Saraswati Puja 2024: इस बसंत पंचमी करें देवी सरस्वती को प्रसन्न

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Saraswati Puja 2024: इस आर्टिकल के जरिए जानिए बसंत पंचमी की पौराणिक कथा (Basant Panchami Hindi Story), बसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त (Basant Panchami Muhurat 2024), देवी सरस्वती की पूजा विधि एवं मंत्र (Saraswati Puja Vidhi and Mantra) और बसंत पंचमी की तिथि (Basant Panchami 2024 Date)।

इस लेख में सबसे पहले हम यह जानेंगे कि बसंत पंचमी (Basant Panchami) मनाने की वजह क्या है?

तो चलिए जानें बसंत पंचमी की रोचक कहानी (Basant Panchami Hindi Story) आसान और दिलचस्प भाषा में।

इस आर्टिकल में हम जानेंगे:

1.सरस्वती पूजा (Saraswati Puja 2024)
2.बसंत पंचमी की पौराणिक कथा (Basant Panchami Hindi Story)
3.बसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त (Basant Panchami Muhurat 2024)
4.देवी सरस्वती की पूजा विधि एवं मंत्र (Saraswati Puja Vidhi and Mantra)
5.बसंत पंचमी की तिथि (Basant Panchami 2024 Date)
6.मां सरस्वती की पूजा का महत्त्व
7.बसंत पंचमी के दिन क्या बनाते हैं?
8.बसंत पंचमी का दूसरा नाम क्या है?
9.बसंत पंचमी पर किस मंदिर में जाएं?

देवी सरस्वती पूजा की शुरुआत (Saraswati Puja 2024)

Basant Panchami Hindi Story: हर साल की तरह इस साल भी माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को भारतभर में ‘बसंत पंचमी’ मनाई जा रही है।

बसंत पंचमी साल का वह दिन होता है, जिस दिन से वसंत ऋतु की शुरुआत होती है।

यह त्योहार देश के अलग-अलग हिस्सों में कई नामों से जाना जाता है।

कहीं सरस्वती पूजा (Saraswati Puja 2024), कहीं बसंत पंचमी (Basant Panchami), तो कहीं माघ पंचमी के नाम से मशहूर है यह पर्व।

यह उत्सव पूरे भारत में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।

बसंत पंचमी (Basant Panchami) के शुभ अवसर पर मां सरस्वती की विधिवत पूजा (Saraswati Puja) की जाती है।

देवी सरस्वती को साहित्य, संगीत, कला आदि की देवी माना जाता है।

यही वजह है कि बसंत पंचमी के अवसर पर शिक्षा, साहित्य, कला, विज्ञान, गीत-संगीत आदि के क्षेत्र से जुड़े लोग मां सरस्वती पूजा का पर्व बड़े हर्ष-उल्लास के साथ मनाते हैं।

भारत के लगभग सभी स्कूलों में यह त्योहार बड़े स्तर पर मनाया जाता है।

हर साल की तरह इस बार भी बसंत पंचमी (Basant Panchami 2024) या सरस्वती पूजा (Saraswati Puja 2024) पूरे भारत में भव्य रूप में मनाई जा रही है।

जानें कि क्या कारण है कि बसंत पंचमी का त्योहार हर वर्ष ‘माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि’ पर ही क्यों मनाया जाता है?

सरस्वती पूजा (Saraswati Puja 2024) यानी बसंत पंचमी की रोचक कहानी (Basant Panchami Hindi Story) पढ़िए आसान और दिलचस्प भाषा में।  

क्यों मनाते हैं बसंत पंचमी (Saraswati Puja 2024)

Basant Panchami Hindi Story: सृष्टि के रचियता भगवान ब्रह्मा जी ने सृष्टि के साथ-साथ मनुष्यों और अन्य जीवों की रचना तो कर दी, मगर एक बात उन्हें बार-बार खटक रही थी।

सृष्टि सृजन करते समय प्रभु ने इस बात का विशेष रूप से ख्याल रखा था कि वातावरण शांत हो और शोरगुल का कहीं कोई नामोनिशान न हो।

इसी सोच को ध्यान में रखते हुए भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना तो कर दी, लेकिन उसकी हालत सुनसान, बेजान, बंजर और निर्जीव जैसी दिखाई देती।

जैसे ऊर्जा और उमंग बिना जीवन बेकार। वैसे वाणी बिन प्राणी बेकार।

संसार की मूक, शांत और नीरस स्थिति देखकर भगवान ब्रह्मा जी बेहद चिंतित थे।

ओह! भला कोई अपने घर को बेजान देखकर क्या प्रसन्न हो सकता है?

अपने द्वारा बसाई गई दुनिया को सुनसान देखना किसे अच्छा लग सकता है?

हर कोई चाहता है कि उसका संसार सदा हंसता-खेलता रहे। नए-नए रंगों से सजता-संवरता रहे।

इस विषय में भगवान ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु जी के बीच गहन चर्चा हुई।

जिसका नतीजा यह निकला कि सृष्टि को सदाबहार बनाया जाया।

जहां हर तरफ खुशी निवास करे। प्राणी एक-दूसरे से अपनी बात कह सके।

खेतों में हरियाली और हर तरफ सुंदरता के साथ हवाओं में मधुर संगीत हो।

जहां जंगल में नदियां और बागों में कोयल खुशी के गीत गाएं।

जहां बादलों की धुन पर मोर नाचे और गीत, संगीत, कला, कथा, साहित्य, विज्ञान आदि से मानव जीवन विकसित हो सके।

हर प्राणी में प्रेम जागृत हो। जहां नदी, आकाश, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी सबमें जीवन जीने के प्रति उत्साह हो।

मां सरस्वती का जन्म (Saraswati Puja 2024)

Basant Panchami Hindi Story: इसी आधुनिक सोच के साथ भगवान ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल निकालकर पृथ्वी पर छिड़क दिया।

दिव्य और पवित्र जल की बूंदें जैसे ही भूमि पर गिरी, पूरी पृथ्वी थरथरा गई।

कुछ पल के लिए ऐसा लगा, जैसे पूरी सृष्टि डगमगा गई।

फिर उन बूंदों के मिलन से पृथ्वी पर दिव्य शक्तियों और अद्भुत गुणों वाली एक देवी प्रकट हुईं।

दोनों भगवान के मत के अनुसार प्रकट हुईं दिव्य देवी का नाम ‘सरस्वती’ रखा गया।

चार भुजाओं वाली दिव्य देवी का स्वरूप बेहद सुंदर, शांत और मनमोहक था।

मां सरस्वती अपने एक हाथ में वीणा, दूसरे हाथ में वरमुद्रा, तीसरे हाथ में पुस्तक और चौथे हाथ में माला धारण की थीं।

विद्या देवी सरस्वती के इसी रूप का वर्णन कई धार्मिक ग्रंथों में पढ़ने को मिलता है।

इसी स्वरूप में देवी की प्रतिमाएं मंदिरों, शिक्षा, साहित्य, कला, संगीत आदि से जुड़े संस्थानों पर भी देखी जा सकती हैं।

जैसे ही मां सरस्वती पृथ्वी पर अवतरित हुईं, भगवान ब्रह्मा ने उनसे वीणा बजाने का अनुरोध किया।

फिर क्या था? देवी ने जैसे ही वीणा बजाना शुरू किया, बेजान सृष्टि में नई जान-सी आ गई।

मुरझाए पेड़ खिलने और हवाएं गुनगुनाकर बहने लगीं।

मनुष्य के साथ-साथ पृथ्वी के सभी पशु-पक्षी, जीव-जंतु मस्त-मगन हो गए।

जीवों को मिली वाणी

Basant Panchami Hindi Story: बसंत पंचमी (Basant Panchami) के दिन वीणा बजाने से संसार के जीवों को वाणी मिली थी। पृथ्वी में नई ऊर्जा का संचार हुआ था।

खेतों को हरियाली की उम्मीद मिली थी। मनुष्यों को विद्या, बुद्धि और ज्ञान की सौगात मिली थी।

संगीत, कला, साहित्य आदि का बेशकीमती उपहार मिला था। बेहतर जीवन जीने का साधन मिला था।

बसंत पंचमी (Basant Panchami) के पावन अवसर पर मां सरस्वती के प्रकट होने के साथ-साथ मनुष्य को ज्ञान और मनोरंजन का आजीवन चलने वाला खजाना मिला था, जो समय के साथ विकसित होता चला जा रहा है।

महाशिवरात्रि 2024 की समस्त जानकारी यहां पढ़ें: https://gyanmanch.in/mahashivratri-2024

मां सरस्वती की पूजा का महत्त्व

Basant Panchami Muhurat 2024: ऐसी मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा-अर्चना (Saraswati Puja) करने वाले भक्त पर मां की विशेष कृपा बरसती है।

इस दिन मां सरस्वती ने संसार को वाणी के साथ-साथ विद्या और बुद्धि दी थी।

यही वजह है कि Basant Panchami के दिन घर में मां सरस्वती की पूजा (Saraswati Puja) की जाती है।

इस दिन देवी सरस्वती को मां बागीश्वरी, मां भगवती, मां शारदा, मां वीणावादनी और मां वाग्देवी जैसे अनेक नामों से देशभर में पूजा जाता है।

बसंत पंचमी कब मनाते हैं?

Basant Panchami 2024 Date: सभी ऋतुओं में वसंत को ऋतुओं का राजा कहा जाता है।

मौसम बेहद सुहावना होने की वजह से इसे बसंत पंचमी (Basant Panchami) बुलाया जाता है।

माना जाता है कि बसंत पंचमी के दिन से ही शीत ऋतु का समापन और वसंत ऋतु की शुरुआत होती है।

शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि से वसंत ऋतु का आरंभ होता है।

खेतों में फसलें और किसान के जीवन की खुशियां लहलहा उठती हैं।

फूल खिलने के साथ हर जगह, हर तरफ हरियाली और खुशहाली नजर आती है।

इस दौरान मौसम अपनी सुंदरता की चरम सीमा पर होती है।

इस प्रकार बसंत पंचमी का त्योहार हर साल ‘माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि’ पर मनाई जाती है।

बसंत पंचमी (Basant Panchami) का पर्व पूरे भारत में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है।

पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती का अवतरण हुआ था।

यानी मां सरस्वती संसार की भलाई के लिए धरती पर अवतरित हुई थीं।

इसी वजह से ज्ञान के उपासक बसंत पंचमी के दिन अपनी आराध्य देवी मां सरस्वती की विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं।

इस साल बसंच पंचमी का पर्व 14 फरवरी, 2024 (बुधवार) को मनाया जा रहा है।

सरस्वती पूजन शुभ मुहूर्त (Basant Panchami Muhurat 2024)

Basant Panchami 2024 Date: हिंदू पंचाग के अनुसार साल 2024 में बसंत पंचमी की शुरुआत 13 फरवरी, 2024 को दोपहर 02 बजकर 41 मिनट पर प्रारंभ हो रही है और अगले दिन 14 फरवरी, 2024 को दोपहर 12 बजकर 09 मिनट पर समाप्त हो रही है।

ऐसे में इस बार बसंत पंचमी का त्योहार 14 फरवरी, 2024 को बड़े धूमधाम से देशभर में मनाया जाएगा।

बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती के पूजन (Saraswati Puja 2024) का शुभ मुहूर्त 14 फरवरी को सुबह 07 बजे से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा।

इस साल विद्या की देवी सरस्वती पूजा (Saraswati Puja 2024) के लिए शुभ मुहूर्त का कुल समय 5 घंटे 35 मिनट है।

इसी अवधि के दौरान पूजा करने से उचित फल की प्राप्ति के संयोग बन रहे हैं

बसंत पंचमी पूजा विधि (Basant Panchami Muhurat 2024)

Saraswati Puja Vidhi and Mantra: ऐसी मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की पूजा पीले वस्त्र धारण करके और माथे पर पीले रंग का तिलक लगाकर करनी चाहिए। इससे देवी सरस्वती शीघ्र प्रसन्न होती हैं।

आइए जानते हैं कि इस बसंत पंचमी के अवसर पर मां सरस्वती की पूजा (Saraswati Puja) कैसे करें?

Saraswati Puja Vidhi and Mantra

1. सबसे पहले देवी सरस्वती की प्रतिमा, मूर्ति या तस्वीर आदि को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें।

2. मां सरस्वती को रोली, पीला चंदन, हल्दी, पीले या सफेद रंग के फूल, पीली मिठाई एवं अक्षत श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।

3. विद्या की देवी सरस्वती को किताब, वाद्य यंत्र या संबंधित टूल्स आदि अर्पित करें।

4. शिक्षा, कला, साहित्य, विज्ञान, गीत-संगीत से जुड़े लोग अपने टूल्स की पूजा अवश्य करें।

5. विद्या की देवी मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए बसंत पंचमी के पवित्र और शुभ फल देने वाले अवसर पर विद्यार्थी मां के नाम पर एक दिन व्रत भी रख सकते हैं।

6. पूजा करते समय मां सरस्वती की वंदना का पाठ करें या नीचे दिए मंत्र का जाप करें।

मां सरस्‍वती वंदना

‘या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता, या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।

या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता, सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा।

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं, वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌।

हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्‌, वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌।’

देवी सरस्‍वती पूजा मंत्र (Saraswati Puja Vidhi and Mantra)

1. Saraswati Puja 2024: पूजा प्रारंभ करने से पहले इस मंत्र का जप करें – ‘यथोपलब्धपूजनसामग्रीभिः माघ मासे बसंत पंचमी तिथौ भगवत्या: सरस्वत्या: पूजनमहं करिष्ये।’

2. कलश की स्थापना करते समय इस मंत्र का जाप करें – ‘ओ३म् त्तत्वायामि ब्रह्मणा वन्दमानस्तदाशास्ते यजमानो हविभि:। अहेडमानो वरुणेह बोध्युरुशंस मान आयु: प्रमोषी:। अस्मिन कलशे वरुणं सांगं सपरिवारं सायुध सशक्तिकमावाहयामि, ओ३म्भूर्भुव: स्व:भो वरुण इहागच्छ इहतिष्ठ। स्थापयामि पूजयामि।’

3. अक्षत अर्पित करते समय इस मंत्र का जाप करें – ‘ॐ भूर्भुवः स्वः सरस्वती देव्यै इहागच्छ इह तिष्ठ।’

4. मां सरस्वती को मिठाई अर्पित करते समय इस मंत्र का जाप करें – ‘इदं शर्करा घृत समायुक्तं नैवेद्यं ऊं सरस्वतयै समर्पयामि।’

बसंत पंचमी के दिन क्या बनाते हैं?

Saraswati Puja Vidhi and Mantra: जैसा कि हम सभी जानते हैं कि बसंत पंचमी पर्व या वसंत ऋतु का पीले रंग से गहरा नाता है।

यही वजह है कि बसंत पंचमी पर पीले रंग का विशेष महत्व है।

देवी सरस्वती पूजा (Saraswati Puja) में जहां पीले वस्त्र धारण करने की परंपरा है।

वहीं पूजा और प्रसाद में पीले रंग की मिठाई, पकवान, फल-फूल आदि चढ़ाने की मान्यता है।

इस तरह बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर पीले रंग के व्यंजन बनाने का भी रिवाज है।

आइए जानते हैं कि बसंत पंचमी (Basant Panchami 2024) और सरस्वती पूजा (Saraswati Puja 2024) के शुभ अवसर पर किन-किन पकवानों को बनाया जा सकता है?

किन पकवानों का भोग लगाने से विद्या की देवी सरस्वती प्रसन्न होती हैं?

कौन-सा आहार भोग लगाने और खाने से घर एवं जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है?

Saraswati Puja Vidhi and MantraBasant Panchami Muhurat 2024

1. घर और जीवन में शांति बनाए रखने के लिए बसंत पंचमी के दिन पीले चावल वाली खिचड़ी बनाकर मां सरस्वती को भोग लगाना एवं खाना चाहिए।

2. पीले रंग के मीठे के अलावा नमकीन का स्वाद लेने के लिए पीले चावल की ‘तहरी’ बना सकते हैं। इस त्योहार पर मां सरस्वती को तहरी का भोग लगाकर उनकी पूजा (Saraswati Puja) की जाती है।

3. पीली मिठाई के रूप में आप राजभोग भी बना सकते हैं।

4. इसके अलावा आप पीले मीठे चावल की खीर, केसरी खीर, बूंदी-लड्डू, ढोकला तथा शीरा और पूरी भी बनाकर देवी सरस्वती को अर्पित कर सकते हैं।

बसंत पंचमी का दूसरा नाम क्या है?

Basant Panchami 2024 Date: हिंदू कैलेंडर के अनुसार बसंत पंचमी का दिन मां सरस्वती को समर्पित है।

यह पर्व माघ महीने के पांचवें दिन मनाया जाता है।

इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है।

माता सरस्वती को ज्ञान, संगीत, कला, विज्ञान एवं शिल्प-कला की देवी के रूप में पूजा जाता है।

बसंत पंचमी (Basant Panchami) को श्री पंचमी और सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है।

यह त्योहार माता सरस्वती के अवतरित होने और वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है।

इसलिए देश के कई हिस्सों में इस पर्व को सरस्वती पूजा (Saraswati Puja) के रूप में भी जाना जाता है।

इस दिन देवी सरस्वती को मां बागीश्वरी, मां भगवती, मां शारदा, मां वीणावादनी और मां वाग्देवी जैसे अनेक नामों से देशभर में पूजा जाता है।

इसमें देवी सरस्वती की पूजा भव्य एवं बड़े धूमधाम से की जाती है।

बसंत पंचमी पर किस मंदिर में जाएं?

1. भगवान ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर

Saraswati Puja 2024: भारत के राजस्थान राज्य के पुष्कर के धन्य क्षेत्र में मां सरस्वती का भव्य और दिव्य मंदिर स्थित है।

पुष्कर दुनिया का एकमात्र वह स्थान है, जहां भगवान ब्रह्मा को समर्पित मंदिर है।

मां सरस्वती भगवान ब्रह्मा की अर्धांगिनी हैं।

यही वजह है कि पुष्कर के इस पवित्र मंदिर में भगवान ब्रह्मा के बगल में उनकी दिव्य पत्नी देवी सरस्वती विराजमान हैं।

संगमरमर से बना यह मंदिर चांदी के सिक्कों से जड़ा हुआ है।

मंदिर के गर्भगृह में भगवान ब्रह्मा की चतुर्मुखी प्रतिमा स्थापित है।

बसंत पंचमी (Basant Panchami) पर देवी सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए पुष्कर स्थित ब्रह्मा मंदिर में ‘बसंत पंचमी समारोह’ का भव्य आयोजन किया जाता है।

2. श्री शारदम्बा मंदिर, चिकमंगलुर

Saraswati Puja 2024: भारत के कर्नाटक राज्य के चिकमंगलुर जिले में तुंगा नदी के किनारे श्रृंगेरी का शारदम्बा मंदिर स्थित है।

इस मंदिर को लगभग 1100 साल पुराना माना जाता है।

कहा जाता है कि इस प्राचीन मंदिर का निर्माण आदि शंकराचार्य जी द्वारा 8वीं सदी में कराया गया था।

देवी सरस्वती को समर्पित यह मंदिर बहुत ही खूबसूरत है।

सह्याद्री पहाड़ियों की गोद में बसे श्रृंगेरी में आदि शंकराचार्य जी द्वारा स्थापित पहला मठ भी है।

श्रृंगेरी शारदम्बा मंदिर के साथ शारदा पीठम के लिए भी प्रसिद्ध है। श्रृंगेरी मंदिर दुनियाभर के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है।

श्रृंगेरी के शारदम्बा मंदिर में बसंत पंचमी (Basant Panchami) को विशेष पर्व के रूप में मनाया जाता है।

और देवी सरस्वती पूजा (Saraswati Puja) हर्ष-उल्लास के साथ की जाती है।

3. श्री ज्ञान सरस्वती मंदिर, बासर

Saraswati Puja 2024: तेलंगाना प्रदेश के निर्मल जिले में बासर गांव स्थित ‘श्री ज्ञान सरस्वती मंदिर’ भारत का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है।

यह पवित्र मंदिर बासर गांव में गोदावरी नदी के तट पर स्थित है।

इसमें माता सरस्वती की भव्य प्रतिमा स्थापित है।

पद्मासन मुद्रा में विराजमान देवी सरस्वती की मूर्ति लगभग 4 फुट ऊंची है।

इस मंदिर की सबसे विशेष खासियत यह है कि मंदिर के एक स्तंभ से संगीत के सातों स्वर सुनाई देते हैं।

इसी खूबी की वजह से बड़ी दूर-दूर से देवी भक्त यहां खींचे चले आते हैं।

बसंत पंचमी (Basant Panchami) के अवसर पर इस मंदिर में देवी सरस्वती पूजा (Saraswati Puja) बड़े धूमधाम से की जाती है।

4. पनाचिक्काडु मंदिर, कोट्टायम

Saraswati Puja 2024: केरल के कोट्टायम जिले के पनाचिकाडु गांव में स्थित है श्री पनाचिक्काडु मंदिर या श्री पनाचिक्कड सरस्वती मंदिर।

देवी सरस्वती को समर्पित इस मंदिर को दक्षिण मूकाम्बिका सरस्वती मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

मंदिर में विराजमान दक्षिणमुखी देवी सरस्वती भक्तों की मुरादें पूर्ण करने के लिए जानी जाती हैं।

इसके अलावा यह पवित्र स्थान यक्षी (मादा पिशाच) और विदेशी जीवों के अनदेखे नजारे के लिए भी प्रसिद्ध है।

यूं तो मंदिर साल के बारह महीने भक्तों के पूजन-दर्शन के लिए खुला रहता है।

पर बसंत पंचमी और नवरात्रि के दौरान यहां विशेष उत्सव आयोजित किए जाते हैं।

इस लेख में आपने जाना – Saraswati Puja 2024 । Basant Panchami Hindi Story । Basant Panchami Muhurat 2024 । Saraswati Puja Vidhi and Mantra । Basant Panchami 2024 Date

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