Prayag Magh Mela 2024: ट्रिप रहेगी हमेशा याद

चलिए जानते हैं Prayag Magh Mela 2024 की अनकही बातें। माघ मेला 2024 की स्नान तिथि, माघ स्नान का महत्व, माघमेला 2024 कब है? कैसे पहुंचें प्रयागराज और प्रयागराज में होटल कहां लें? Prayag Magh Mela 2024 की विशेष जानकारी, क्यों प्रयागराज को तीर्थराज कहा जाता है? माघ माह के दौरान क्यों और ज़्यादा बढ़ जाता है संगम स्नान का महत्त्व और पवित्रता? पढ़िए प्रयाग माघमेला की कई दिलचस्प जानकारी सिर्फ़ gyanmanch के इस स्पेशल लेख में।

1Prayag Magh Mela 2024
2माघ मेला 2024 स्नान
3माघमेला 2024 कब है?
4कैसे पहुंचें प्रयागराज?
5प्रयागराज में होटल
6माघ मेला क्यों मनाया जाता है?
इस एक लेख में पढ़िए पूरी जानकारी

प्रयाग माघ मेला के बारे में

Prayag Magh Mela 2024: महाभारत जैसे पवित्र महाकाव्य में ‘प्रयाग’ की चर्चा मिलती है।

पुराणों में ‘प्रयाग’ को ‘तीर्थराज’ कहा गया है। यानी सभी तीर्थों का राजा।

पुराणों के साथ-साथ इतिहास के पन्नों पर ‘प्रयाग’ का नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज है।

अकबर के शासनकाल से ‘प्रयाग’ ‘इलाहाबाद’ के नाम से जाना जाने लगा था।

प्रयागराज ही वह धन्य माटी है, जहां महान क्रांतिकारी, स्वतंत्रता सेनानी, वीर शहीद चन्द्र शेखर आज़ाद जी को भारत माता की स्वाधनीता के लिए वीरगति प्राप्त हुई थी।

गंगा, जमुना और सरस्वती नदी का अद्भुत संगम प्रयागराज की पवित्रता और महिमा को सबसे विशेष बनाता है।

कई दर्शनीय स्थल, पौराणिक-ऐतिहासिक विरासतें और अनूठी संस्कृति, इसे उत्तर प्रदेश का सर्वोत्तम शहर बनाती हैं।

त्रिवेणी संगम प्रयागराज को कहते हैं ‘ज्ञान की भूमि’

Prayag Magh Mela 2024: प्रयागराज पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है।

यह शहर जितना प्राचीन, उतना ही अधिक प्रसिद्ध है।

कड़ाके की ठंड में लगने वाला प्रयागराज का वार्षिक कुंभ मेला और 12 साल में एक बार लगने वाला भव्य कुंभ मेला, पूरी दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र है।

कुंभ मेला के दौरान गंगा तट पर करोड़ों की भीड़ उमड़ पड़ती है।

2025 कुंभ मेला की भव्य तैयारियां जोरो-शोरो से चल रही हैं।

तीर्थ यात्रियों की सुविधा विकास के लिए अब तक ढाई हजार करोड़ से ज़्यादा योजनाओं की स्वीकृति योगी सरकार द्वारा दी गई है।

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर में हर साल कुंभ मेला (Prayag Magh Mela 2024) का आयोजन होता है।

यह मेला ज़्यादातर 15 जनवरी (मकर संक्रांति) से शुरू होकर पूरे फरवरी तक चलता है।

इस दौरान लाखों कल्पवासी कल्पवास करते हैं।

हर सुबह गंगा या संगम में स्नान करते हैं और सूर्य भगवान को जल अर्पित करते हैं।

कल्पवासी ज़्यादातर बुजुर्ग रहते हैं।

जो बुजुर्ग कल्पवासी काम करने की हालत में नहीं रहते, उनकी सेवा और देखभाल के लिए घर का कोई सदस्य साथ रहता है।

संगम तट पर भव्य मेला

Prayag Magh Mela 2024: कुंभ मेला गंगा से संगम तट पर 8-12 किमी के दायरे में लगता है।

मेले के दौरान मां गंगा अपना दामन थोड़ा घटा लेती हैं।

कभी पूरब की दिशा में एक कोने से बहने लगती हैं।

कभी पश्चिम की ओर से निकलकर यमुना और सरस्वती से मिल जाती हैं।

कभी-कभी तो दोनों कोनों को छोड़कर बीच से बहने लगती हैं।

कभी पूरब और पश्चिम दोनों दिशाओं से बहती हैं।

मां गंगा जो स्थान अपने भक्तों के लिए छोड़ देती हैं, गंगा और संगम की उसी रेत पर कलरफुल तंबुओं का अद्भुत नगर बसाया जाता है।

अस्थायी तंबुओं के घर, आकर्षण के केंद्र

Prayag Magh Mela 2024: अस्थायी तंबुओं के घर छोटे और बड़े दोनों होते हैं।

जहां महीनों से ज़्यादा कल्पवासी रहते हुए अपने पुराने पाप को धोने की कोशिश करते हैं।

मोक्ष प्राप्ति के लिए तप करते हैं! यहां तप के कई अर्थ हैं!

घर-परिवार की मोह-माया से दूर रहते हुए महीनों तपस्वी की तरह जीवन यापन करना।

जनवरी-फरवरी की बेरहम ठंडी में जब सूर्यदेव जी महीनों भर बिस्तर नहीं छोड़ते, वैसे में कल्पवासी को सुबह तीन-चार बजे ही गंगा या संगम में स्नान करना पड़ता है।

संगम का जल गीजर की तरह गर्म रहता है।

पर, मां गंगा के जल में फ्रीज की तरह गलन रहती है।

ऊपर से ओस की बारिश से रात भर भीगी रेत पर बिना चप्पल के चलना पड़ता है।

कितने भी गर्म कपड़े पहनिए, ठंड अपनी जगह खोज ही लेती है।

लेकिन, किसी ने सच कहा है कि ‘भक्ति में शक्ति’ है।

सुबह 2 बजे से ही भक्त संगम में डुबकी लगाने लगते हैं।

खुद करना पड़ता है हर काम

Prayag Magh Mela 2024: माघ मेला में रहने वाले अधिकांश कल्पवासी ख़ुद ही भोजन बनाते हैं।

ख़ुद ही अपना हर काम करते हैं।

बुजुर्ग कल्पवासी अपने परिवार के किसी सदस्य की मदद लेते हैं।

कल्पवासी अपना ज़्यादातर समय भक्ति में खर्च करते हैं।

टेंट में पूजा-पाठ करने के अलावा, सत्संग, भजन, कीर्तन, श्री सुंदरकांड, श्री रामचरितमानस आदि के आयोजन में भाग लेते हैं।

भव्य और विशाल तंबुओं में भक्तिमय और सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि कदम-कदम पर देखने को मिल जाता है।

कल्पवासी यही प्रक्रिया पूरे 40-45 दिनों तक फ़ॉलो करते हैं।

पूजा-पाठ, दान-धर्म, ज्ञान-मनोरंजन और खरीदारी की एक्टिविटी चलती रहती है।

माघ मेला में लगभग देशभर से व्यापारी आते हैं।

सर्कस और झूला जैसी अन्य गतिविधियां भी बच्चे-बड़े को ख़ूब लुभाती रहती हैं।

चलिए जानते हैं, माघ मेला 2024 स्नान (Prayag Magh Mela 2024) के महत्त्व के बारे में।

गंगा स्नान का महत्त्व

माघ मेला 2024 स्नान: माघी स्नान लगभग 40-45 दिनों तक चलता है।

कल्पवासी अपने डेढ़ महीने के कल्पवास में हर सुबह गंगा नदी या संगम में स्नान करते हैं।

कल्पवासी किराए के तंबू वाले घर में रहते हैं और रेत पर पुवाल बिछाकर सोते हैं।

भोजन आदि भी वहीं बनाना पड़ता है।

शौचालय की व्यवस्था सरकार की ओर से बाहर की ओर की जाती है।

अधिकांश कल्पवासी खाने-पीने की व्यवस्था घर से करके चलते हैं।

अनाज, गैस, आदि सहित पूरी गृहस्थी साथ लेकर निकलते हैं।

प्रयाग माघमेला पर्यटन के नज़रिए से

माघ मेला 2024 स्नान: चलिए अब प्रयागराज के माघ मेला को पर्यटक के नज़रिए से देखते हैं।

खुशी, उमंग, रोमांच और नयेपन के अनुभव से।

माघ मेला की सुबह जितनी भक्तिमय होती है, शाम उतनी ही खूबसूरत।

भारत की अतुल्य शाम।

ठंड के समय सूर्यदेव जी वैसे भी महीनों दर्शन नहीं देते, अगर दे दिए तो सोने पे सुहागा है।

पूरे दिन चक्कर काटकर जब शाम घर आती है और तंबुओं के शहर की चमकती रंग-बिरंगी लाइटें उसका स्वागत करती हैं, तो वह नज़ारा बेहद भव्य होता है।

कोहरे और ओस वाली गलन रात को चीरती हुई रोशनी, जब दूर-दूर तक चमकती हुई दिखाई देती है, तो मन खिल उठता है।

शाम और रात के वक़्त सितारों वाले तंबुओं के इस शहर को गंगा नदी पर बने शास्त्री पुल से देखते नज़र नहीं हटती। दोनों तरफ अद्भुत नज़ारा! पुल करीब 2.32 किमी लंबा है। मीलों पैदल चलकर इस खूबसूरत दृश्य का लुफ़्त उठाते ही बनता है।

उमा

शास्त्री सेतु (Shastri Bridge), प्रयागराज के कई शहरों और गांवों, वाराणसी, जौनपुर और प्रतापगढ़ के कुछ हिस्सों को प्रयागराज मुख्य शहर से जोड़ता है।

हर साल रिकॉर्ड भीड़ का साक्षी

माघ मेला 2024 स्नान: प्रयाग माघ मेला में साधारण इंसान से लेकर बड़े-बड़े साधु-सन्यासी भाग लेते हैं।

दिव्य नागा साधुओं के अलावा अघोरियों की विशाल भक्ति मंडली भी शामिल होती है।

कहीं बड़े-बड़े भंडारे देख मन चकित हो उठता है।

कहीं रामलीला के किरदारों का अनोखा पाठ देख मन भक्ति से खिल उठता है।

संगम पर भक्तिमय गीत-संगीत का सरगम, जीवन के हर गम भुला देता है।

मेले में सुनाई देती बंसी की धुन में नौकरी और तरक्की की चिंता कहीं नज़र नहीं आती है।

दमदार व्यंजन, बेजोड़ स्वाद

माघ मेला 2024 स्नान: ठेले पर सजे सफेद पेठे, कुछ पल के लिए हाई शुगर का डर भागा देते हैं।

ठंड के मौसम में कड़ाही से गर्म निकलते प्रयागराज के बेजोड़ छोले-समोसे के स्वाद ज़िंदगी भर याद रहते हैं।

सुबह के नाश्ते में गरमागरम जलेबी और ठंडी दही का मिश्रण, जुबान को ख़ूब भाता है।

प्रयागराज सिविल लाइंस में बाटी-चोखा का लंच-डिनर का टेस्ट ठंडी के साथ और बेस्ट हो जाता है।

इलाहाबादी कचौड़ी सब्जी, हाथ से बने नमकीन, काले गाजर का हलवा, लोंगलता, काले रसगुल्ले और चाट के साथ चाय और पान का टेस्ट लेना न भूलें।

दिल खोलकर करें खरीदारी

माघ मेला 2024 स्नान: खरीदारी, जितना दिल करे कर लीजिए।

हर तरफ दुकान, तरह-तरह की रंग-बिरंगी ख्वाहिशों से सजी रहती है।

खरीदने के लिए पैसे और रखने के लिए बैग कम पड़ सकते हैं, लेकिन चीज़ें नहीं।

दूर तक फैले तंबुओं के शहर के साथ रंग-बिरंगी दुकानें सजी रहती हैं।

रात के वक़्त भी माघ मेले में रौनक बनी रहती है।

चहल-पहल जारी रहती है।

रात को घूमने के शौक़ीन अपने दोस्तों के साथ घंटों यहां से वहां घूमते हैं।

सुरक्षा के नज़रिए से चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी और पुलिस तैनात रहती है।

पुलिस सहायता केंद्र चौबीसों घंटे सेवा में समर्पित रहते हैं।

देखें ज़िंदगी अलग नज़रिए से

माघ मेला 2024 स्नान: प्रयाग माघ मेला एक ऐसा उत्सव है, जहां ज़िंदगी अलग नज़रिए से देखने और समझने का मौक़ा मिलता है।

इस मेले में हर तरह के लोग दिखाई देते हैं।

मां गंगा की सेवा में करोड़ों लुटाने वाले दानी भी आते हैं।

सुख, शांति और खुशहाली की इच्छा लेकर भक्त भी आते हैं।

जिनका कोई सहारा नहीं, वो भी आते हैं।

जिनको जन्म-मरण के बंधन से छुटकारा पाना है, वो भी आते हैं।

जिन्हें दुनिया को अलग नज़रिए से देखना, समझना और जीना है, वो भी मां गंगा की गोद में माथा टेकने आते हैं।

Prayag Magh Mela 2024 आइए, और संगम स्नान के साथ अपनी अद्भुत संस्कृति, विश्वास, इतिहास और रोमांच का आनंद उठाइए।

जी लीजिए, खुशी का वह लम्हा, जिसे पैसे देकर भी नहीं खरीदा जा सकता है।

माघ मेला क्यों मनाया जाता है?

Prayag Magh Mela 2024: चलिए जानते हैं कि माघ मेला क्यों मनाया जाता है?

कहते हैं कि जब भगवान ब्रह्मदेव ने सृष्टि की रचना की थी, तब वह पवित्र महीना माघ था।

भगवान ब्रह्म यानी संपूर्ण ब्रह्मांड के रचयिता।

इसीलिए, माघ को एक त्योहार के रूप में मनाया जाता है।

माघ मेला 40-45 दिनों तक चलने वाला पवित्र और प्रसिद्ध उत्सव है।

इस दौरान कई लाख श्रद्धालु कल्पवास करते हैं।

कहां होता है माघ मेले का आयोजन?

Prayag Magh Mela 2024: माघ मेला का आयोजन प्रयागराज (इलाहाबाद) शहर के पूर्वी हिस्से पर किया जाता है।

यानी गंगा नदी के पावन तट पर।

जिसे त्रिवेणी संगम कहा जाता है।

वहीं गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम होता है।

फिलहाल मेला 8 से 12 किमी में फैला होता है।

एक कोने से दूसरे कोने तक सिर्फ़ टेंट-तंबू के शहर दिखते हैं।

माघ मेला के दौरान देश-विदेश के श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं।

माघ मेला 2024 स्नान

Prayag Magh Mela 2024: मान्यता है कि जो भक्त सच्चे तन-मन से संगम में डुबकी लगाता है, वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है।

40-45 दिनों तक चलने वाले इस पवित्र माघ मेला को सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलयुग के समान माना जाता है।

यानी 4 युगों का महत्त्व दर्शाता है माघ मेला

बचपन से बड़े-बुजुर्गों और जानकारों से सुनते आ रहा हूं कि जो भक्त विशेषकर कल्पवासी, पूरे महीने ‘माघ स्नान’ करते हैं, वे सभी कष्टों से मुक्त हो जाते हैं।

सारे पापों से छुटकारा पा जाते हैं।

मेला के दौरान माघ स्नान करने वाले भक्तों पर सभी देवताओं की कृपा बरसती है।

माघ के दौरान ब्रह्मा, विष्णु और महेश के साथ अन्य देवी-देवता भी संगम में डुबकी लगाते हैं।

उस दरमियान जो व्यक्ति गंगा या संगम में स्नान करते हैं।

उन्हें भगवान श्री विष्णु सुख, शांति, समृद्धि, संतान, ऐश्वर्य और मोक्ष प्रदान करते हैं।

तीर्थराज प्रयाग में माघ मेला के समय तीन बार स्नान करने का फल दस हज़ारअश्वमेघ यज्ञ से अधिक माना जाता है।

माघ स्नान का पौराणिक महत्व

Prayag Magh Mela 2024: माघ स्नान का महत्व महाभारत जैसे पवित्र महाकाव्य और अन्य पुराणों में भी मिलता है।

महाभारत युद्ध के दौरान मारे गए अपने रिश्तेदारों को मुक्ति दिलाने के लिए जहां धर्मराज युधिष्ठिर ने माघ मेला में कल्पवास किया था।

वहीं, राजा इंद्रदेव ने माघ स्नान करके ख़ुद को श्राप से मुक्ति दिलाई थी।

यह श्राप उन्हें महर्षि गौतम ऋषि के क्रोध से मिला था।

माघ महीने में पवित्र संगम में स्नान से जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है।

और अंत में बैकुंठधाम की प्राप्ति होती है।

माघ स्नान का महत्व जानने के बाद चलिए जानते हैं तीर्थराज प्रयाग में माघ मेला के मुख्य आकर्षण के बारे में।

मुख्य आकर्षण

Prayag Magh Mela 2024: माघ मेला स्नान के दौरान कई धार्मिक, पौराणिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रम के आयोजन होते हैं।

भजन, कीर्तन, श्री रामचरितमानस पाठ और रामलीला सहित कई कार्यक्रम दिन-रात चलते रहते हैं।

साधु-संतों, भक्तों और पर्यटकों के लिए फ्री भंडारा और दान-पुण्य का सिलसिला जारी रहता है।

इसके अलावा, कल्पवासी और श्रद्धालु शय्या दान, अन्नदान, हवन जैसी कई विधियां करते हैं।

चलिए अब जानते हैं कि माघमेला 2024 कब है?

माघमेला 2024 कब है?

अगर आप माघ मेला देखने के इच्छुक हैं, तो सबसे पहले यह जानना बहुत ज़रूरी है कि माघमेला 2024 कब है?

यूं तो मेले की तैयारी बरसात के बाद तेज़ गति से शुरू हो जाती है।

बिजली के खंभे गड़ने लगते हैं।

इस कोने से उस कोने तक रास्ते बनने लगते हैं।

गंगा को गंगा और संगम से जोड़ने वाले पुल बनने लगते हैं।

तंबू वाले अपनी निर्धारित जगह पर तंबू के घर बनाने लगते हैं।

प्रशासन द्वारा सुरक्षा, शौचालय और जल आदि की व्यवस्था शुरू हो जाती है।

पर, माघमेला की चमक जनवरी में शुरू होकर फरवरी, कभी-कभी मार्च तक चलती है।

इस बार माघमेला 2024 में कब है?

Prayag Magh Mela 2024: इसका उत्तर यह है कि माघमेला 15 जनवरी, 2024 को शुरू हो रहा है।

8 मार्च, 2024 को आस्था की अंतिम डुबकी के साथ समाप्त हो रहा है।

इस बार 8 मार्च, 2024 को महाशिवरात्रि का पावन त्यौहार पड़ रहा है।

उस दौरान ज़्यादा से ज़्यादा श्रद्धालुओं द्वारा संगम स्नान करने की उम्मीद की जा सकती है।

वैसे माघमेला 2024 के हर स्नान पर भारी भीड़ उमड़ने की संभावना की जा सकती है।

चलिए अब जानते हैं कि माघ मेला 2024 की मुख्य स्नान तिथियां कौन-कौन-सी हैं?

माघ मेला 2024 की मुख्य स्नान तिथियां
  • 15 जनवरी, 2024 (मकर संक्रांति)
  • 25 जनवरी, 2024 (पौष पूर्णिमा)
  • 9 फरवरी, 2024 (मौनी अमावस्या)
  • 14 फरवरी, 2024 (बसंत पंचमी)
  • 24 फरवरी, 2024 (माघी पूर्णिमा)
  • 8 मार्च, 2024 (महाशिवरात्रि)

उम्मीद है कि आपको यह पता चल गया होगा कि माघमेला 2024 कब है?

चलिए अब जानते हैं कि कैसे पहुंचे प्रयागराज?

कैसे पहुंचें प्रयागराज

Prayag Magh Mela 2024: प्रयागराज पहुंचना बेहद आसान है।

यह उत्तर प्रदेश का एक ऐसा शहर है, जो प्रदेश के अलावा देश के हर प्रमुख शहरों से कनेक्टेड है।

आप भारत के किसी भी कोने से प्रयागराज बड़ी आसानी से पहुंच सकते हैं।

प्रयागराज रोड, ट्रेन और फ्लाइट से पहुंचा जा सकता है।

ट्रेन से कैसे पहुंचें प्रयागराज?

कैसे पहुंचें प्रयागराज: प्रयागराज रेलवे स्टेशन (PRYJ), प्रयागराज छिवकी स्टेशन (PCO) या सूबेदारगंज रेलवे स्टेशन (SFG) उतरें।

वहां से ऑटो, टैक्सी या बस पकड़ें और 20-30 मिनट में प्रयाग कुंभ मेला पहुंचें

आपको बता दें कि प्रयागराज रेलवे नेटवर्क के जरिए लगभग भारत के हर राज्य और प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

चलिए यह जान लेते हैं कि फ्लाइट से कैसे पहुंचें प्रयागराज?

हवाई मार्ग से कैसे पहुंचें प्रयागराज?

कैसे पहुंचें प्रयागराज: प्रयागराज का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा ‘बमरौली एयरपोर्ट (IXD)’ है।

यह प्रयागराज शहर से लगभग 13-14 किमी की दूरी पर स्थित है।

बमरौली एयरपोर्ट भारत के सभी प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद, जयपुर, पटना, लखनऊ और वाराणसी से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

प्रयागराज बमरौली के लिए डायरेक्ट फ्लाइट न मिलने के मामले में आप लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट, वाराणसी (VNS) के लिए टिकट बुक कर सकते हैं।

वाराणसी से प्रयागराज की दूरी लगभग 120-130 किमी है।

वहां से आप टैक्सी, एसी/नॉन एसी बस और ट्रेन के जरिए बड़े आराम से पहुंच सकते हैं।

रोड से कैसे पहुंचें प्रयागराज?

कैसे पहुंचें प्रयागराज: आप उत्तर प्रदेश के अलावा देश के अन्य हिस्सों से भी रोड द्वारा प्रयागराज पहुंच सकते हैं।

प्रयागराज पहुंचाना बहुत आसान है।

गंगा जमुना और सरस्वती की गोद में बसा प्रयागराज शहर मध्य प्रदेश, छतीसगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, उत्तराखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और तेलंगाना सहित उत्तर प्रदेश के हर जिले से रोड द्वारा जुड़ा हुआ है।

आशा है कि आप समझ गए होंगे कि कैसे पहुंचें प्रयागराज?

चलिए अब जानते हैं कि प्रयागराज में होटल कहां लें?

प्रयागराज में होटल?

प्रयागराज में तीन तरह के मेलों का आयोजन होता है।

जो हर साल लगता है, उसे ‘माघ मेला’ कहा जाता है।

वहीं जो 6 साल में एक बार आयोजित होता है, उसे ‘अर्धकुंभ मेला’ कहा जाता है।

इसी तरह 12 साल में एक बार भव्य रूप से जो आयोजित होता है, उसे ‘कुंभ मेला’ के नाम से जाना जाता है।

और जब कुंभ मेला और अर्ध कुंभ मेला लगता है, फिर माघ मेला नहीं लगता है।

इन मेलों के दौरान प्रयागराज में हर साल बड़ी संख्या में कल्पवासी, श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं।

कल्पवासी तो गंगा और संगम तट पर अस्थायी तंबुओं के घरों में रहते हैं।

प्रयागराज में होटल कहां लें

मुख्य-मुख्य स्नान की तिथियों पर प्रयागराज आने वाले ज़्यादातर लोग तंबू वाले घर में रहना पसंद करते हैं।

संगम की रेत वाली बिस्तर पर सुकून भरी रात का आनंद ही अलग है।

दिन-रात का शोरगुल भक्ति और रोमांच में सुनाई कहां देता है?

टेंपरेरी मगर रंग-बिरंगे टेंटों के अलावा, प्रयागराज में कई होटल और लॉज शहर के दिल में या पासपास के क्षेत्रों में मिल जाते हैं।  

प्रयागराज में होटल: टेंट की सुविधा उत्तर प्रदेश सरकार, आश्रम, पंडा और आध्यात्मिक केंद्रों द्वारा मुहैया कराई जाती है।

माघ मेला पहुंचने के बाद आप उनसे संपर्क कर, अपना तंबू वाला होटल बुक कर सकते हैं।

प्रयागराज में ठहरने के लिए कई अच्छे होटल किफायती दाम में मिल जाते हैं।

आप आवास होटल, रिसोर्ट, धर्मशाला आदि में रह सकते हैं।

अगर आप माघ मेला के दौरान गंगा या संगम के तट पर तंबुओं के शहर में रहना चाहते हैं, तो वह भी विकल्प मौजूद रहता है।

प्रयागराज में होटल बुक करने के लिए जिला प्रयागराज की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।

यहां होटल की पूरी जानकारी मौजूद है।

इसके अलावा आप Make my trip, goibibo, tripadvisor, oyo आदि के जरिए भी प्रयागराज में होटल बुक कर सकते हैं।

अगर आप प्रयाग माघमेला 2024 का अद्भुत तजुर्बा करने की चाह रखते हैं तो रेलवे टिकट चार महीने पहले बुक कर लें।

क्योंकि, उत्तर प्रदेश के लिए रेलवे टिकट पाना, नाकों चने चबाने जैसा है।

याद रखें

अगर आप Prayag Magh Mela 2024 देखने के लिए निकलें तो ज़्यादा से ज़्यादा गर्म कपड़े ज़रूर साथ रख लें।

जनवरी-फरवरी में उत्तर प्रदेश में कड़ाके वाली ठंड पड़ती है।

प्रयागराज में होटल की जानकारी के बाद चलिए यह भी जान लेते हैं कि प्रयागराज सिटी के भीतर और कौन-कौन-सी शानदार और प्रसिद्ध विरासतें देख सकते हैं।

अगर आप कभी प्रयाग माघ मेला या प्रयागराज घूमने जाएं तो इन स्थानों को ज़रूर देखें।

प्रयागराज के प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल
  • त्रिवेणी संगम, प्रयागराज
  • विश्राम मुद्रा में विराजमान श्री बड़े हनुमान जी मंदिर
  • प्रयागराज (इलाहाबाद) किला
  • स्वराज भवन
  • उच्च न्यायालय
  • विशाल और ऐतिहासिक खुसरौ बाग
  • इलाहाबाद संग्रहालय
  • आनंद भवन
  • केंद्रीय विश्वविद्यालय
  • वीर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पार्क
  • नवीन यमुना सेतु (ब्रिज) से यमुना नदी का अद्भुत और अलौकिक नज़ारा
  • शास्त्री पुल, प्रयागराज से संगम तक फैले मां गंगा के भव्य रूप का दर्शन

माघ मेला, अर्धकुंभ मेला और कुंभ मेला – ऑल टाइम हिट ट्रिप है!

Prayagraj Magh Mela 2024 में जाएं, तो यह स्थान ज़रूर देखें

माघमेला 2024 कब है यह जानने के बाद यह भी पढ़ें:

उत्तर प्रदेश के बेस्ट टूरिस्ट प्लेस:

मां चौहरजन धाम

विजेथुवा महावीरन धाम

अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पार्क