Mahashivratri 2024: महादेव की महागाथा!

Mahashivratri 2024: महाशिवरात्रि का पावन त्योहार करीब आ रहा है। क्या आपको पता है कि हर साल महाशिवरात्रि का पर्व पूरे देश में बड़े धूमधाम से क्यों मनाया जाता है? चलिए जानते हैं कि महाशिवरात्रि क्यों मनाते हैं? महाशिवरात्रि 2024 की तिथि और पूजा का समय क्या है? महाशिवरात्रि पर देशभर में आयोजित होने वाले कार्यक्रम?

यह लेख लिखने से पहले मैंने कई लोगों से यह जानने की कोशिश की कि महाशिवरात्रि क्यों मनाते हैं?

उनमें से लगभग नब्बे फीसदी लोगों ने कहा कि महाशिवरात्रि के शुभ दिन पर भगवान शिव का माता पार्वती के संग विवाह हुआ था।

भक्तों द्वारा बताई गई जानकारी के अनुसार, शिव-शक्ति के विवाह के उपलक्ष्य में हर साल महाशिवरात्रि का पर्व बड़े हर्सोल्लास के साथ मनाया जाता है।

फिर मैंने गूगल से पूछा कि महाशिवरात्रि क्यों मनाते हैं?

अपनी खोज के दौरान सबसे पहले मैंने यह जाना कि महाशिवरात्रि का महोत्सव सिर्फ़ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में मनाया जाता है।

यह बेहद चौकाने वाली बात है कि महादेव के अनंत भक्त दुनियाभर में मौजूद हैं।

महाशिवरात्रि क्यों मनाते हैं?

Mahashivratri 2024: अपने रिसर्च के दौरान मैंने यह जाना कि महाशिवरात्रि इन तीन वजहों से मनाई जाती है:

1. शिव-शक्ति विवाह

पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि मनाने की सबसे पहली वजह माता पार्वती और भगवान शिव के विवाह का उत्सव माना जाता है।

कहा जाता है कि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को ही माता पार्वती और भगवान शिव विवाह के शुभ बंधन में बंधे थे।

भगवान शिव और माता पार्वती के महामिलन के इस उत्सव को सदियों से मनाया जा रहा है।

कहते हैं कि महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर शिव-शक्ति की पूजा व व्रत करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं। मनपसंद हमसफ़र की प्राप्ति होती है।

महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की शादी की सालगिरह होने की वजह से इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

इस दिव्य दिन देवों के देव महादेव की पूजा करने से वे बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं और भक्तों को मनवांछित फल का वरदान देते हैं।

शिव-पार्वती विवाह के प्रतीक के रूप में महाशिवरात्रि सबसे अधिक प्रचलित है।

यही वजह है कि महाशिवरात्रि की रात्रि को कई जगहों से ‘शिव बारात’ निकाली जाती है।

2. शिवलिंग स्वरूप में हुए थे महादेव प्रकट

पौराणिक मान्यताएं और कथाएं कहती हैं कि महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर ही भगवान शिव जी ‘शिवलिंग स्वरूप’ में प्रकट हुए थे।

यानी यह कहा जा सकता है कि महाशिवरात्रि भगवान महादेव के ‘शिवलिंग स्वरूप के जन्मदिवस’ का महापर्व है।

कहते हैं कि महाशिवरात्रि के दिन ही पहली बार जब महादेव ने अपने भव्य ‘शिवलिंग स्वरूप’ में दिव्य दर्शन दिए थे, तब सर्वप्रथम भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु ने उनकी विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की थी।

तभी से शिवलिंग पूजा और महाशिवरात्रि मनाने की प्रथा शुरू हुई।

यही कारण है कि महाशिवरात्रि के पर्व पर शिवलिंग की पूजा बड़ी श्रद्धा भावना के साथ की जाती है।

3. महादेव ने किया था विषपान

कहा जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान जब प्रचंड ‘हलाहल’ विष निकला, तो देवता और असुर ही नहीं, बल्कि समस्त सृष्टि विनाश के भय से कांप उठी थी।

लेकिन, महादेव तो देवों के देव और आदिगुरू हैं। कालों के काल महाकाल हैं! उन्हें किसका डर?

समस्त ग्रंथ यह कहते हैं कि संसार की भलाई के लिए भगवान शिव ने कई बलिदान दिए हैं।

सागर मंथन से निकले ‘हलाहल’ विष को पीकर भगवान शिव ने इस सृष्टि की रक्षा की थी।

विषपान की वजह से भगवान शिव का कंठ नीला पड़ गया था, जिस कारण उनको ‘नीलकंठ’ कहा जाने लगा।

अपने प्राणों को संकट में डालकर संसार की रक्षा करने के उपलक्ष्य में हर साल ‘महाशिवरात्रि’ का महोत्सव मनाया जाता है।

लोगों के मत अलग-अलग भले हो सकते हैं, लेकिन जो हर जगह विद्यमान हैं, वो शिव हैं।

तभी तो कहा जाता है कि शिव ही सत्य, शिव ही सुंदर, शिव ही सब गुण आगर हैं।

महाशिवरात्रि 2024 की तिथि और पूजा का समय:

इस साल महाशिवरात्रि का पावन त्योहार 8 मार्च, 2024 को मनाया जाएगा।

चलिए, जानते हैं महाशिवरात्रि 2024 की तिथि और शुभ मुहूर्त के बारे में।

जैसा कि आप सभी जानते ही हैं कि महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर भगवान शिव जी की चार प्रहर में पूजा की जाती है।

Mahashivratri 2024: महाशिवरात्रि 2024 की तिथि और पूजा का समय नीचे दिया गया है।

  • फाल्गुन मास 2024 चतुर्दशी तिथि का आरंभ: 8 मार्च, 2024 को रात्रि 9:57 बजे से
  • चतुर्दशी तिथि की समाप्ति: 9 मार्च, 2024 को शाम 6:17 बजे
  • महाशिवरात्रि 2024 पर प्रथम प्रहर की पूजा: 8 मार्च, 2024 को शाम 6:25 बजे से रात्रि 9:28 बजे तक
  • दूसरे प्रहर की पूजा: 8 मार्च, 2024 को रात्रि 9:28 बजे से 9 मार्च, 2024 को रात्रि 12:31 बजे तक
  • तीसरे प्रहर की पूजा: 9 मार्च, 2024 को रात्रि 12:31 बजे से सुबह 3:34 बजे तक
  • चौथे प्रहर की पूजा: 9 मार्च, 2024 को प्रातः 3:34 बजे से सुबह 6:37 बजे तक

महाशिवरात्रि 2024 की तिथि नोट करने के बाद, चलिए अब जानते हैं कि महाशिवरात्रि के अवसर पर पूजा और उपवास करने से किस लाभ की प्राप्ति होती है।

महाशिवरात्रि पर पूजा-व्रत का महत्व

Mahashivratri 2024: यूं तो हर दिन भगवान शिव जी की पूजा करने वालों को सुख, शांति, समृद्धि, सफलता और संतान की प्राप्ति होती है।

पर कहते हैं कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा-व्रत करने से अति-विशेष फल की प्राप्ति होती है।

पूरे दिन उपवास करने और शिव पूजा में भाग लेने वालों को मनचाहा जीवनसाथी का वरदान मिलता है।

शिवलिंग पर जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से सभी प्रकार के सुख और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

महाशिवरात्रि की पूजा-विधि

महादेव की पूजा-विधि शायद आप मुझसे बेहतर जानते होंगे।

फिर भी जो मुझे पता चला है, आपके साथ शेयर कर रहा हूं।

कहते हैं कि सुहाने मौसम यानी फाल्गुन माह में पड़ने वाली ‘महाशिवरात्रि’ सबसे विशेष और मनोकामना पूर्ण करने वाली शिवमय-रात्रि होती है।

महाशिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले मन में पूजा-व्रत करने का संकल्प लेना चाहिए और महादेव से सफलतापूर्वक व्रत पूर्ण करने की विनती करनी चाहिए।

स्नान और घर पर मौजूद भगवान की पूजा-अर्चना करने के बाद अपने नजदीक स्थित शिव मंदिर जाएं।

मन में भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान या ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हुए शिवलिंग पर जलाभिषेक करें।

भगवान शिव को दूध, दही, शहद, घी, गंगाजल, अक्षत, सुपारी, पान, फल, भांग-धतूरा आदि प्रेमपूर्वक अर्पित करें।

पूजा-व्रत करते समय ध्यान रहे कि तन, मन और विचारों से कोई अपराध न होने पाए।

शिव की आरती यहां पढ़ें: https://gyanmanch.in/shiv-aarti-hindi-mein

महाशिवरात्रि पर देशभर में आयोजित होने वाले कार्यक्रम

Mahashivratri 2024: महाशिवरात्रि के पर्व पर यदि आप दिव्य और भव्य अनुभव करना चाहते हैं, तो यह लेख आपकी मदद कर सकता है।

महाशिवरात्रि के अवसर पर देशभर में भगवान शिव से संबंधित अनेकों कार्यक्रम बहुत बड़े स्तर पर आयोजित किए जाते हैं।

उन उत्सवों में शामिल होकर कभी न मिलने वाले आनंद की अनुभूति की जा सकती है।

कुछ प्रमुख कार्यक्रमों की सूची नीचे दी गई है:

1. श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश

Mahashivratri 2024: महादेव के सबसे पसंदीदा निवास स्थान की बात करें, तो वाराणसी उनमें से एक है।

पतित पावनी मां गंगा के तट पर स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित सबसे सुप्रसिद्ध मंदिर है।

जिसकी महिमा और गरीमा विश्वभर में विख्यात है।

उत्तर प्रदेश के पवित्र देवभूमि वाराणसी में स्थित यह दिव्य मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है।

कहा जाता है कि यह मंदिर भगवान शिव और माता पार्वती का आदि स्थान है।

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर वाराणसी के सभी शिव मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है।

भगवान शिव की भव्य और दिव्य बारात निकाली जाती है।

अगर देवों के देव महादेव की दिव्य बारात का अलौकिक अनुभव करना चाहते हैं, तो महाशिवरात्रि के अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी अवश्य जाएं।

2. श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन, मध्य प्रदेश

Mahashivratri 2024: उज्जयिनी के श्री महाकालेश्वर भारत में बारह प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं।

श्री महाकालेश्वर मंदिर की अद्भुत महिमा से पूरी दुनिया परिचित है।

बड़ी-बड़ी हस्तियों को श्री महाकाल के दरबार में माथा टेकते देखा जा सकता है।

मध्य प्रदेश के श्री महाकाल की नगरी उज्जैन में महाशिवरात्रि का पर्व बड़े अनोखे तरीके से मनाया जाता है।

इस दौरान ‘शिवलिंग’ पर चंदन-भांग और जलाधारी पर हल्दी अर्पित की जाती है।

माता पार्वती का मेहंदी श्रृंगार और दूल्‍हा बनें भगवान श्री महाकाल का अद्भुत स्वरूप देखते ही बनता है।

भगवान शिव और माता पार्वती का ‘विवाहोत्‍सव’ यहां भव्य रूप से मनाया जाता है।

उज्जैन के क्षिप्रा नदी के तट पर ‘शिव ज्योति अर्पणम’ अर्थात दीप प्रज्ज्वलन का भव्य आयोजन किया जाता है।

पिछली महाशिवरात्रि के अवसर पर ‘शिव ज्योति अर्पणम-2023’ कार्यक्रम के तहत लगभग 19 लाख मिट्टी के दीये एक साथ भगवान श्री महाकाल को अर्पित किए गए थे।

3. श्री सोमनाथ मंदिर, गिर सोमनाथ, गुजरात

Mahashivratri 2024: प्रथम ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ मंदिर में विराजमान महादेव के दर्शन से हर इच्छा पूरी होती है।

महाशिवरात्रि का पावन त्योहार यहां बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है।

भगवान श्री सोमनाथ का सुगंधित पुष्पों से अलग-अलग विशेष श्रृंगार और रात्रि के समय इत्र पूजन किया जाता है।

श्री सोमनाथ मंदिर में चार प्रहार की विशेष पूजा-आरती की जाती है।

महामृत्युंजय यज्ञ, पालखी यात्रा, पार्थेश्वर महापूजन, ध्वजारोहण, पाद्य पूजन, शोभायात्रा जैसे कई भव्य कार्यक्रमों के आयोजन के साथ पूरा वातावरण शिवमय हो जाता है।

श्री सोमनाथ मंदिर में श्रद्धालु प्रसाद, यज्ञ-किट, सोमगंगा और गंगाजल अभिषेक का आनंद उठा सकते हैं।

महाशिवरात्रि-2023 के अवसर पर, श्री सोमनाथ मंदिर भक्तों के दर्शन के लिए 42 घंटों तक लगातार खुला था।

उस दौरान भगवान श्री सोमनाथ का अजमेर, पुष्कर व जोधपुर के सुगंधित पुष्पों से अलग-अलग विशेष श्रृंगार किया गया था।

4. श्री बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर, झारखंड

Mahashivratri 2024: द्वादश ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान भगवान श्री बाबा बैद्यनाथ को कौन नहीं जानता?

झारखंड के देवघर में स्थित श्री बाबा बैद्यनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं का बारह महीने तांता लगा रहता है।

लेकिन, महाशिवरात्रि के समय यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है।

दुनियाभर के भक्त अपने प्रिय आराध्यदेव के दर्शन और पूजा के लिए सब काम छोड़कर पहुंचते हैं।

महाशिवरात्रि के दिन बाबा मंदिर में चार प्रहर की विशेष पूजा की जाती है।

पूजा-अर्चना और जलार्पण का सिलसला दिन-रात चलता है।

शाम की पावन बेला में भगवान श्री शिव जी की भव्य बारात निकाली जाती है।

महाशिवरात्रि पर देवघर में भगवान शिव और माता पार्वती के शुभ विवाह के अनगिनत लोग साक्षी बनते हैं।

मान्यताओं के अनुसार, बाबा मंदिर के गुंबद पर पंचशूल, पगड़ी, ध्वजा आदि चढ़ाई जाती है।

इस आर्टिकल में आपने जाना कि महाशिवरात्रि क्यों मनाते हैं?

महाशिवरात्रि 2024 की तिथि एवं पूजा का समय क्या है?

महाशिवरात्रि के अवसर पर कहां जाएं?

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