Prayagraj Ke Darshaniya Sthal | भव्य यूपी का दिव्य स्थान  

Prayagraj Ke Darshaniya Sthal: श्री दुर्वासा ऋषि आश्रम प्रयागराज जिले का सबसे नजदीकी (Tourist Places Near Prayagraj) और फेमस दर्शनीय एवं पर्यटक स्थल है। आइए जानते हैं कि यह दिव्य स्थल प्रयागराज में सबसे फेमस क्यों है और श्री दुर्वासा ऋषि आश्रम कैसे पहुंचें?

Prayagraj Ke Darshaniya Sthal: सबसे पहले आपको बता दें कि हम प्रयागराज के जिस फेमस दर्शनीय और पर्यटन स्थल की बात कर रहे हैं, वह प्रयाग पंचकोसी परिक्रमा के तहत उत्तर प्रदेश पर्यटन स्थल में शुमार है, जो ककरा गांव में स्थित है और श्री ऋषि दुर्वासा आश्रम के नाम से जाना जाता है।

श्री दुर्वासा ऋषि आश्रम प्रयागराज के बारे में जानने से पहले इसके इतिहास को समझना बहुत जरूरी है।

स्थानीय निवासियों के अनुसार इस स्थान का संबंध ऋषिराज दुर्वासा जी से रहा है।

कहा जाता है कि यहां महर्षि दुर्वासा जी आश्रम बनाकर रहा करते थे।

यहीं पर उन्होंने तपस्या की थी। इस पवित्र स्थल को उनकी तपस्थली माना जाता है।

आश्रम अर्थात मंदिर के प्रवेश द्वार पर उत्तर प्रदेश पर्यटन द्वारा एक पीले रंग का बोर्ड लगाया गया है।

बोर्ड पर अंकित जानकारी के अनुसार श्री महर्षि दुर्वासा जी महाराज – भगवान शिव स्वरूप साक्षात दशम रूद्र हैं।

महर्षि ऋषि अत्रि एवं परमसती देवी अनुसुइया के पुत्र थे।

माना जाता है कि घनघोर तप के बाद स्वयं भगवान शिव ही दुर्वासा जी के रूप में दत्तात्रेय एवं चंद्रमा के साथ अवतीर्ण हुए थे।

यही कारण है कि इस मंदिर के मुख्य गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित हैं।

साथ ही श्री महर्षि दुर्वासा जी, माता पार्वती एवं भगवान गणेश जी की प्रतिमाएं स्थापित हैं।  

प्रयागराज में सबसे फेमस क्यों है? (Prayagraj Ke Darshaniya Sthal)

Tourist Places Near Prayagraj: श्री दुर्वासा ऋषि आश्रम प्रयागराज जिले के ग्रामीण क्षेत्र में स्थित है।

फिर भी माघ मेला या कुंभ मेला के दौरान यहां भारतभर के तीर्थयात्री और पर्यटक भारी संख्या में पहुंचते हैं।

इसका अर्थ यह हुआ कि गांव में बसे होने के बावजूद यह स्थान खूब फेमस है।

श्री दुर्वासा ऋषि आश्रम स्थानीय लोगों और क्षेत्रवासियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है।

उनका मानना है कि इस आश्रम की सेवा करने वाले व्यक्ति को सफलता अवश्य मिलती है।

इसका प्रमाण स्थानीय गांव ककरा, दुबावल सहित अन्य पड़ोसी गांवों में देखा जा सकता है।

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स्थानीय युवाओं का कहना है कि जो युवा श्री दुर्वासा ऋषि आश्रम की सेवा में समर्पित हो जाता है, उसकी मनोकामना बाबा अवश्य पूरी करते हैं।

मनोकामना में क्या? सरकारी नौकरी!

तभी तो वहां के हर घर में एक सरकारी नौकरी वाला इंसान जरूर मिलेगा।

आश्रम का ध्यान, साफ-सफाई, आदि का ख्याल स्थानीय युवाओं द्वारा रखा जाता है।

और आप जब वहां जाएंगे, दो-चार युवाओं को उनकी सेवा में अवश्य पाएंगे।

श्री दुर्वासा ऋषि आश्रम कैसे पहुंचें?

Prayagraj Ke Darshaniya Sthal: आपको बता दें कि श्री दुर्वासा ऋषि आश्रम प्रयागराज मुख्यालय से 20-25 किमी की दूरी पर स्थित है।

इस स्थल पर पहुंचने के लिए आप प्रयागराज से ऑटो, टैक्सी, ओला, आदि बुक कर सकते हैं।

निजी साधन के अलावा कोई बेहतर विकल्प मौजूद नहीं हैं।

अगर आप प्रयागराज से आ रहे हैं तो शास्त्री ब्रिज पार करने के बाद झूंसी बाज़ार आता है।

वहां से आपको बाएं की तरफ मुड़ जाना है। यानी दक्षिण दिशा की ओर जाना है।

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वैसे ककरा बहुत फेमस जगह है, कोई भी बड़े आराम से इस जगह के बारे में बता देगा।

श्री दुर्वासा ऋषि आश्रम ककरा गांव में स्थित है।

ककरा-कोटवा वाली रोड पर आते ही असली गांव वाली खुशबू का अहसास होने लगता है।

बरसात और ठंडी के मौसम में फसलों की बेजोड़ हरियाली देखने को मिलती है।

आप प्रयागराज में जिस गंगा को पार करते हुए आते हैं, वहीं गंगा श्री दुर्वासा ऋषि आश्रम से थोड़ी दूर पर बहती हैं।

वहीं से बहते हुए वाराणसी चली जाती हैं।

यदि आप वाराणसी की तरफ से आ रहे हैं तो आपके लिए सबसे सटीक रास्ता जीटी रोड है।

वाराणसी से हनुमानगंज बाज़ार आइए और वहां से दक्षिण तरफ मुड़कर ककरा वाली रोड ले लीजिए।

वही रोड कोटवा, जमुनीपुर चौराहा होते हुए श्री दुर्वासा ऋषि आश्रम ककरा पहुंचा देगी।

ककरा एक ग्रामीण क्षेत्र है, इसलिए यहां ठहरने के लिए होटल की सुविधा मौजूद नहीं है।

आप होटल प्रयागराज में ले सकते हैं।

श्री दुर्वासा ऋषि आश्रम कैसे पहुंचें? यह जानने के बाद आगे आप और जानेंगे कि यह स्थान प्रयागराज में सबसे फेमस क्यों है?

त्योहारों पर उमड़ती है भीड़

Prayagraj Ke Darshaniya Sthal: श्री दुर्वासा ऋषि आश्रम प्रयागराज के अलावा अन्य जिलों तक फेमस है।

त्योहारों के अवसर पर बड़ी दूर-दूर से लोग महर्षि स्वरूप बाबा भोलेनाथ के दर्शन करने पहुंचते हैं।

नागपंचमी का उत्सव यहां बड़ी भव्यता के साथ मनाया जाता है।

इसी तरह महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में काफी भीड़ उमड़ पड़ती है।

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होली का त्योहार यहां देखते ही बनता है। बड़े-बड़े ढोल-नगाड़ों के गर्जना के बीच लोग घंटों उछलते-कूदते हैं और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं।

दिसंबर महीने में श्री दुर्वासा ऋषि आश्रम में श्री ऋषि दुर्वासा जयंती विगत कई वर्षों से मनाई जा रही है।

यह उत्सव बड़े भव्य तरीके से मनाया जाता है।

इस दौरान पूरे आश्रम परिसर को फूल-मालाओं से सजा दिया जाता है।

पहले दिन ‘ओम नमः शिवाय’ के अखंड जाप का आयोजन किया जाता है, जिसमें सभी क्षेत्रीय निवासी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।

दूसरे दिन सामूहिक रुद्राभिषेक का भव्य महोत्सव चलता है।

भगवान स्वरूपी महर्षि को छप्पन भोग का प्रसाद चढ़ाया जाता है।

ज़्यादातर यह जयंती दो दिनों तक मनाई जाती है।

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उस दरमियान मंदिर में पूजन-दर्शन के लिए भक्तों का ताता लगा रहता है।

कोई भक्त सवा कुंतल लड्डू चढ़ाता है, तो कोई खुद को पूरी तरह प्रभु की सेवा में समर्पित कर देता है।

इसके अलावा, संगीतमय भजन संध्या का आयोजन किया जाता है, जो देर रात तक चलता है।

अनेकों धार्मिक और गोष्ठी आयोजन भी किए जाते हैं।

साथ ही ऋषिराज श्री दुर्वासा जी भव्य आरती आकर्षक का केंद्र होती है, जिसमें हर भक्त झूम उठता है।   

अलग अहसास का अनुभव

Tourist Places Near Prayagraj: शहर की भीड़ और शोरगुल से दूर बसा श्री दुर्वासा ऋषि आश्रम प्रयागराज में सबसे फेमस दर्शनीय और पर्यटक स्थल माना जाता है।

इस स्थान पर पहुंचते ही गजब की शांति की अनुभूति होती है।

जिस प्रकार दूर-दूर तक मां गंगा बहती हैं, उसी तरह हर तरफ सुकून की लहर दिखाई देती है।

आश्रम में प्रवेश करते ही अशांत मन शांत हो जाता है।

‘ओम नमः शिवाय’ के लगातार उच्चारण से मानो शरीर में नई ऊर्जा का संचार हो उठता है।

स्वच्छ और सुंदर मंदिर का आंगन घर जैसी फिलिंग कराता है।

मंदिर की बेजोड़ बनावट आंखों को आकर्षित करती है।

दीवारों पर चमकते सुनहरे रंग देखकर ऐसा महसूस होता है, मानो सारा सोना इसी मंदिर में जड़ दिया गया है।

मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग के रूप में विराजमान भगवान शिव के दर्शन से सभी भक्तों की मनोकामना पूरी होती है।

ऋषिराज दुर्वासा जी की पूजा-अर्चना से जीवन की कठिनाइयों से लड़ने की शक्ति मिलती है।

इस पवित्र स्थान की सेवा में समर्पित हर युवा को सफलता अवश्य मिलती है।

जो श्रद्धालु सच्चे मन से श्री दुर्वासा ऋषि के द्वार पर पहुंचकर कुछ मांगता है, महादेव स्वरूपी महर्षि अपने भक्तों की मनोकामना अवश्य पूरी करते हैं।

ऐसी ही न जाने कितनी ही विशेषताएं इस मंदिर को दिव्य और फेमस बनाती है।

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श्री दुर्वासा ऋषि आश्रम प्रयागराज की महिमा केवल वही लोग जानते हैं, जो लोग ऋषिराज दुर्वासा जी के सच्चे सेवक और भक्त हैं।

ककरा, दुबावल, बेलवार, जमुनीपुर और कोटवा जैसे स्थानीय निवासियों से इनकी प्रसिद्धि के बारे में बड़ी बारीकी से जाना जा सकता है।

देखें जो कभी नहीं देखा!

Tourist Places Near Prayagraj: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के ककरा गांव में स्थित श्री दुर्वासा ऋषि आश्रम अपनी दिव्यता के लिए फेमस है।

यहां अधिकांश भक्त महर्षि दुर्वासा जी के दर्शन के लिए आते हैं।

पर्यटक के नजरिए से कहा जाए तो आप यहां असली सुकून की अनुभूति कर सकते हैं।

विशाल पीपल की छांव में बैठकर शांति का अलग अनुभव कर सकते हैं।

रेत की डगर पर नए रास्ते बनाते हुए मीलों तक मां गंगा की धारा के साथ-साथ चल सकते हैं।

अप्रैल और मई के बीच तरबूज की विशाल खेती का नजारा उठा सकते हैं।

मां गंगा के पावन जल में डुबकी लगा सकते हैं। साथ ही वह जल अपने घर भी ले जा सकते हैं।

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आपको बता दें कि प्रयागराज के बाद यानी ककरा और बेलवार गांव के बीच गंगा मां दो भाग में बंटकर बहती हैं।

जिन्हें छोटी और बड़ी गंगा के रूप में संबोधित किया जाता है।

गांव के आधा किमी की करीब छोटी गंगा बहती हैं, जिनका गांव के घरों से दीदार होता रहता है।

छोटी गंगा पार करने के लिए कभी-कभी नाव की जरूरत पड़ती है। गर्मी के समय स्थानीय गांव वाले तैरकर पार कर देते हैं।

उसके बाद फिर खेती वाली जमीन पड़ती है, जिस पर लोग सरसों, गेहूं, मटर, जौ, आदि पैदा करते हैं।

उसके बाद फिर होता है बड़ी गंगा मां का दर्शन।

कब जाएं?

Tourist Places Near Prayagraj: दुर्वासा आश्रम कैसे पहुंचें, इसकी जानकारी आप ऊपर पढ़ सकते हैं।

आइए जानते हैं कि श्री दुर्वासा ऋषि आश्रम प्रयागराज कब जाया जाए।

उत्तर प्रदेश घूमने का सबसे बेहतर समय अक्टूबर और नवंबर, फिर फरवरी और मार्च माना जाता है।

उसके बाद यहां प्रचंड गर्मी पड़ती है।

लेकिन, दिसंबर और जनवरी के बीच प्रयागराज में माघ मेला, कुंभ मेला और महाकुंभ का आयोजन किया जाता है।

उस दौरान कड़ाके की ठंड पड़ती है। कभी-कभी महीनों सूरज नहीं निकलता है।

इन सबके बावजूद प्रयागराज के गंगा और संगम तट पर विशाल मेला लगता है, जिसमें लाखों-करोड़ों तीर्थयात्री और पर्यटक हिस्सा लेते हैं।

इस हिसाब से अक्टूबर-मार्च तक घूमने के लिए सबसे बेस्ट समय माना जाता है।

अगर आप अप्रैल, मई और जून में जाने की प्लानिंग कर रहे हैं तो आप सुबह 4 बजे से 9-10 बजे तक और शाम 4 बजे से रात मंदिर खुले रहने तक दर्शन-पूजन कर सकते हैं।

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एक श्री दुर्वासा धाम, उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में भी स्थित है।

ज्ञानमंच के इस आर्टिकल में आपने जाना: Prayagraj Ke Darshaniya Sthal | Tourist Places Near Prayagraj | प्रयागराज में सबसे फेमस | दुर्वासा ऋषि आश्रम प्रयागराज | दुर्वासा ऋषि आश्रम कैसे पहुंचें |

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