें विरार रेलवे स्टेशन के जरिए ही गुजरती हैं।

लेकिन, इन ट्रेनों के स्टॉपेज बोरीवली (BVI), अंधेरी (ADH), बांद्रा टर्मिनस (BDTS) और मुंबई सेंट्रल (BCT) रेलवे स्टेशन हैं।

इन स्टेशनों पर उतरकर लोकल ट्रेन द्वारा विरार रेलवे स्टेशन पहुंचा जा सकता है।

यह याद रहे! सुबह और शाम के समय विरार से मुंबई या मुंबई से विरार की यात्रा लोकल ट्रेन द्वारा करने से बचें।

क्योंकि, इस दौरान हर ट्रेन खचाखच भरी रहती है।

इन ट्रेनों में केवल वहीं लोग सफर कर सकते हैं, जिनका रेगुलर आना-जाना है।

इसके अलावा, बस, टैक्सी, ऑटो और निजी साधन द्वारा भी बड़े आराम से जीवदानी देवी मंदिर, विरार (Jivdani Devi Mandir Virar) बड़े आराम से पहुंचा जा सकता है।

सुबह और शाम के वक़्त मुंबई की ट्रैफिक समुद्र पार करने के समान है।

इसलिए, प्लान बनाते समय इस बात का भी ख्याल रखें।

सामान्य दिनों में विरार की यात्रा दो दिन में समाप्त की जा सकती है।

विरार-वसई में आप जीवदानी देवी मंदिर के अलावा तुंगारेश्वर शिव मंदिर, गणेशपुरी मंदिर और माता वज्रेश्वरी देवी मंदिर के दर्शन कर सकते हैं।

Virar Tourist Places: इसके अलावा, अरनाला बीच, राजोड़ी बीच, भुईगांव बीच, टकमक फोर्ट, वसई फोर्ट जैसे अन्य कई आकर्षण का आनंद उठाया जा सकता है।

फनिक्युलर से सफर हुआ आसान

Jivdani Devi Mandir Virar: फनिक्युलर की सुविधा शुरू होने से श्रद्धालुओं को काफी राहत की सांस मिली है।

यह सुविधा उन भक्तों के लिए किसी वरदान से कम नहीं, जिनके लिए लगभग 1400 सीढ़ी चढ़ना पॉसिबल नहीं था।

फनिक्युलर की सुविधा खास तौर पर बुजुर्गों, छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को खूब भा रहा है।

सीढ़ी द्वारा मंदिर पहुंचने में जहां 30 मिनट से एक घंटे का समय लगता है।

वहीं फनिक्युलर द्वारा लगभग 5-7 मिनट में मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।

फनिक्युलर के वेटिंग रूम में गणपति भगवान की एक विशाल मूर्ति विराजमान है।

जहां एलईडी पर माता जीवदानी के लाइव दर्शन होते रहते हैं।

कितना है फनिक्युलर का किराया?

Virar Tourist Places: फनिक्युलर का किराया 250 रुपए प्रति व्यक्ति है, जिसमें रिटर्न किराया शामिल है।

बच्चों का किराया भी 250 रुपए प्रति बच्चा है। बच्चे का किराया बच्चे की हाइट पर निर्भर है।

टिकट काउंटर के सामने वाली दीवार पर एक निशान बनाया गया है।

जिस बच्चे की लंबाई मार्क के ऊपर रहती है, उसे फनिक्युलर से यात्रा करने के लिए टिकट लेना अनिवार्य है।

जिसकी हाइट निशान से कम रहती है, उस बच्चों को टिकट लेने की जरूरत नहीं पड़ती है।

फनिक्युलर से सफर का अनुभव

Virar Tourist Places: फनिक्युलर में ड्राइवर केबिन सहित 5 फ्लोर है।

कुर्सियां स्टील की हैं, लेकिन काफी आरामदायक हैं।

फैन के अलावा खड़े होकर पकड़ने के लिए हैंडल की सुविधा है।

गेट ऑटोमेटिक क्लोज होता है।

जैसे-जैसे फनिक्युलर ऊपर की ओर बढ़ती है, शहर सिमटते हुए दिखाई देता है।

हरे-भरे पेड़ों के बीच जब फनिक्युलर पहाड़ पर चढ़ती है, धड़कन की रफ्तार मानो बढ़ जाती है।

मंदिर के ऊपर से शहर का जो अद्भुत नजारा दिखाई देता है, वह वाकई में बेहद दिलचस्प होता है।

रोमांचक नजारे और खुशनुमा ठंडी हवाएं यहां आपको साल के बारहों महीने और बारहों घंटे मिलेंगी।

ध्यान देने वाली बातें

जीवदानी देवी मंदिर, विरार (Jivdani Devi Mandir Virar) के दर्शन के लिए जब भी प्लान करें, तो इस बात का खास ख्याल रखें।

माता जीवदानी मंदिर हर दोपहर 2 से 3 यानी एक घंटे साफ-सफाई के लिए बंद रहता है।

आरती संपन्न होने के तुरंत बाद कुछ मिनट के लिए मां की प्रतिमा पर्दे से ढक दी जाती है।

साल के हर रविवार को हजारों भक्त माता जीवदानी के दर्शन करने आते हैं।

Virar Tourist Places: चैत्र और शारदीय नवरात्रि के नौ दिन भक्तों का तांता लगा रहता है।

सुबह 4 बजे से रात 10-11 बजे तक चारों ओर भक्त ही भक्त नजर आते हैं।

पहले यहां ‘पशु बलि प्रथा’ चलती थी, लेकिन अब मंदिर संस्थान द्वारा इसे बंद कर दी गई है।

होटल कहां लें?

Virar Tourist Places: यूं तो माता जीवदानी के दर्शन एक दिन में किए जा सकते हैं।

मतलब दिनभर में दर्शन करके अपने घर या मुंबई होटल लौटा जा सकता है।

पर ठहरने के लिहाज से विरार-वसई में कई बेहतरीन होटल मिल जाएंगे।

कई आलीशान होटल, रेस्टोरेंट और रिसोर्ट समुद्र के किनारे किफायती दाम में मिल जाएंगे।

श्री जीवदानी देवी मंदिर (Jivdani Devi Mandir Virar) से अर्नाला बीच की दूरी लगभग 11-12 किमी है।

जिसे बाइक, ऑटो, टैक्सी या निजी साधन द्वारा 30-35 मिनट में तय किया जा सकता है।

शहर की शोरगुल से दूर समुद्र की लहरों के बीच ठहरने का अपना अलग ही मजा है।

कब लगता है भव्य मेला

Virar Tourist Places: दशहरे के दिन श्री जीवदानी मंदिर के निकट भव्य मेला लगता है, जिसमें लाखों लोग शामिल होते हैं।

शारदीय नवरात्रोत्सव भी यहां बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।

इस दौरान कई धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।

नववर्ष के अवसर पर भी भक्तों की भीड़ उमड़ी रहती है।

भीड़ से बचने और देवी माता के दर्शन शांतिपूर्वक करने के लिए कोई उचित समय देखकर ही जाएं।

मंदिर के ऊपर पॉपकॉर्न, चाय और शौचालय आदि की व्यवस्था है।

इसी प्रकार मंदिर के नीचे कई खाने-पीने की दुकानें एवं शौचालय आदि की सुविधा है।

क्या खरीदें और क्या खाएं?

Jivdani Devi Mandir Virar: मंदिर के नीचे से ऊपर तक कई छोटी-बड़ी दुकानें हैं।

जहां फूल, नारियल, अगरबत्ती, चुनरी आदि जैसी पूजा की सामग्री खरीदी जा सकती है।

माता जीवदानी को 16 श्रृंगार भी अर्पित कर सकते हैं।

उन दुकानों से महिला और पुरुष संबंधी धार्मिक वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं।

जैसे कंगन, कड़ा, चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, इत्यादि।

श्री जीवदानी देवी संस्थान, विरार के काउंटर से 20 रुपए में नारियल प्रसाद खरीद सकते हैं।

प्रसाद काउंटर मंदिर के नीचे और ऊपर दोनों जगह मौजूद हैं।

नारळवाडी प्रसाद ही श्री जीवदानी देवी का असली प्रसाद है, जिसे मंदिर संस्था द्वारा तैयार किया जाता है।

और हां, माता रानी के दिव्य स्वरूप के भव्य दर्शन के बाद भंडारे में मां के अद्भुत प्रसाद का स्वाद अवश्य लेना।

यह भंडारा हर दिन मंदिर की सीढ़ी के पास मंदिर संस्थान द्वारा आयोजित किया जाता है।

20-30 रुपए में भर-पेट और स्वादिष्ट प्रसाद का आनंद उठाया जा सकता है।

कैसी है पार्किंग की सुविधा?

Jivdani Devi Mandir Virar: यूं तो श्री जीवदानी देवी मंदिर के चारों ओर घर ही घर हैं।

पर मंदिर के नीचे काफी स्पेस है।

दो पहिया हो या चार पहिया, यहां पार्किंग के लिए जगह ही जगह है।

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