Khet Suraksha Yojana 2023: किसानों के लिए राहत की सांस

Khet Suraksha Yojana 2023: योगी सरकार उत्तर प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत की सांस देने जा रही है। नील गाय, सुअर और अन्य आवारा पशुओं से फसलों की सुरक्षा के लिए ‘मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना’ की शुरुआत करने जा रही है।

मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना क्या है?

Khet Suraksha Yojana 2023: वर्तमान में उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए तीन सबसे बड़े सिर दर्द हैं।

आवारा पशु, नील गाय और सुअर! जितना किसान खराब मौसम से नहीं घबराता।

उससे ज़्यादा इन जानवरों से डरता है। फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले रोगों से लड़ना आसान है, पर उत्पात मचाने वाले पशुओं से नहीं।

नील गाय के झुंड जब किसी खेत में प्रवेश करते हैं। फिर खड़ी फसल बैठाकर ही बाहर निकलते हैं।

आवारा पशु तो खेत में अंकुर फूटते ही टूट पड़ते हैं। जंगली सुअर का कोई मुकाबला नहीं।

जितने ताक़तवर, उससे ज़्यादा बुद्धिमान हैं। ईंट की दीवार के नीचे से रास्ता बनाकर शिकार तक पहुंच जाते हैं।

नील गाय तो चारपाई के नीचे से मुंह मारकर चली जाती है। किसान सोया का सोया रहता है।

कैसे बदलेगा किसान का भाग्य?

Khet Suraksha Yojana 2023: उत्तर प्रदेश के मुंगरा बादशाहपुर विधानसभा के तहत कई गांव सई नदी से सटे हुए हैं।

विशेषकर उत्तर दिशा में स्थित बेलवार बाज़ार। यहां कोटिला, सर्वेमऊ और अचकारी के बीच वाला हिस्सा उबड़-खाबड़ है। इस पूरे क्षेत्र में सिर्फ़ कुशा का राज चलता है।

लंबाई-चौड़ाई सहित लगभग 10 किमी व कई हज़ार एकड़ पर। नदी, नालों, नहर, उबड़-खाबड़ भूमि की वजह से जंगली जानवर आसानी से छिपे रहते हैं।

स्थानीय लोग उस स्थान को ‘बंडाला’ नाम से पुकारते हैं। ठीक उसी जगह से सई नदी भी गुजरती है।

Khet Suraksha Yojana 2023: कुछ वर्ष पहले तक यहां के किसान खुशहाल थे। नील गाय का थोड़ा-बहुत खतरा रहता था। पर सुअर और आवारा जानवरों का प्रकोप नहीं था।

कुछ सालों में मवेशियों की संख्या बड़ी तेज़ी से बढ़ी है।

मौजूदा समय में बंडाला के आसपास वाले गांवों के किसानों की हालत खराब है।

जिन पशुपालकों की गाय दूध देना बंद कर देती है।

वो उसे बंडाला में चुपके से छोड़ आते हैं। सांड की बात ही छोड़िए। हर कहीं खुल्लम-खुल्ला घूम रहे हैं।

रात के वक़्त जंगली जानवर घर के दरवाज़े तक पहुंच जाते हैं।

खेत छोड़िए, द्वार पर लगे पेड़-पौधे भी खा जाते हैं।

इस इलाके में सिर्फ़ दो मौसम में खेती की जाती है। पहला बरसात और दूसरा ठंड। यानी खरीफ और रवि।

बरसात और ठंड की रात में फसलों की रखवाली कितनी सुरक्षित होगी?

आप ख़ुद अंदाजा लगा सकते हैं।

ऐसे में कई किसानों के ऊपर जंगली जानवरों के साथ विषैले जीव-जंतुओं के काटने का ख़तरा बना रहता है।

इसके बावजूद, हिम्मती किसान सिर पर कफन बांधकर, रातभर पशुओं को भगाने की कोशिश करते रहते हैं।

किसानों के सिर-दर्द बनें मवेशी

Khet Suraksha Yojana 2023: बढ़ते आवारा पशुओं और जंगली जानवरों के प्रकोप की वजह से यहां के किसान बहुत दुखी हैं।

यहां के खेतों से हरियाली जाने की कगार पर है।

क्षेत्र का ऐसा कोई हिस्सा नहीं, जहां इनका कब्ज़ा न हो। पशुओं के आक्रमण से हर किसान परेशान है।

मकई (मक्का), बाजरा, उड़द, चना, मटर, अरहर, आलू, गन्ना जैसी और कई फसलें यहां से विलुप्त हो चुकी हैं।

सब्जी की खेती यहां के किसानों के लिए एक सपना है। फल उत्पादन बहुत दूर की बात है।

जिन किसानों के पास मज़बूत पैसे हैं। उन्होंने कुछ हद तक खेतों का घेराव कर लिया है।

कुछ लोगों ने ख़ुद के खर्च से करंट के जुगाड़ कर लिए हैं।

जिन किसानों के पास सुरक्षा की व्यवस्था नहीं है।

उनके पास दो विकल्प बचे हैं। पहला रात-दिन जागकर रखवाली करना। दूसरा भगवान भरोसे छोड़ देना।

जो किसान रखवाली करते हैं, उन्हें थोड़ा-बहुत सरसों और गेहूं मिल जाता है। दू

सरे वाले को बीज बोने के बाद काटने की नौबत नहीं आती है।

सच्चाई अक्टूबर 2022 की है। सर्वेमऊ के एक किसान ने बंडाला से सटे अपने खेतों में सरसों के बीज बोए थे। क्योंकि गेहूं खेत से लौटकर आने की बिल्कुल भी गुंजाइश नहीं है।

उन्होंने बताया कि खेत की जुताई, बुवाई, भराई, कटाई आदि के बाद जब उन्हें अनाज मिला, तो चार-पांच हज़ार का घाटा लगा।

मेहनत और लागत दोनों पर पानी फिर गया।

आंखों देखा हाल, किसान बेहाल

Khet Suraksha Yojana 2023: इसी तरह एक किसान ने पिछले साल दिन-रात मेहनत करके बाजरे की फसल बचा ली थी।

फसल काफी अच्छी थी। पूरे क्षेत्र में एक मात्र बाजरे की फसल थी।

बाकी किसानों के खेत पानी खा रहे थे।

उनमें इतनी ताक़त नहीं थी। बरसात की रात लंबे कुशा वाले जंगल में एक पेड़ पर कुटी बनाकर रहना।

किसान के निडर साहस की बदौलत बाजरे की फसल आसमान छूने को तैयार थी।

हृष्ट-पुष्ट फसल और मोटे-मोटे अनाज देख, सबकी नज़र थम जाती थी। क्षेत्रवासी उनकी हिम्मत का लोहा मान रहे थे।

फसल जब पूरी तरह तैयार हो गई। किसान ने सोचा अब जानवरों से कोई ख़तरा नहीं।

वैसे भी कल से कटाई करनी ही है।

यही सोचकर उन्होंने उस रात खेत के पास न सोने का फैसला लिया। रात बीती, सुबह हुई।

किसान जब हंसिया लेकर फसल काटने पहुंचा, तो उसकी उम्मीदें पहले ही नष्ट हो चुकी थीं।

पांचों खेतों की फसलों को नील गायों ने निगल लिया था।

पछताने और सिर पीटने के अलावा उनके पास कुछ नहीं बचा था।

इस क्षेत्र के कई ऐसे किसान हैं, जो धीरे-धीरे किसानी करना बंद कर दिए हैं।

उनका कहना है कि जब लागत भी न निकले तो खेती करके क्या फ़ायदा?

उनकी बात भी एक तरह से सही है। खेती के प्रति कम होते रुझान की वजह से कई भूमि कई सालों से बंजर पड़ी है।

कुशा की जड़ दूर-दूर तक फैलती जा रही है।

इस तरह बंडाला का दायरा दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है और किसानों की खुशियां धीरे-धीरे कम हो रही है।

यही कारण है कि इस क्षेत्र के लोग पूरी तरह से शहर की कमाई पर निर्भर हो चुके हैं।

सबके के सब युवा परदेश में बस चुके हैं।

मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना के बारे में

Khet Suraksha Yojana 2023: मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना किसानों के लिए नई उम्मीद लाई है।

अगर इसका लाभ किसानों को सही से मिला, तो यह उनके लिए सबसे बड़ी सौगात होगी।

योगी-2.0 के नेतृत्व में शुरू होने वाली ‘मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना’ प्रदेश के किसानों के लिए मददगार साबित हो सकती है।

पहले यह योजना सिर्फ़ बुंदेलखंड के लिए शुरू होने वाली थी।

लेकिन, किसानों की ज़रूरतों को समझते हुए, उत्तर प्रदेश सरकार इसे पूरे प्रदेश में एक साथ लागू करने की तैयारी में है।

बुंदेलखंड के लिहाज से पहले योजना का प्रस्तावित बजट 75 करोड़ रुपए था।

पर अब इस योजना को प्रदेश स्तर पर लागू किया जा रहा है। इसलिए बजट बढ़ाकर 350 करोड़ रुपए कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना की विशेषता

Khet Suraksha Yojana 2023: मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना के तहत पशुओं से फसलों की सुरक्षा के लिए सोलर फेसिंग की व्यवस्था की जाएगी।

यानी किसान अपने खेतों को सौर करंट आधारित बाड़ से सुरक्षित कर सकेंगे।

सोलर फेसिंग बाड़ में सिर्फ़ बारह वोल्ट का करंट होगा। जिससे पशुओं को झटका लगेगा ज़रूर, पर उन्हें कोई नुकसान नहीं होगा।

सोलर फेसिंग बाड़ में सायरन की सुविधा होगी। जब कोई जानवर बाड़ को छुएगा।

तब झटके के साथ सायरन भी बजेगा।

योगी सरकार की यह नई तकनीक फसलों को आवारा पशुओं और जंगली जानवरों से बचाएगी।

उत्तर प्रदेश कृषि विभाग की ओर से योजना का ड्राफ्ट तैयार है।

जल्द ही मंजूरी के लिए कैबिनेट में भेजा जाएगा।

स्वीकृति मिलने के बाद मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना पूरे प्रदेश में लागू कर दी जाएगी।

मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना का मुख्य उद्देश्य
  • प्रदेश के सभी लघु एवं सीमांत किसानों को आत्मनिर्भर बनाना
  • आवारा पशुओं और जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा करना
  • खेतों के चारों ओर सोलर फेसिंग बाड़ लगाना
  • आकर्षक वित्तीय अनुदान के जरिए पात्र किसानों की मदद करना
  • हताश किसानों को किसानी के लिए प्रेरित करना
  • फसलों की सुरक्षा के जरिए उनकी खुशियां सुनिश्चित करना
उत्तर प्रदेश खेत सुरक्षा योजना के तहत सब्सिडी
  • उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के लघु एवं सीमांत किसानों को प्रति हेक्टेयर लागत पर 60% या 1.43 लाख रुपए का अनुदान देगी।
मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना के लिए पात्रता
  • उत्तर प्रदेश के समस्त लघु एवं सीमांत किसान।
  • लाभार्थी का बैंक खाता आधार से लिंक होना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना के लिए आवश्यक दस्तावेज

  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • आधार कार्ड
  • पैन कार्ड*
  • निवास प्रमाणपत्र
  • आय प्रमाणपत्र
  • जमीनी दस्तावेज
  • बैंक खाता
  • मोबाइल नंबर

CM Khet Suraksha Scheme Application Form Download Link

आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों होगी। आधिकारिक वेबसाइट की शुरुआत जल्द ही की जाएगी।

लिंक यहां उपलब्ध कराया जाएगा। जिस पर क्लिक करके आप मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना के लिए आवेदन फॉर्म को डाउनलोड कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना हेल्पलाइन नंबर

Khet Suraksha Yojana 2023: जल्द ही मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना हेल्पलाइन नंबर शुरू किए जाएंगे। जहां कॉल करके आवेदक योजना संबंधी हर जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

लॉन्च होने के बाद हेल्पलाइन नंबर यहां उपलब्ध करा दिया जाएगा।

यह भी पढ़े: https://gyanmanch.in/gobardhan-yojna-2023/

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