Shiv Puja Vidhi In Hindi: कष्ट को करें नष्ट

Shiv Puja Vidhi In Hindi: ज्ञानमंच के इस आर्टिकल में भगवान शिव पूजा-अर्चना (Shiv Puja) संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध है। जैसे कि पूजा की सही विधि और तरीका (Shiv Puja Sahi Vidhi-Tarika) क्या है? शिव पूजन के दौरान किन नियमों (Shiv Puja Ke Niyam) का सावधानी पूर्वक पालन करना चाहिए? शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय कौन-सा मंत्र (Shivling Jal Abhishek Mantra) बोलना चाहिए? आसान हिंदी (Hindi) में जानिए कि भगवान शिव की पूजा कैसे करें (Shiv Puja Kaise Kare)?

Shiv Puja Vidhi In Hindi: जिस तरह देवों के देव महादेव अनंत हैं, उसी तरह उनके भक्त अनन्य हैं।

आप भारत की जिस दिशा में जाएंगे, भोले बाबा का मंदिर जरूर पाएंगे।

शहर हो या गांव, जंगल हो या पहाड़, नदी हो या समुद्र, भगवान शिव (Shiv) का मंदिर हर जगह मौजूद है।

हर गांव में एक से अधिक मंदिर के दर्शन किए जा सकते हैं।

बड़े-बड़े शहरों की गलियों में महादेव का शिवालय दिखाई देता है।

देश के 8 राज्यों में 12 ज्योतिर्लिंग के दिव्य दर्शन किए जा सकते हैं।

जिनमें दो ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ और श्री नागेश्वर मंदिर, गुजरात में स्थित हैं।

श्री मल्लिकार्जुन मंदिर, आंध्र प्रदेश और श्री रामेश्‍वरम मंदिर, तमिलनाडु की शान हैं।

श्री भीमाशंकर, श्री त्र्यंबकेश्वर और श्री घृष्णेश्वर मंदिर, महाराष्ट्र की जान हैं।

वहीं श्री महाकालेश्वर और श्री ओंकारेश्वर मंदिर, मध्य प्रदेश के दिल की धड़कन हैं।

श्री केदारनाथ मंदिर, देवभूमि उत्तराखंड की पहचान है।

इसी तरह श्री बाबा बैद्यनाथ मंदिर, झारखंड और श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, उत्तर प्रदेश की गरिमा हैं।

लोग कहते हैं कि भगवान शंकर बहुत दयालु हैं। मात्र एक लोटा जल (Jal) से प्रसन्न हो जाते हैं।

भगवान शिव (Shiv) सोना-चांदी या हीरे-मोती नहीं, बल्कि भक्ति-भाव चाहते हैं।

यही वजह है कि इन्हें भोलेनाथ कहा जाता है।

भगवान शिव को क्या पसंद है?

Shiv Puja Vidhi In Hindi: जैसा कि हर शिव (Shiv) भक्त जानते हैं कि उनके प्रिय आराध्य को गंगाजल, बेलपत्र, बेल-फल, भांग, धतूरा, रुद्राक्ष आदि बहुत पसंद हैं।

श्री शिवपुराण के अनुसार भगवान शंकर को धतूरे का फल, फूल और पत्ते बेहद प्रिय हैं।

माना जाता है कि धतूरे का फल शिवलिंग (Shivling) पर नियमित चढ़ाने से संतान-सुख की प्राप्ति होती है।

इसी तरह पुराणों में रंगों के विशेष महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया है।

कहते हैं कि भगवान शिव की पूजा (Shiv Puja) करते समय सफेद, हरे, पीले, लाल या आसमानी रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।

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इन रंगों को भगवान शिव के प्रिय रंग माने जाते हैं।

मेंटल स्ट्रेस या किसी तरह की अन्य मानसिक और शारीरिक परेशानी वाले व्यक्ति को सोमवार के दिन सफेद रंग की वस्तुएं दान करनी चाहिए।

इससे भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं।

शिव पूजा से सांसारिक जीवन खुशहाल (Shiv Puja Vidhi In Hindi)

Shiv Puja Ke Niyam-Sahi Tarika: पंडित, ज्योतिष और जानकर कहते हैं कि जिस घर में भगवान शिव परिवार की नियमित रूप से पूजा होती है, वहां सदा सुख, शांति, समृद्धि और सफलता का माहौल होता है।

भगवान शिव के परिवार में स्वयं भोलेनाथ, माता पार्वती, भगवान गणेश, भगवान कार्तिकेय और उनके गण नंदी जी आते हैं।

यानी घर के मंदिर में इन सभी की मूर्ति स्थापित करके हर दिन पूजा (Puja) करनी चाहिए।

ऐसा इसलिए किया जाता है, ताकि भगवान अपने परिवार के साथ आपके घर-मंदिर में स्थायी रूप से निवास करें।

आसान शब्दों में कहा जाए तो भगवान शिव (Shiv) अपने परिवार के बिना अकेले नहीं रह सकते हैं।

भगवान भोलेनाथ को आप जिस स्वरूप या मनोकामना से पूजेंगे, वे आपको उसी अनुसार प्राप्त होंगे।

अगर सांसारिक जीवन में रहते हुए उनकी पूजा-अर्चना अपनी या परिवार की भलाई के मकसद से की जाती है तो आपको वही प्राप्त होगा।

यदि मन में वैराग की भावना से भगवान शिव की पूजा (Shiv Puja करेंगे तो आपको उसी के अनुसार फल भी मिलेगा।

शिव परिवार की पूजा क्यों जरूरी है? (Shiv Puja Vidhi In Hindi)

Shiv Puja Ke Niyam-Sahi Tarika: श्री शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव की इच्छा से ही इस सृष्टि की रचना भगवान ब्रह्मा जी द्वारा की गई थी।

इसलिए पंडित यह बार-बार कहते हैं कि भगवान शिव के साथ माता पार्वती, भगवान गणेश, स्वामी कार्तिकेय और नंदी जी की मूर्ति रखनी चाहिए।

कहते हैं कि जिस घर में पूरे शिव परिवार की पूजा (Shiv Puja) एक साथ नियमित रूप से होती है, वहां हमेशा सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा निवास करती है।

शुभ फल की प्राप्ति होती है। भगवान शिव परिवार की पूजा एक साथ करने से पूजा का फल जल्दी मिलता है।

शिव पूजा का सही तरीका (Shiv Puja Sahi Tarika)

Shiv Puja Ke Niyam-Sahi Tarika: कभी-कभी सही (Sahi) ज्ञान के अभाव में इंसान भगवान शिव पूजा (Shiv Puja) के दौरान छोटी-मोटी गलतियां कर देता है।

इन गलतियों में एक गलती आम है, जिसे अक्सर लोगों द्वारा करते देखा जाता है।

इसका मुख्य कारण सही (Sahi) जानकारी का न होना है।

हर-हर महादेव के नाम से प्रसिद्ध पंडित और ज्योतिषाचार्य जी कहते हैं कि भगवान शिव (Shiv) को कभी तुलसी का पत्ता नहीं चढ़ाना चाहिए।

पूजा-पाठ, हवन या रुद्राभिषेक आदि करते-कराते समय भी तुलसी या उसके पत्ते का उपयोग नहीं करना चाहिए।

साथ ही भगवान भोलेनाथ को अर्पित किए जाने वाले किसी भी तरह के प्रसाद या भोग में भी तुलसी के पत्ते नहीं डालने चाहिए।

अक्सर घरों की महिलाओं और कई मंदिरों के पंडितों द्वारा तुलसी के पत्ते का उपयोग प्रसाद में मिलाने के रूप में किया जाता है।

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पंडित और ज्योतिषाचार्य हर-हर महादेव जी कहते हैं कि तुलसी का पत्ता प्रसाद में मिलाने से वह भोग भगवान शिव की जगह भगवान विष्णु को लग जाता है।

यदि कोई आपके सामने भोजन परोसे, लेकिन वह भोग कोई और खा जाए, तो क्या यह आपको ठीक लगेगा?

तुलसी का पत्ता प्रसाद में मिलाने से यूं तो भोग भगवान श्री हरि विष्णु को लगता है, जो कि भगवान शिव के आराध्य हैं।

इससे महादेव भले ही रुष्ट न होते हों, पर भगवान विष्णु अवश्य क्रोधित होते होंगे।

जैसे भगवान विष्णु भगवान शिव के प्रिय अराध्य हैं। उसी तरह भगवान शिव श्री हरि विष्णु के प्रिय अराध्य हैं।

ऐसे में क्या भगवान विष्णु अपने अराध्य का अपमान बार-बार बर्दाश्त करेंगे?

खुद ही सोचिए, उत्तर मिल जाएगा।

अनुभवी, ज्ञानी पंडित और ज्योतिषाचार्य हर-हर महादेव जी ने बताया कि भगवान शिव के प्रसाद में तुलसी की जगह बेलपत्र को शामिल किया जा सकता है।

बेलपत्र नहीं हैं तो एक फूल से भी काम चल सकता है।

इस तरह सही तरीके (Sahi Tarika) से भगवान शिव की पूजा (Shiv Puja) सही विधि (Vidhi) से हर दिन की जा सकती है।

भगवान शिव को तुलसी क्यों नहीं चढ़ती? (Shiv Puja Vidhi In Hindi)

Shiv Puja Ke Niyam-Sahi Tarika: अनुभवी और जानकारों का मानना है कि तुलसी का पत्ता भगवान शिव को नहीं चढ़ाना चाहिए।

कहते हैं कि अपनी जान से प्रिय पति और असुरों के राजा जलंधर का वध महादेव द्वारा किए जाने के बाद से वृंदा यानी माता तुलसी ने अपने हर अंग से भगवान शिव की पूजा लेने से इनकार कर दिया था।

देवी वृंदा को माता तुलसी का पूर्वजन्म माना है।

इसी वजह से भगवान शिव को तुलसी या तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाए जाते हैं।

यह भी कहा जाता है कि भगवान विष्णु की पूजा तभी पूरी होती है, जब पूजन के दौरान तुलसी के पत्तों को प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाए।

यानी श्री हरि विष्णु तुलसी को तभी स्वीकार करते हैं या तुलसी आपकी पूजा तभी स्वीकार करती हैं, जब उन्हें किसी प्रसाद के रूप में भगवान विष्णु को अर्पित किया जाता है।

सही नियम (Sahi Niyam) के अनुसार शिव पूजा (Shiv Puja) में तुलसी नहीं चढ़ाई जाती है।

तुलसी के अलावा शंख, नारियल पानी, हल्दी, रोली को भी शिव पूजा (Shiv Puja) में शामिल नहीं किया जाता है।

इसी तरह भगवान शिव को कनेर, कमल, लाल रंग के फूल, केतकी और केवड़े के फूल भी नहीं चढ़ाए जाते हैं।

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सही तरीका या सही विधि (Sahi Tarika, Vidhi) से भगवान शिव की पूजा (Shiv Puja) करने वाले भक्त को मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।

घर में कितना बड़ा शिवलिंग स्थापित करें? Shiv Puja Vidhi In Hindi:

Shiv Puja Kaise Kare: श्री शिवपुराण में बताया गया है कि घर में शिवलिंग (Shivling) स्थापित करते समय शिवलिंग के आकार पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

ऐसी मान्यता है कि बड़ा एवं भव्य शिवलिंग (Shivling) केवल मंदिरों में ही स्थापित करना चाहिए।

यदि कोई भक्त अपने घर के मंदिर में शिवलिंग (Shivling) स्थापित करना चाहता है तो छोटा-सा शिवलिंग (Shivling) स्थापित करना शुभ माना जाता है।

विशेषज्ञों की मानें तो घर में हाथ के अंगूठे के पहले वाले भाग से बड़ा शिवलिंग (Shivling) नहीं रखना चाहिए।

मतलब जब घर में शिवलिंग (Shivling) स्थापित करने का मन करे तो अंगूठे के पहले वाले भाग से थोड़ा छोटा शिवलिंग (Shivling) स्थापित करें।

कुल मिलाकर शिवलिंग (Shivling) का आकार 4 इंच से ऊपर नहीं होना चाहिए।

याद रहे कि शिवलिंग (Shivling) के साथ माता पार्वती जी, भगवान गणेश जी, कार्तिकेय स्वामी जी और नंदी जी की छोटी-सी प्रतिमा अवश्य रखें।

घर के मंदिर के आसपास साफ-सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए।

रोज सुबह-शाम शिवलिंग (Shivling) के पास दीपक जलाना चाहिए।

पूजा, बेलपत्र और भोग आदि लगाना चाहिए।

भगवान शिव को जल कैसे चढ़ाएं (Jal Abhishek Sahi Tarika)

Shiv Puja Kaise Kare: जानकारों का कहना है कि शिवलिंग पर कभी शंख से जल नहीं चढ़ाना चाहिए।

शिवलिंग (Shivling) पर केवल सादा और स्वच्छ जल या गंगाजल चढ़ाना चाहिए।

बहुत से लोग जल (Jal) में फूल, तिल, आदि जैसी सामग्रियां मिलाकर जलाभिषेक (Jal Abhishek) करते हैं।

जबकि ऐसा करना गलत माना जाता है।

जानकर पंडित कहते हैं कि जल (Jal) में किसी तरह की कोई सामग्री नहीं मिलानी चाहिए।

कहते हैं कि शिवलिंग (Shivling) पर जल (Jal) हमेशा तांबे के लोटे से ही अर्पित करना चाहिए।

भोलेनाथ को जलाभिषेक (Jal Abhishek) लोहे या स्टील के बर्तन से नहीं करना चाहिए।

ध्यान देने वाली बात यह भी है कि कभी भी पूर्व दिशा की ओर मुंह करके जल (Jal) नहीं चढ़ाना चाहिए।

भगवान शिव को जल (Jal) उत्तर दिशा की ओर मुख करके अर्पित करना शुभ माना गया है।

कहते हैं कि भगवान शिव उत्तर दिशा यानी कैलाश पर्वत में निवास करते हैं।

यही वजह है कि इस दिशा में शिव जी की मूर्ति या फोटो लगाना बेहद शुभ माना जाता है।

आइए जानते हैं कि शिवलिंग (Shivling) पर जल (Jal) किस दिशा में बैठकर चढ़ाना चाहिए।

किस दिशा में मुख करके जल चढ़ाएं? (Shivling Jal Abhishek)

Shiv Puja Ke Niyam-Sahi Tarika: पुराणों में उत्तर दिशा को देवी-देवाताओं और ईशान दिशा को भगवान शिव की दिशा के रूप में माना गया है।

कहा जाता है कि शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय भक्त का मुंह उत्तर या ईशान दिशा की ओर होना चाहिए।

इस दिशा को ज्यादा शुभ फलदायक दिशा मानी जाती है।

इसके अलावा पूर्व और पश्‍चिम दिशा में मुख करके भी जल (Jal) चढ़ा सकते हैं, लेकिन कोई अन्य दिशा में मुख करके जल न चढ़ाएं।

शिवलिंग, फोटो आदि की जगह एकदम साफ रखनी चाहिए। भगवान शिव जी के आसपास गंदगी बिल्कुल न रखें।

उत्तर दिशा में मुख करके जल चढ़ाने से भगवान शिव जी के साथ-साथ माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है।

इसी तरह मनुष्य के जीवन में उत्तर और ईशान दिशा का बेहद महत्त्व है।

शिवलिंग पर जल कब चढ़ाएं? (Shivling Jal Abhishek)

Shiv Puja Ke Niyam-Sahi Tarika: श्री शिवपुराण ज्ञान का भंडार है।

इस पवित्र ग्रंथ के प्रत्येक पन्ने पर भगवान शिव की पूजा या शिवलिंग आराधना के बारे में विस्तार से जिक्र मिलता है।

इसी तरह प्रत्येक शिव मंदिर के पंडित, सेवक और ज्ञानी भक्त कहते हैं कि शिवलिंग पर सुबह 5-11 बजे के बीच जल अर्पित (Jal Abhishek) करना शुभ होता है।

सुबह जितनी जल्दी उठकर भगवान शिव की पूजा कर लें, उतना ही अच्छा होता है।

लोग कहते हैं कि शाम के समय शिवलिंग पर कभी जल अर्पित नहीं करना चाहिए।

शिवलिंग पर चढ़ा जल पीना चाहिए? (Shivling Jal Abhishek)

Shiv Puja Kaise Kare: यूं तो बहुत लोगों को शिवलिंग पर चढ़ने वाले जल को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते देखा जा सकता है।

अक्सर लोग जल चढ़ाने के बाद उसे किसी बर्तन में भर लेते हैं।

खुद भी ग्रहण करते हैं और घर के भीतर चारों ओर छिड़काव भी करते हैं।

जानकारों के अनुसार इस जल को आप प्रसाद के रूप में ग्रहण कर सकते हैं।

श्री शिवपुराण के 22 अध्याय के 18 श्लोक के अनुसार शिवलिंग पर चढ़ा हुआ जल पीना अति शुभ माना गया है।

कहा गया है कि शिवलिंग का जल (Shivling Jal Abhishek) पीने से सभी रोगों से मुक्ति मिलती है।

घर, ऑफिस, दुकान, आदि में नियमित छिड़काव करने से सुख, शांति और समृद्धि की गति सदा बरकरार रहती है।

शिवलिंग पर जल चढ़ाने से लाभ? (Shivling Jal Abhishek)

Shiv Puja Ke Niyam-Sahi Tarika: श्री शिवपुराण की मानें तो शिवलिंग पर जल चढ़ाने से कई फायदे होते हैं।

कहते हैं कि जो व्यक्ति हर दिन प्रातःकाल शिवलिंग पर जल (Shivling Jal Abhishek) चढ़ाता है, वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है।

मात्र एक लोटा जल में भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और सभी रोग-दोषों से मुक्त करते हैं।

शिवलिंग पर जल चढ़ाने (Shivling Jal Abhishek) से शारीरिक और मानसिक वृद्धि होती है।

प्रतिदिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने से कुंडली में मौजूद सभी अशुभ ग्रह दूर भाग जाते हैं।

धन-संपदा के साथ व्यापार और सफलता में वृद्धि होती है।

मानसिक तनाव और कर्ज से मुक्ति मिलती है। सभी तरह के दुःख और पाप नष्ट हो जाते हैं।

यदि आप शारीरिक और मानसिक कष्ट को नष्ट करना चाहते हैं तो प्रतिदिन शिवलिंग पर जल चढ़ाना (Shivling Jal Abhishek) शुरू कर दें।

सोने, चांदी या तांबे के लोटे से शिवलिंग पर जल चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है।

शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल जिस दिशा से निकलता है, उसे कभी लांघना नहीं चाहिए।

कहते हैं कि इससे वास्तु दोष लगता है।

कहा जाता है कि शिवलिंग पर जल हमेशा बैठकर चढ़ाना चाहिए।

रुद्राभिषेक के दौरान भी जल आदि बैठकर प्रेम-भाव से अर्पित करना चाहिए।

खड़े होकर शिवलिंग पर चढ़ने वाला जल कभी भगवान शिव को प्राप्त नहीं होता।

जब जल भगवान को समर्पित नहीं होगा तो उसका लाभ कहां मिलेगा?

इसी तरह शिवलिंग के पास दीपक जलाने से मन को शांति मिलती है।

शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग के पास सुबह-शाम दीपक जलाने से अत्यंत पुण्य की प्राप्ति होती है।

शिवलिंग की पूजा कैसे करें?

Shiv Puja Kaise Kare: कहते हैं कि अगर घर के मंदिर में शिवलिंग स्थापित हैं तो उनका ख्याल परिवार के एक सदस्य की तरह रखना चाहिए।

मंदिर के आसपास और भगवान की मूर्ति या लिंग के पास स्वच्छता का विशेष ध्यान रखाना चाहिए।

भगवान शिव की पूजा से पहले उन्हें अच्छे से नहलाना चाहिए।

उन्हें स्वच्छ कपड़े से पोंछना चाहिए। यही प्रक्रिया घर और शिव मंदिर में अपनानी चाहिए।

भगवान शिव को जल अर्पित करने से पहले उन्हें अच्छी तरह से साफ कर देना चाहिए।

घर पर प्रतिदिन शिवलिंग की पूजा करने से पहले आचमन करना चाहिए।

उसके बाद शिवलिंग पर गंगाजल या शुद्ध जल से अभिषेक (Shivling Jal Abhishek) करना चाहिए।

इसके बाद शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाना चाहिए।

फिर बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल, भोग आदि प्रेमपूर्वक अर्पित करना चाहिए।

इन सभी क्रियाओं के पूर्ण होने के बाद पञ्चाक्षर मन्त्र (Mantra) ‘ॐ नमः शिवाय’ का 108 बार जाप करना चाहिए।

इस बात का ध्यान रखें कि शिवलिंग पर 108 चावल के दाने चढ़ाने चाहिए।

चावल के दाने टूटे हुए नहीं होने चाहिए।

भगवान शिव को अक्षत, चंदन, धतूरा, दूध, आक, गंगाजल और बेलपत्र आदि अर्पित करना चाहिए।

अब घंटी, घंटा, डमरू आदि को बजाते हुए प्रेम पूर्वक भगवान शिव की सुबह-शाम आरती करनी चाहिए।

आरती से पहले श्री हनुमान चालीसा और आरती के बाद भगवान श्री राम की स्तुति अवश्य करनी चाहिए।

भगवान शिव की आरती सही विधि और सही तरीके से करने के लिए नीचे लिंक पर जाएं।

शुद्ध शिव आरती यहां पढ़ें

Shiv Puja Kaise Kare: घर में सुख-शांति और खुशहाली बरकरार रखने के लिए हर सोमवार के दिन भगवान शिव को घी, शक्कर और गेंहू के आटे का बना भोग अर्पित करके आरती करनी चाहिए।

इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और शुभ आशीर्वाद देते हैं।

महादेव को प्रसन्न करने के लिए ‘ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥’ मंत्र (Mantra) जपना चाहिए।

इस मंत्र (Mantra) को बहुत ही शक्तिशाली माना गया है।

कहते हैं कि इस मंत्र (Mantra) के अखंड जाप से मृत्यु पर भी विजय पाई जा सकती है।

आइए जानते हैं कि शिवलिंग पर जलाभिषेक (Shivling Jal Abhishek) करते समय कौन-सा मंत्र (Mantra) बोलना चाहिए?

यह भी देखें: पाठ जो दिलाए भोलेनाथ का साथ

जल चढ़ाते समय कौन-सा मंत्र बोलें? (Shivling Jal Abhishek Mantra)

Shiv Puja Kaise Kare: देवों के देव महादेव की पूजा करने से सभी देवी-देवता प्रसन्न होते हैं।

सोमवार का दिन भगवान का सबसे विशेष दिन माना गया है।

पूरा सावन महीना भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा-पाठ के लिए समर्पित है।

सावन सोमवार के दिन जलाभिषेक करने से कई गुना अधिक पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

इसी तरह महाशिवरात्रि का पावन त्योहार भगवान शिव का सबसे पवित्र दिन माना जाता है।

इन दिनों के अलावा भगवान भोलेनाथ की पूजा बारहों महीने की जाती है।

धार्मिक मान्यता है कि शिवलिंग पर हर दिन जलाभिषेक किया जाना चाहिए।

भगवान शिव को जलाभिषेक या दुग्धाभिषेक करने वाले व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की बढ़ोतरी होती है।

आइए जानें शिवलिंग पर जलाभिषेक करते समय बोले जाने वाले मंत्र (Shivling Jal Abhishek Mantra) के बारे में।

शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय निम्न मन्त्रों (Mantra) का जाप किया जा सकता है।
Shivling Jal Abhishek Mantra:

ॐ नमः शिवाय। ॐ विरूपाक्षाय नमः।

ॐ विश्वरूपिणे नम:। ॐ शर्वाय नम:।

इसी तरह नीचे दिए मन्त्रों का जाप भी किया जा सकता है।

Shivling Jal Abhishek Mantra:

ॐ त्र्यम्बकाय नम:। ॐ भैरवाय नम:। ॐ कपर्दिने नमः ।

ॐ शूलपाणये नम:। ॐ पशुपतये नम:। ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।

Shivling Jal Abhishek Mantra:

ॐ इं क्षं मं औं अं। ॐ प्रौं ह्रीं ठः। ॐ ईशानाय नम:।

ॐ महेश्वराय नम:। ॐ नमो नीलकण्ठाय। ॐ पार्वतीपतये नमः।

Shivling Jal Abhishek Mantra के बाद संक्षिप्त में जानिए भगवान शिव के बारे में।

भगवान शिव कौन हैं? (Shiv Puja Vidhi In Hindi)

विकिपीडिया के अनुसार त्रिदेवों में भगवान शिव को संहार का देवता माना जाता है।

भगवान शंकर को दया और कल्‍याण करने वाले महादेव के रूप में पूजा की जाती है।

ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव लय और प्रलय दोनों को अपने अधीन रखते हैं।

पार्वती पतये हर हर महादेव को अपनी दयालु और रौद्र रूप दोनों के लिए विख्यात हैं।

दिलचस्प बात यह है कि भगवान भोलेनाथ को वैवाहिक और सांसारिक जीवन जीने वाले भक्तों के अलावा सभी देवी-देवता, साधु-संत, सुर-असुर सब पूजते हैं और भगवान अपने सभी भक्तों को समान दृष्टि से देखते हैं।

भगवान शिव को अन्य देवों से बढ़कर माना जाता है। इसी कारण से इन्हें महादेव कहा जाता है।

सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति एवं संहार के अधिपति भगवान भोला शिव हैं।

त्रिदेवों में भगवान शिव अनादि और सृष्टि प्रक्रिया के आदि स्रोत हैं।

यह भी देखें: जब ज़िद बनी जुदाई

यह आर्टिकल Shiv Puja Vidhi In Hindi, Shiv Puja Ke Niyam, Shiv Puja Sahi Tarika, Shivling Jal Abhishek Mantra, Shiv Puja Kaise Kare पर आधारित है।

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