Shiv Aarti Hindi Mein: ॐ जय शिव ओंकारा

Shiv Aarti Hindi Mein: महादेव की इस आरती में अतिरिक्त जुड़ाव मिल सकता है। इस आरती को भव्य बनाने का श्रेय पंडित श्री अरविंद्र त्रिपाठी जी को जाता है। उन्हीं के मुखारबिंदु और मार्गदर्शन से प्रेरित होकर, मैं श्री शिव जी की आरती को आपके समक्ष नए अंदाज़ में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहा हूं।

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।

मंगलम भगवान शंभू, मंगलम रिषीबध्वजा।
मंगलम पार्वती नाथो, मंगलाय तनो हरि।।

मंगलम भगवान विष्णु, मंगलम गरुड़ ध्वज।
मंगलम पुण्डरीकाक्ष, मंगलाय तनो हरि।।

जपाकुसुम संकाशं, काश्यपेयं महद्युतिं।
तमोरिसर्व पापघ्नं, प्रणतोस्मि दिवाकरं।।

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं, अनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं, रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।।

श्री हनुमान चालीसा दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

श्री हनुमान चालीसा चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचति केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै।।

संकर स्वयं केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बंदन।

बिद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।

भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मन्त्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना।।

जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रच्छक काहू को डर ना।

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक ते कांपै।।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।

सब पर रामराज सिर ताजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।।

और मनोरथ जो कोइ लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।

साधु संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सादर हो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम जनम के दुख बिसरावै।

अंत काल रघुबर पुर जाई।
जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जय जय जय हनुमान गोसाई।
कृपा करहु गुरु देव की नाई।।

यह सतबार पाठ कर जोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।।

जो यह पढै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महं डेरा।

श्री हनुमान चालीसा दोहा

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

सिया बलरामचंद्र की जय।
पवनसुत हनुमान की जय।
उमापति महादेव की जय।
रमापति रामचंद्र की जय।
वृन्दावन कृष्ण वल्लभ जी की जय।
अयोध्या रामलला की जय।
बोलो भाई सब संतन की जय।
बोलो भाई सब भक्तन की जय।
अपने-अपने माता-पिता, श्री गुरु गोविन्द की जय।

मां दुर्गा जी की आरती यहां पढ़ें: https://gyanmanch.in/maa-durga-aarti-lyrics

॥ श्री शिव जी की आरती ॥

Shiv Aarti Hindi Mein:

ॐ जय शिव ओंकारा, मन भज शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव, भोले-भोलेनाथ महाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

॥ ॐ हर-हर-हर महादेव ॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे, भोले पंचानन राजे।
हंसासन गरुड़ासन, हंसासन गरुड़ासन, वृषवाहन साजे॥

॥ ॐ हर-हर-हर महादेव ॥

दो भुज चार चतुर्भुज, दस भुज अति सोहे, भोले दस भुज अति सोहे।
तीनों रूप निरखता, शिव जी को रूप चमकता, त्रिभुवन जन मोहे॥

॥ ॐ हर-हर-हर महादेव ॥

अक्षमाला बनमाला मुंडमाला धारी, भोले मुंडमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहै, केशर मृगमद सोहै भोले शुभकारी॥

॥ ॐ हर-हर-हर महादेव ॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे, भोले बाघम्बर अंगे।
ब्रह्मादिक सनकादिक, ब्रह्मादिक सनकादिक भूतादिक संगे॥

॥ ॐ हर-हर-हर महादेव ॥

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता, भोले चक्र त्रिशूल धर्ता।
जगकर्ता जगभर्ता, सुखकर्ता दुखहर्ता, जग-पालनकर्ता॥

॥ ॐ हर-हर-हर महादेव ॥

काशी में विश्वनाथ विराजत, नंदी ब्रह्मचारी, भोले नंदी ब्रह्मचारी।
नित उठि भोग लगावत, शिव जी को दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥

॥ ॐ हर-हर-हर महादेव ॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका, भोले जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये, ओंकारेश्वर मध्ये, ये तीनों एका॥

॥ ॐ हर-हर-हर महादेव ॥

त्रिगुण स्वामीजी की आरती जो कोई नर गावे, भोले प्रेम सहित गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मन भजत हरिहर स्वामी, मनवांछित फल पावे॥

॥ ॐ हर-हर-हर महादेव ॥

ॐ जय शिव ओंकारा, मन भज शिव ओंकारा।
मन रत शिव ओंकारा, शिव ऊपर जलधारा।
शिव रहते मतवाला, शिव भांग पियन वाला।
शिव ओढ़त मृगछाला, जटा में गंग विराजत।
मस्तक पर चंद्र विराजत, आसन मृगछाला।

॥ ॐ हर-हर-हर महादेव ॥

Shiv Aarti Hindi Mein

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा वसतं हृदयाविन्दे, भवंभावनी सहितं नमामि।।

त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बंधू च सखा त्वमेव।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव।।

Shiv Aarti Hindi Mein

हरे राम-हरे राम
राम-राम हरे-हरे
हरे कृष्ण-हरे कृष्ण
कृष्ण-कृष्ण हरे-हरे
हरे राम-हरे राम
राम-राम हरे-हरे
हरे कृष्ण-हरे कृष्ण
कृष्ण-कृष्ण हरे-हरे…

आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्‌।
लोकाभिरामं श्रीरामं, भूयो-भूयो नमाम्यहम्‌॥

सर्वा बाधाविनिर्मुक्तो धन धान्य सुतान्वितः।
मनुष्यो मतप्रसादेन भविष्यति न संशय:।।

भगवान श्री राम की प्रार्थना

श्री राम चंद्र कृपालु भजमन, हरण भवभय दारुणम्।
नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।

कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।
पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।

भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।
रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।

सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।
आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।

इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।

मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।
करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।

एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।
तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।

जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।

मो सम दीन न दीन हित, तुम्ह समान रघुबीर।
अस बिचारि रघुबंस मणि, हरहु बिषम भव भीर॥

कामिहि नारि पिआरि जिमि, लोभिहि प्रिय जिमि दाम।
तिमि रघुनाथ निरंतर, प्रिय लागहु मोहि राम॥

अर्थ न धर्म न काम रुचि,‌ गति न चहु निर्वाण।
जनम-जनम रचि राम पद, यह वरदान न आन।।

बार-बार वर मांगहुं, हरषि देहु श्री रंग।
पद सरोज अनपायनी, भगति सदा सत्संग।।

प्रनतपाल रघुवंशमणि करुणासिंधु खरारि।
गए शरण प्रभु राखिहौं सब अपराध विसारि।।

कर चरण कृतं वाक्कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम्।
विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व जय-जय करणाब्धे श्री महादेव शम्भो॥

मंत्रपुष्पांजली समर्पयामि। नमस्करोमि।

हरे राम हरे रामा, राम-राम हरे-हरे।
हरे कृष्ण हरे कृष्णा, कृष्ण-कृष्ण हरे-हरे।।

हरे राम हरे रामा, राम-राम हरे-हरे।
हरे कृष्ण हरे कृष्णा, कृष्ण-कृष्ण हरे-हरे।।

हरे राम हरे रामा, राम-राम हरे-हरे।
हरे कृष्ण हरे कृष्णा, कृष्ण-कृष्ण हरे-हरे।।

जयकारा

बोल सांचे दरबार की जय।
गणपति गजानन महाराज की जय।
अंबे मात की जय।
शंकर भगवान की जय।
सियावर रामचंद्र की जय।
हनुमान जी महाराज की जय।
बाबा विश्वनाथ धाम की जय।
जगन्नाथ भगवान की जय।

धर्म की जय हो। अधर्म का नाश हो।
प्राणियों में सद्भावना हो। विश्व का कल्याण हो।।

गौ-माता की जय। गौ हत्या बंद हो।
सत्य-सनातन धर्म की जय हो।
आज के आनंद की जय हो।
सभी भक्तों की जय हो। सभी संतों की जय हो।
सभी ऋषि-महात्माओं की जय हो।
अपने-अपने माता-पिता की जय हो।
गुरु गोविंद की जय हो।

ॐ नमः पार्वती पतये, हर-हर महादेव!

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