Maa Laxmi Puja Mantra: ऐसे करें पूजा, बरसेगी लक्ष्मी की कृपा

आइए जानें मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के प्रभावशाली पूजा मंत्र (Maa Laxmi Puja Mantra) l मां लक्ष्मी के 108 नाम l मां लक्ष्मी की बहन (Maa Laxmi Ki Bahan) देवी अलक्ष्मी कौन हैं? पढ़ें रहस्यमयी सुनी-अनसुनी कहानियां।

Maa Laxmi Puja Mantra: अगर मन में आस्था सच्ची है तो धन की देवी मां लक्ष्मी को आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है।

जैसा कि यह बात हर सनातनी को पता है कि देवी लक्ष्मी जी की पूजा-अर्चना से बड़े-बड़े आर्थिक संकट से मुक्ति पाई जा सकती है।

मां लक्ष्मी को धन की देवी कहा जाता है।

ज्योतिष गुरुओं का मानना है कि जो भक्त श्रद्धा-भाव से मां लक्ष्मी का स्मरण व पूजा-पाठ करता है, मां उसका कष्ट अवश्य हरती हैं।

मनोकामनाएं अवश्य पूरी करती हैंl

पर हां, पूजा में ईमानदारी होनी चाहिए! तो चलिए ज्ञान के इस सफर पर आगे बढ़ते हैं और मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के प्रभावशाली पूजा मंत्र (Maa Laxmi Puja Mantra) के बारे में जानते हैं l

क्या कहते हैं ज्ञानी बाबा? (Maa Laxmi Puja Mantra)

“करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान। रसरी आवत-जात ते सिल पर पड़त निशान॥”

भवार्थ: जिस प्रकार कुएं की जगत के पत्थर पर बार-बार रस्सी के आने-जाने की रगड़ से निशान बनते जाते हैं, उसी प्रकार निरंतर अभ्यास करते रहने से अल्पबुद्धि अथवा जड़मति भी बुद्धिमान बन जाता है।

आसान शब्दों में कहा जाए तो लगातार प्रैक्टिस करते रहने से कोई भी व्यक्ति हुनरमंद बन सकता है।

लगातार मेहनत के जरिए अपने लक्ष्य को अचीव और सपने को साकार कर सकता है।

धन कमाने और कामयाब बनने की सबसे पहली सीढ़ी है कठिन परिश्रम। उसके बाद नंबर आती है किस्मत की।

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इस संसार में जो व्यक्ति मेहनत करता है, नसीब भी उसी का साथ देता है।

लेकिन, जीवन में कई बार कठिन परिश्रम के बाद भी पैसों की बढ़ोतरी नहीं होती है।

आर्थिक तंगी के साथ-साथ मानसिक और शारीरिक कष्टों का सामना करना पड़ता है।

क्या कहते हैं बड़े-बुजुर्ग

समाज के बड़े-बूढ़ों और जानकारों का कहना है कि जब कठोर परिश्रम के बाद भी घर और जीवन में धन की कमी बनी रहती है तो ऐसे में बड़े विधि-विधान से प्रतिदिन माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करनी चाहिए।

माना जाता है कि देवी लक्ष्मी की पूजा के साथ मंत्रों (Maa Laxmi Puja Mantra) का उच्चारण करने से धन लाभ और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।

आर्थिक संकट दूर और धन का लाभ होता है। शुक्रवार का दिन देवी लक्ष्मी जी का दिन माना जाता है।

यानी शुक्रवार के दिन पूजा के साथ मंत्रों के जाप से धन, सुख, शांति, समृद्धि और सफलता की यात्रा आसान होती है।

आइए, सबसे पहले जानते हैं देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के सबसे प्रभावशाली मंत्र।

धन प्रदायिनी मां लक्ष्मी के मंत्र (Maa Laxmi Puja Mantra)

1. ‘ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद-प्रसीद। श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मी नमः॥’

अर्थ:
श्री महालक्ष्मी माता की जय हो। जो श्रीं ह्रीं श्रीं जैसे बीज मंत्रों से सहित और कमल पर विराजमान हैं।

जिन्हें स्मरण (याद) करने से सर्वगुण से परिपूर्ण ‘प्रसाद’ अर्थात आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।

धन, सुख-संपदा और ऐश्वर्य का वरदान देने वाली माता महालक्ष्मी को हम श्रद्धा पूर्वक प्रणाम करते हैं।

साथ ही आपसे यह विनती करते हैं कि आप हमें सफलता और संपन्नता से परिपूर्ण करें।

लाभ:
माना जाता है कि माता लक्ष्मी के इस मंत्र के जाप करने से कर्ज से मुक्ति मिलती है।

धन संबंधी परेशानियां और चिंताएं दूर होती हैं। जीवन में सुख और समृद्धि का स्थायी वास होता है।

इसे देवी लक्ष्मी जी का बीज मंत्र माना जाता है। इस मंत्र के जाप से धन और सुख-समृद्धि में बढ़ोतरी होती है।

कर्ज मुक्ति के लिए प्रभावी मंत्र (Maa Laxmi Puja Mantra)

2. ‘ऊँ ह्रीं श्री क्रीं क्लीं श्री लक्ष्मी मम गृहे धन पूरये, धन पूरये, चिंताएं दूरये-दूरये स्वाहा:।।’

लाभ: माना जाता है कि इस मंत्र के जाप करने से आर्थिक तंगी से आज़ादी मिलती है।

इस मंत्र का उपयोग कर्ज मुक्ति से छुटकारा पाने के लिए किया जाता है।

कर्ज के बोझ से दबे व्यक्ति के लिए इस मंत्र का जाप करना बेहद शुभ माना जाता है।

इस जाप से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और उनकी कृपा सदा बनी रहती है।

3. ‘ऊँ श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।।’

लाभ: कहते हैं कि मां लक्ष्मी के इस महामंत्र के जाप से धन, ऐश्वर्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

शुक्रवार के दिन 108 बार लगातार ध्यानपूर्वक जाप करने से सुख-समृद्धि और धन स्थायी रूप से जीवन में बना रहता है।

इस मंत्र का जाप करते समय ‘तिल’ तेल का दिया जलाना विशेष लाभकारी माना जाता है।

धनवान बनने के लिए मंत्र (Maa Laxmi Puja Mantra)

4. ‘ऊँ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा।।

लाभ: पूजा-अर्चना के दौरान इस मंत्र का जाप करने से धन की देवी मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

अपने भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।

यह मंत्र धन के साथ-साथ सभी प्रकार के सुख और ऐश्वर्य का लाभ देता है।

जो व्यक्ति दीपावली की पूरी रात इस मंत्र (Mantra) का जाप करता है, उस पर देवी की कृपादृष्टि सदा बनी रहती है।

इस मंत्र Mantra) का जाप करते समय हवन में आम की लकड़ी, घी, शकर, कमलगट्टे और 108 बेलपत्र शामिल करें।

5. ‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम:।।’

लाभ: जानकारों का मानना है कि इस मंत्र के जाप से जीवन में सफलता के सभी मार्ग खुल जाते हैं।

कहते हैं कि अगर किसी कार्य में सफलता नहीं मिल रही है तो मां वैभव लक्ष्मी के इस मंत्र (Maa Laxmi Puja Mantra) का 108 बार जाप करना चाहिए।

इस मंत्र (Mantra)का जाप करने से व्यक्ति की मनोकामना अवश्य पूरी होती है।

6. ‘ॐ लक्ष्मी नारायण नमो नमः।।

लाभ: सुखी दांपत्य के लिए इस मंत्र का जाप करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

इसी प्रकार मां लक्ष्मी के 12 नामों का जाप करने से शुभफल की प्राप्ति होती है।

अनुभवी लोगों का मानना है कि इनका जाप करने से धन, वैभव और यश की प्राप्ति होती है।

आइए जानें मां लक्ष्मी के 12 नाम (Maa Laxmi Puja Mantra)

आइए अब जानते हैं मां लक्ष्मी के 108 नाम, जिन्हें जपने मात्र से सुख-समृद्धि का अशीर्वाद मिलता है।

मां लक्ष्मी के 108 नाम का महत्त्व

Maa Laxmi Puja Mantra: प्रतिदिन धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने से सभी मनोकामानाएं पूरी होती हैं।

माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए रोजाना मां के 108 नाम (Naam) का जप करना चाहिए।

देवी लक्ष्मी के 108 नाम जपने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।

धन लाभ के साथ आर्थिक संकट से मुक्ति मिलती है।

धार्मिक मान्यता है कि हर शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में कभी धन की कमी नहीं होती है।

आय और सौभाग्य में अपार वृद्धि होती है। दुख-दरिद्रता हमेशा के लिए दूर हो जाती है।

अगर आप भी धन की देवी मां लक्ष्मी की कृपा पाना चाहते हैं तो हर शुक्रवार के दिन पूजा के समय मां लक्ष्मी के 108 नाम का जाप अवश्य करें।

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मां लक्ष्मी के 108 नाम

मां लक्ष्मी के 108 नाम के बाद आइए जानते हैं कि मां लक्ष्मी के प्रकट होनी की दिलचस्प गाथा।

इसके बाद हम जानेंगे मां लक्ष्मी की बहन (Maa Laxmi Ki Bahan) देवी अलक्ष्मी कौन हैं?

देवी लक्ष्मी की उत्पत्ति?

शास्त्रों के अनुसार मां लक्ष्मी को धनलक्ष्मी, वरलक्ष्मी और महालक्ष्मी जैसे कई नामों से जाना जाता है।

चंचल स्वभाव होने की वजह से इन्हें चंचला भी कहा जाता है।

देवी लक्ष्मी एक स्थान पर कभी अधिक समय तक नहीं ठहरती हैं।

मां लक्ष्मी को धन की देवी के रूप में पूजा जाता है।

इनकी पूजा करने वाले जातक को धन, वैभव और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

यह बात तो सभी जानते हैं कि जिस व्यक्ति पर मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है, उसे कभी पैसों की किल्लत और भौतिक सुख की कमी महसूस नहीं होती है।

यही वजह है कि हर व्यक्ति मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए तरह-तरह के उपाय अपनाता है।

ज्योतिष शास्त्र में ऐसे कुछ उपायों के बारे में बताया गया है, जिन्हें करने से मां लक्ष्मी जल्द प्रसन्न हो जाती हैं।

समुद्र मंथन के दौरान माता लक्ष्मी के साथ-साथ शंख की उत्पत्ति भी सागर से हुई थी।

शंख उन 14 रत्नों में से एक था, जो समुद्र मंथन के दौरान निकले थे।

इसी वजह से देवी लक्ष्मी और दक्षिणावर्ती शंख दोनों भाई-बहन माने जाते हैं।

शास्त्रों के अनुसार शंख को माता लक्ष्मी का छोटा भाई कहा जाता है।

सनातन धर्म में शंख की बहुत बड़ी अहमियत है।

कहते हैं कि शंख में कई देवी-देवता वास करते हैं।

शंख भगवान श्री हरि विष्णु का सबसे प्रमुख और प्रिय अस्त्र है।

घर के मंदिर में एक शंख रखना बेहद शुभ माना जाता है।

आइए अब जानते हैं कि मां लक्ष्मी की बहन (Maa Laxmi Ki Bahan) देवी अलक्ष्मी कौन हैं?

क्यों इनके बारे में जानना बहुत जरूरी है?

देवी अलक्ष्मी कौन हैं?

Maa Laxmi Ki Bahan: मां लक्ष्मी के बारे में पूरा संसार जानता है, पर उनकी बहन के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।

देवी लक्ष्मी की तरह उनकी एक बड़ी बहन भी हैं, जिन्हें देवी अलक्ष्मी के नाम से जाना जाता है।

मां लक्ष्मी को जहां धन की देवी माना जाता है।

वहीं देवी अलक्ष्मी को गरीबी और दरिद्रता की देवी कहा जाता है।

शास्त्रों में देवी अलक्ष्मी को दुर्भाग्य की देवी कहा गया है।

यही वजह है कि इनकी तस्वीर किसी घर या मंदिर में नहीं मिलती है।

श्रीमद् भागवत महापुराण में देवी अलक्ष्मी का जिक्र किया गया है।

जहां इन्हें देवी लक्ष्मी की बड़ी बहन कहा गया है।

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मान्यता के अनुसार जिस जगह देवी अलक्ष्मी वास करती हैं, वहां अशुभ घटनाओं का वास होता है।

आलस, पाप, गरीबी, दुख-दरिद्रता और बीमारियां हमेशा घेरे रहती हैं।

इसी कारण से इन्हें ‘दुर्भाग्य की देवी अलक्ष्मी कहा जाता है।

देवी अलक्ष्मी कौन हैं? इस सवाल के जवाब के लिए आपको यह लेख पूरा पढ़ना चाहिए।

कैसे हुआ देवी अलक्ष्मी का जन्म?

Maa Laxmi Ki Bahan: Quora.com के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान 14 रत्नों के साथ देवी अलक्ष्मी की भी उत्पत्ति हुई थी।

समुद्र से निकलने के बाद मां लक्ष्मी ने जहां भगवान श्री विष्णु को अपने पति के रूप में चुना।

वहीं देवी अलक्ष्मी ने आसुरी शक्तियों की ओर रुख किया।

राक्षसी शक्तियों को चुनने की वजह से उनकी गिनती 14 रत्नों में नहीं की जाती है।

इसलिए इन्हें ‘दुर्भाग्य की देवी‘ माना गया है।

देवी अलक्ष्मी को दरिद्रा या ज्येष्ठा के नाम से भी जाना जाता है।

देवी अलक्ष्मी और मां लक्ष्मी में कौन बड़ी?

Maa Laxmi Ki Bahan: पौराणिक कथाओं के अनुसार मां लक्ष्मी और देवी अलक्ष्मी की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी।

देवी अलक्ष्मी, मां लक्ष्मी से पहले प्रकट हुई थीं, इसलिए देवी अलक्ष्मी को बड़ी बहन माना जाता है।

कुछ जानकारों का मानना है कि देवी अलक्ष्मी अपने साथ समुद्र से मदिरा लेकर निकली थीं।

जिसे भगवान श्री हरि विष्णु की अनुमति से राक्षसों के हवाले कर दिया गया था।

देवी अलक्ष्मी का निवास?

Maa Laxmi Ki Bahan: पुराणों, ग्रंथों और कथाओं में कहा गया है कि जिस घर या स्थान पर गंदगी, कलह-क्लेश, झगड़ा-झंझट, दरिद्रता, पाप, अधर्म और आलस का वास होता है, वहां देवी अलक्ष्मी निवास करती हैं।

यदि मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना के बाद भी घर में धन हानि और कलह-क्लेश बना रहता है, तो समझ जाइए ऐसे घरों में देवी अलक्ष्मी का निवास है।

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देवी अलक्ष्मी बने काम को बिगाड़ देती हैं। धन की बढ़ोतरी नहीं होने देती हैं। कर्ज दिया पैसा जल्द वापस नहीं आने देती हैं।

जिस घर में गंदगी रहती है और उसमें रहने वाले लोग हर समय लड़ाई-झगड़ा करते रहते हैं, वहां देवी अलक्ष्मी का वास होता है।

देवी अलक्ष्मी से बचने के उपाय
क्र.सं.विधि
1अपने घर, दुकान और आसपास पूरी स्वच्छता रखें। स्वच्छता जितनी ज़्यादा होगी, मां लक्ष्मी प्रसन्न होंगी और देवी अलक्ष्मी दूर जाएंगी।
2घर के दरवाजे और दुकान के बाहर नींबू-मिर्ची टांगे, जिससे देवी अलक्ष्मी को अंदर दाखिल होने से रोका जा सके।
3घर या दुकान में पीपल का पेड़ न उगने पाए। यदि घर में पीपल का पेड़ उग आए तो उसे तोड़ने या जलाने की बजाए पूरे विधि-विधान से दूसरी जगह पर लगाएं। याद रहे! पेड़ दूसरी जगह लगाने के पहले 45 दिनों तक उसकी पूजा-अर्चना अवश्य करें। पेड़ पर रोजाना कच्‍चा दूध चढ़ाएं और फिर जड़ सहित निकालकर किसी दूसरे स्‍थान पर रोपण कर दें।
4दुकान, ऑफिस या घर में मां लक्ष्मी की खंडित मूर्ति नहीं रखनी चाहिए। अगर ऐसी मूर्ति या तस्वीर घर में मौजूद है तो उसे तुरंत नदी या समुद्र आदि में विसर्जित कर दें।
5कहते हैं कि उल्लू पर विराजमान मां लक्ष्मी की तस्वीर नहीं रखनी चाहिए।
6देवी लक्ष्मी की खड़ी प्रतिमा घर में नहीं रखनी चाहिए। घर, ऑफिस और दुकान में मां लक्ष्मी की ऐसी मूर्ति स्थापित करें, जिसमें माता रानी कमल के फूल पर विराजमान हों और धन की बरसा कर रही हों।
7पुण्य कर्म करें। मांसाहार, मदिरापान, जुआ-सट्टेबाजी आदि जैसे बुरे कार्यों से दूर रहें। ऐसा करने पर मां लक्ष्मी का स्थाई वास होगा।
8घर-परिवार में एकता बनाए रखें। परिवार के प्रत्येक सदस्य के प्रति प्रेम-भावना रखें। घर और स्टॉफ की महिलाओं का सम्मान करें। क्योंकि, यह पुरानी कहावत है – “स्वच्छता और खुशहाली जहां, धन की देवी लक्ष्मी का वास वहां।”
देवी अलक्ष्मी कौन हैं उनके गुण

Maa Laxmi Ki Bahan: मनुष्य के पास जब लक्ष्मी जी आती हैं, तब अपने साथ दुर्गुण भी ले आती हैं।

इंसान की मति भ्रष्ट करने के लिए।

यहां दुर्गुण का मतलब अलक्ष्मी का स्वरूप है।

यानी जितनी तेजी से अकूत धन आता है, उतनी ही स्पीड से उसका दुरुपयोग करने वाले गुण भी आते हैं।

सबसे पहले इंसान को घमंड का बादल चारों ओर से घेर लेता है।

उसे अच्छाई-बुराई कुछ दिखाई नहीं देती है।

बड़ों का अपमान करता है और महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाता है।

जुआ, शराब, आदि जैसे कार्यों में बेफिजूल पैसे उड़ाता है।

उम्मीद है कि आपको इस सवाल का जवाब मिल गया होगा कि देवी अलक्ष्मी कौन हैं?

आइए अब जानते हैं कि दोनों बहनों में क्या अंतर है?

देवी अलक्ष्मी और मां लक्ष्मी में अंतर

Maa Laxmi Ki Bahan: जिस कार्य से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

ठीक उसके विपरित कार्य करने से देवी अलक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

इस प्रकार जहां दुर्गुण होता है, वहां देवी अलक्ष्मी वास करती हैं।

जहां सद्‌गुण निवास करता है, वहां मां लक्ष्मी विराजती हैं।

मां लक्ष्मी की बहन (Maa Laxmi Ki Bahan) देवी अलक्ष्मी कौन हैं?

यह जानने के बाद आइए जानें कि कैसे अपने कीमती धन को बचाया जाए?

कैसे गरीबी से दूर रहा जाए? देवी अलक्ष्मी से बचा जाए?

स्थिर धन के उपाय

Maa Laxmi Puja Mantra: यदि आप स्थिर धन की कामना रखते हैं तो मां लक्ष्मी के साथ भगवान श्री विष्णु का पूजन करें।

श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करें। उसमें बताई गई प्रत्येक बात का गहन से विचार करें।

मां लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से सद्बुद्धि की प्राप्ति होती है।

बुद्धि बढ़ने से धन आने और धनवान बनने का अहंकार नहीं होता है।

सरल, सहज और सात्विक बने रहने के गुण आते हैं।

छोटा हो या बड़ा, सबका सम्मान करें।

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अपने कटु वचन से किसी का दिल न दुखाएं। जीवों पर दया करें।

जरूरतमंदों की मदद करें और सही जगह दान करें।

इससे खुद को खुशी तो मिलेगी ही, साथ ही देवी लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं।

पुण्य कर्म करें। मांसाहार, मदिरापान, जुआ-सट्टेबाजी आदि जैसे बुरे कार्यों से दूर रहें।

ऐसा करने पर मां लक्ष्मी का स्थाई वास होगा। देवी लक्ष्मी का वास मतलब धन की वर्षा!

मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के उपाय

Maa Laxmi Puja Mantra: यदि आप मां लक्ष्मी को प्रसन्न करना चाहते हैं तो ज्योतिषशास्त्र में बताए गए कुछ उपायों को अपना सकते हैं।

धन की देवी मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए ये उपाय बहुत ही कारगर माने गए हैं।

आइए जानते हैं इन उपायों के बारे में।

शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी के मंदिर में शंख, कौड़ी, कमल का फूल, मखाना, बताशा, खीर और गुलाब का इत्र चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है।

ज्योतिष का मानना है कि ऊपर बताई गई वस्तुओं को अर्पित करने से मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न होती हैं।

जब धन की देवी प्रसन्न होंगी तो घर में कभी पैसों की कमी नहीं होगी।

शुक्रवार के दिन काली चींटियों को चीनी खिलाएं। इससे काम में आ रहे हर अवरोध से छुटकारा मिलता है।

कुछ शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा के साथ श्रीयंत्र की पूजा और श्री सूक्त का पाठ करें।

मां लक्ष्मी को कमल का फूल अति प्रिय है। इसलिए शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी के श्री चरणों में कमल का फूल अवश्य अर्पित करें।

वैवाहिक जीवन में अगर तकरार चल रही है तो शुक्रवार के दिन बेडरूम में प्रेमी पक्षी की तस्वीर लगाएं।

सनातन धर्म में हर शुक्रवार के दिन धन की देवी मां लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर देव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है।

ज्ञान मंच के इस लेख में आपने जाना – मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के प्रभावशाली पूजा मंत्र (Maa Laxmi Puja Mantra) l मां लक्ष्मी के 108 नाम l मां लक्ष्मी की बहन (Maa Laxmi Ki Bahan) देवी अलक्ष्मी कौन हैं?।

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