Somnath Temple Gujarat: दिव्य ज्योतिर्लिंग, भव्य उमंग  

इस एक आर्टिकल के जरिए जानिए श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना (Somnath Jyotirlinga ki Sthapana), श्री सोमनाथ मंदिर का इतिहास, Somnath Jyotirlinga Temple Gujarat की मौजूदा अद्भुत खूबियां, होटल, कैसे पहुंचे सोमनाथ सहित हर एक जानकारी बेहद सटीक अनुभव के साथ। और अगर आपने इस लेख को नहीं पढ़ा, तो भगवान सोमनाथ को नहीं जाना।

1Somnath Jyotirlinga ki Sthapana
2श्री सोमनाथ मंदिर का इतिहास
3श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग कहां है?
4श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग कैसे पहुंचें?
5श्री सोमनाथ मंदिर का वर्तमान स्वरुप
6श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग में होटल?
7श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग कब जाएं?
8Somnath Jyotirlinga Gujarat ट्रेन से कैसे पहुंचें?
9 Somnath Jyotirlinga Gujarat बस से कैसे पहुंचें?
10 श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन का समय
11 ध्यान देने वाली बातें
12 व्यक्तिगत अनुभव (Personal Experience
13 आकर्षण मंदिर के भीतर
Somnath Jyotirlinga ki Sthapana की कहानी

चलिए, सबसे पहले जानते हैं कि सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना (Somnath Jyotirlinga ki Sthapana) कैसे हुई?

Somnath Jyotirlinga ki Sthapana

भगवान ब्रह्मा जी के पुत्र दक्ष प्रजापति कई अनमोल बेटियों के पिता थे। माता सती दक्ष प्रजापति की पुत्री और भगवान शिव की अर्धांगिनी थी।

भगवान शिव के ससुर राजा दक्ष चंद्रदेव के भी ससुर थे।

राजा दक्ष की 27 कन्याओं के पति चंद्रदेव थे। अपनी 27 पत्नियों में चंद्रदेव, देवी रोहिणी से सबसे ज़्यादा प्रेम करते थे।

देवी रोहिणी की अद्भुत सुंदरता के आगे उन्हें कोई और चेहरा नहीं जंचता था।

ज़्यादा खूबसूरती से ज़्यादा आकर्षण बढ़ता है। यही मधुर आकर्षण प्रेम का विशाल रूप ले लेता है।

फिर मन ज़िम्मेदारियों से भागने लगता है। क्योंकि, प्रेमी मन को चाहिए होता है हर पल का साथ।

Somnath Jyotirlinga ki Sthapana

चंद्रदेव जी देवी रोहिणी के प्यार में इस कदर डूब गए कि उन्हें यह भी याद नहीं रहा कि उनकी 26 पत्नियां और हैं, जो उन पर पूरा अधिकार रखती हैं। उनसे प्रेम करती हैं।

चंद्रदेव के एकतरफा प्रेम से बहनों के मधुर संबंध में खटास पैदा हो गया।

सभी बहनें देवी रोहिणी से जलन रखने लगीं। एक दिन वही अंदर की जलन, नफ़रत की ज्वाला बन गई।

उड़ते-उड़ते ख़बर राजा दक्ष के कानों में जा पहुंची। चंद्रदेव के इस सौतेले व्यवहार से उन्हें बहुत पीड़ा हुई।

उन्होंने अपनी 27 कन्याओं का हाथ चंद्रदेव के हाथ में इस उम्मीद के साथ दिया था कि वे उन सभी का समान रूप से ख्याल रखेंगे।

प्रेम और सम्मान देंगे।

Somnath Jyotirlinga ki Sthapana

प्रजापति की कन्या पिता वाली पीड़ा ने भयंकर क्रोध का रूप ले लिया। उन्होंने चंद्रदेव को शाप दिया कि जिस खूबसूरती पर तुम्हें इतना अभिमान है, वह सदा के लिए भस्म हो जाए।

दक्ष जी के शाप से चंद्रदेव जी धीरे-धीरे अपनी चमक और अस्तित्व खोने लगे।

“क्या चाँद के बिना जगत का पालन संभव है?” भगवान ब्रह्मा जी ने सोचा और चंद्रदेव को इस शाप से मुक्ति के लिए उपाय बताया।

उन्होंने भारत के प्रभास क्षेत्र यानी गुजरात के सोमनाथ में तपस्या करने के लिए कहा।

देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने के लिए कहा।

मार्गदर्शन पाते ही चंद्रदेव ने सोमनाथ में शिवलिंग की स्थापना की और शुरू हुई घोर तपस्या।

चंद्रदेव का कठोर तप रंग लाया। महादेव प्रसन्न हुए। सोमनाथ की पावन भूमि पर प्रकट हुए।

Somnath Jyotirlinga ki Sthapana

श्री सोमनाथ ही वह पवित्र स्थान है, जहां भगवान शिव ने चंद्रदेव को अपने शीश पर धारण किया।

उन्हें शाप से मुक्ति और अमरत्व वरदान दिया।

इस तरह श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना (Somnath Jyotirlinga ki Sthapana) हुई।

Somnath Temple Gujarat की तस्वीर gyanmanch के सहयोग से

Somnath Jyotirlinga ki Sthapana

शाप मुक्ति के बाद चंद्रदेव ने भगवान भोलेनाथ से माता पार्वती के साथ प्रभास क्षेत्र यानी सोमनाथ (Somnath) में वास करने की प्रार्थना की।

भगवान शिव बड़े दयालु हैं। मान गए चंद्रदेव जी की बात।

तब से यहां भगवान शिव ‘सोमनाथ ज्योतिर्लिंग’ (Somnath Jyotirlinga) में वास करते हैं।

और सारी दुनिया इन्हें ‘श्री सोमनाथ महादेव’ के नाम से जानती है एवं प्रथम ज्योतिर्लिंग (First Jyotirlinga) के रूप में पूजती है।

इस तीर्थयात्रा का वर्णन स्कंदपुराण, श्रीमद्भागवत गीता, शिवपुराण, आदि कई प्राचीन ग्रंथों में मिलता है।

ऋग्वेद के भजन में भगवान सोमेश्वर के साथ-साथ गंगा जी, यमुना जी और पूर्वी सरस्वती जी जैसे महान तीर्थ-स्थलों का उल्लेख मिलता है।

ऐसी और कई भव्यता इस तीर्थधाम की प्राचीनता को दर्शाती है।

Somnath Jyotirlinga ki Sthapana

श्रीमद् आद्य जगद्गुरु शंकराचार्य वैदिक शोध संस्थान, वाराणसी के अध्यक्ष स्वामी श्री गजानंद सरस्वती जी के अनुसार, सर्वप्रथम मंदिर का निर्माण 7,99,25,105 वर्ष पहले किया गया था।

इसकी व्याख्या स्कंद पुराण के प्रभास खंड की परंपराओं में मिलती है।

इस लिहाज से यदि यह कहा जाए कि श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (Somnath Jyotirlinga) अनादि काल से हिंदुओं की आस्था का केंद्र रहा है, तो इसमें कोई हैरानी की बात नहीं।

इस तरह देवों के युग में ही भगवान चंद्रदेव द्वारा श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना (Somnath Jyotirlinga ki Sthapana) हुई थी।

Somnath Jyotirlinga ki Sthapana के बाद सोमनाथ मंदिर के इतिहास को जानना बहुत ज़रूरी है।

किस तरह यह मंदिर कई सदी तक टूटने के बाद भी अपना महत्त्व बरकरार रखा है।

सोमनाथ मंदिर का इतिहास649 ईसा पूर्व

श्री सोमनाथ मंदिर (Somnath Jyotirlinga Temple Gujarat) का वर्णन कई वेदों-पुराणों में मिलता है।

इस ज्योतिर्लिंग की महिमा श्रीमद्भगवद्गीता, स्कंदपुराण और महाभारत जैसे कई पवित्र काव्यों में बताई गई है।

ऐसा कहा जाता है कि सोमनाथ धाम में पहले सोने का भव्य मंदिर हुआ करता था।

उस मंदिर का निर्माण सोमराज यानी चंद्रदेव ने कराया था।

उसके बाद मंदिर का पुनर्निर्माण रावण ने चांदी, भगवान श्री कृष्ण ने लकड़ी और भीमदेव ने पत्थर से करवाया था।

इतिहासकारों के अनुसार, 649 ईसा पूर्व पहले से इस प्राचीन मंदिर (Ancient Temple) के अस्तित्व के प्रमाण मिलते हैं।

श्री सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple Gujarat) का पुनर्निर्माण 649 ईस्वी में वैल्लभी के मैत्रिक राजाओं द्वारा कराया गया था।

दूसरी बार भी मंदिर उसी स्थान पर बना, जहां पहले मौजूद था।

सोमनाथ मंदिर का इतिहास725 ईसा पूर्व

श्री सोमनाथ मंदिर की प्रसिद्धि और ज्योतिर्लिंग (Jyotirlinga) की महिमा दूर तक फैली थी।

भक्तों और श्रद्धालुओं का उस ज़माने में भी ताता लगा रहता था।

लेकिन, 725 ईस्वी में सिंध के सूबेदार अल जुनैद ने उस प्राचीन मंदिर (Temple) को तुड़वा दिया।

यह पहली बार था, जब हिंदू भक्तों की आस्था को उजाड़ा गया था।

सोमनाथ मंदिर का इतिहास815 ईसा पूर्व

अल जुनैद के हमले से 101 वर्षों तक महादेव का यह पवित्र स्थल उजड़ा रहा।

फिर आया 815 ईस्वी।

प्रतिहार राजा नागभट्ट ने श्री सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple Gujarat) का पुनर्निर्माण करवाया।

एक बार फिर भक्तों की भीड़ मंदिर में बढ़ने लगी।

श्री सोमनाथ महादेव की कृपा से जैसे-जैसे भक्तों की संख्या बढ़ी, मंदिर समृद्ध होते गया।

सोमनाथ मंदिर का इतिहाससन 1024

बढ़ते समय के साथ श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (Somnath Jyotirlinga) की महिमा विदेशों तक बढ़ती गई।

1024 का दौर था। श्री सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple Gujarat) में समृद्धि और खुशहाली का माहौल था।

300 संगीतकार, 500 नर्तकियां और 300 नाई मंदिर में निवास करते थे।

भगवान शिव और उनके भक्तों की सेवा में समर्पित थे।

उसी दौर में अल-बिरूनी नामक एक अरब यात्री सोमनाथ की रौनक देखकर दंग रह गया।

उसने मंदिर (Temple) की तारीफ अफगानिस्तान के मशहूर लुटेरे महमूद गजनवी से की।

अल-बिरूनी की बातें सुनकर गजनवी ने मंदिर लूटने का फैसला किया।

और, अपने बेरहम साथियों के साथ श्री सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple Gujarat) पर हमला बोल दिया।

दो दिन की खूनी खेल के बाद महमूद गजनवी ने शहर और मंदिर पर कब्जा कर लिया।

मंदिर की सुरक्षा में लगभग 70,000 रक्षक शहीद हो गए।

कहा जाता है कि अपने आराध्य भोलेनाथ के मंदिर की रक्षा के लिए हजारों भक्त और गांव वाले निहत्थे दौड़ पड़े थे।

सोमनाथ मंदिर का यह अमर इतिहास काफी दिनों तक सुर्ख़ियों में रहा था।

लेकिन, महमूद गजनवी के कहर से कोई भी व्यक्ति श्री सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple Gujarat) को बचा नहीं सका।

पहले उसने मंदिर की सारी संपत्ति लूटी। उसके बाद मंदिर को पूरी तरह से नष्ट कर दिया।

सोमनाथ मंदिर का इतिहाससन 1093-1168

महमूद गजनवी ने श्री सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple Gujarat) को इस कदर नष्ट कर दिया था, जिसकी मरम्मत लगभग 70 सालों तक नहीं हो सकी।

गजनवी द्वारा मंदिर तोड़ने और लूटने के बाद, एक बार फिर गुजरात (Gujarat) के राजा भीमदेव और मालवा के राजा भोज ने इसका पुनर्निर्माण करवाया।

सन 1093 में गुजरात (Gujarat) के सम्राट सिद्धराज जयसिंह ने मंदिर निर्माण में सहयोग दिया।

1168 में विजयेश्वर कुमारपाल और सौराष्ट्र के राजा खंगार श्री सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple Gujarat) के सौंदर्यीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।   

सोमनाथ मंदिर का इतिहाससन 1297, 1394-95 और 1412

सन 1297 में अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति नुसरत खां ने मंदिर को लूटा और तोड़ा।

सन 1394-95 में गुजरात (Gujarat) के सुल्तान मुजफ्फरशाह और सन 1412 में अहमद शाह ने श्री सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple Gujarat) को तोड़ा, लूटा और कत्लेआम किया।

लूटपाट का सिलसिला यहीं नहीं रुका। बार-बार हिन्दू राजाओं द्वारा मंदिर बनाया जाता और विदेशी शासकों द्वारा तोड़ा जाता।

सारा चढ़ावा और धन-संपत्ति लूटी जाती।

सोमनाथ मंदिर का इतिहाससन 1665 और 1706

यह क्रूरता और कट्टरता का दौर था। क्रूर बादशाह औरंगजेब का समय था।

वह सिर्फ़ मुगल शासन के पतन के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी क्रूरता के लिए सबसे दुष्ट और निर्दयी शासक के रूप में जाना जाता।

जिस हैवान ने सत्ता के लिए अपने पिता शाहजहां को कैद कर लिया था। अपने सगे भाइयों मुराद और दारा शिकोह का कत्ल करा दिया था।

उसके लिए मंदिर लूटना और खून करना आम बात थी।

औरंगजेब ने 1665 ईस्वी में पहली बार श्री सोमनाथ मंदिर में आक्रमण किया।

सारी संपत्ति लूटने के बाद मंदिर को तुड़वा दिया। मंदिर फिर एक बार टूटा, लेकिन लोगों की आस्था नहीं।

पूजा-अर्चना में कोई कमी नहीं आई। भक्तों की भीड़ कभी कम नहीं हुई। देशभर के तीर्थयात्री के कदम सोमनाथ पहुंचने से नहीं रुके।

मंदिर की गरिमा और भोले की महिमा दिन-ब-दिन बढ़ती चली गई।

सोमनाथ की बढ़ती लोकप्रियता से औरंगजेब की नींद उड़ गई थी।

उसने 1706 में अपनी जालिम सेना भेजकर, पूजा-अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं का कत्लेआम करवाया। देवभूमि रक्तभूमि से सन गई।

लाचारों का लहू देखकर शायद क्रूर बादशाह औरंगजेब के कलेजे को ठंडक मिली होगी।

मुगल शासक द्वारा विनाश और हिन्दू राजाओं द्वारा पुनर्निर्माण का सिलसिला जो शुरू हुआ था, वो सदियों तक जारी रहा।

सोमनाथ मंदिर का इतिहाससन 1783

भारत के एक बड़े हिस्से में मर्द-मराठों का परचम लहरा रहा था।

‘हर-हर महादेव’ का नारा भारत के कई भागों में गूंज रहा था।

भारत के मालवा साम्राज्य की मराठा होलकर महारानी अहिल्याबाई ने शिव भक्तों की पूजा-पाठ के लिए 1783 में एक नए मंदिर का निर्माण करवाया।

श्री सोमनाथ महादेव का वह मंदिर, प्राचीन मूल मंदिर से कुछ ही दूरी पर विराजमान है।

महारानी अहिल्याबाई के योगदान की अमर निशानियां सोमनाथ सहित भारत के कई हिस्सों में देखी जा सकती है।

मुगल शासक औरंगजेब द्वारा 1297, 1394-95 और अंततः 1706 में मंदिर को फिर तोड़ा गया।

उसके बाद 1950 तक मंदिर का पुनर्निर्माण नहीं हो सका।

सोमनाथ मंदिर का इतिहाससन 1950

सोने की चिड़िया भारत के पंख आज़ाद हो चुके थे।

लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने समुद्र जल हाथ में लेकर नए श्री सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple Gujarat) के निर्माण का संकल्प लिया।

1950 में एक बार फिर मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ।

श्री सोमनाथ मंदिर को 6 बार तोड़ा और बनाया गया।

7वीं बार भव्य मंदिर का निर्माण कैलाश महामेरू प्रसाद शैली में किया गया, जो करोड़ों शिव भक्तों की आस्था का केंद्र और भारत का गौरव है।

आज जिस दिव्य और भव्य मंदिर में भगवान भोलेनाथ, श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (Somnath Jyotirlinga) के रूप में विराजमान हैं, उसके निर्माण का श्रेय स्वतंत्र भारत के प्रथम एवं पूर्व गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल को जाता है।

हालांकि, मंदिर राष्ट्र को समर्पित 1 दिसंबर, 1995 को भारत के पूर्व राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा द्वारा किया गया था।

सोमनाथ मंदिर का इतिहासहाइलाइट:

  • मौजूदा श्री सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple Gujarat) का पुनर्निर्माण सरदार वल्लभभाई पटेल के संकल्प से किया गया।
  • 13 नवंबर, 1947 को उन्होंने श्री सोमनाथ मंदिर के खंडहरों का दौरा किया था।
  • 11 मई, 1951 को भारत के तत्कालीन पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा की थी।
  • दिसंबर, 1995 में भारत के पूर्व राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया था।

सोमनाथ मंदिर का इतिहास जानने के बाद, चलिए यह जानते हैं कि मौजूदा श्री सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple Gujarat) कैसा दिखता है।

श्री सोमनाथ मंदिर का वर्तमान स्वरुप

Somnath Jyotirlinga Gujarat: श्री सोमनाथ मंदिर ने विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा 6 बार किए गए अपमान को झेला है।

इस मंदिर का अस्तित्व ही हमारे समाज की पुनर्निर्माण भावना और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है।

मौजूदा श्री सोमनाथ मंदिर का सातवां स्वरूप है, जो कैलाश महामेरू प्रसाद शैली में सुसज्जित है।

इस भव्य मंदिर के प्रणेता लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी हैं।

155 फीट ऊंचे शिखर वाले इस दिव्य मंदिर में एक विशाल गर्भगृह, सभामंडप और नृत्यमंडप हैं।

शिखर के सबसे शीर्ष पर विराजमान कलश का वजन 10 टन है।

Somnath Jyotirlinga Gujarat: ध्वजदंड 27 फीट ऊंचा और 1 फुट परिधि वाला है।

अबाधित समुद्र मार्ग, तीर्थस्तंभ (तीर) दक्षिण ध्रुव की ओर अबाधित समुद्री मार्ग का संकेत देता है।

दक्षिणी ध्रुव की ओर सबसे नजदीकी भूमि लगभग 9,936 किमी की दूरी पर है।

श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (Somnath Jyotirlinga Gujarat) के भौगोलिक और रणनीतिक स्थल को देखकर यह कहा जा सकता है कि यह प्राचीन भारतीय ज्ञान की अद्भुत और जीवंत मिसाल है।   

मंदिर के चारों ओर विशाल आंगन है। मंदिर का प्रवेश द्वार कलात्मक है।

श्री सोमनाथ मंदिर तीन भागों में विभाजित है – नाट्यमंडप, जगमोहन और गर्भगृह।

मंदिर के बाहर वल्लभभाई पटेल, रानी अहिल्याबाई आदि की मूर्तियां सुशोभित हैं।

समुद्र किनारे स्थित ये मंदिर बहुत ही सुंदर दिखाई देता है।

Somnath Temple Gujarat
श्री सोमनाथ की तस्वीर- gyanmanch के सौजन्य से  

श्री सोमनाथ मंदिर का वर्तमान स्वरुप

Somnath Jyotirlinga Gujarat भगवान शिव यानी सृष्टि के पालनहार। दुनियाभर में महादेव के अनंत भक्त और कई मठ-मंदिर हैं।

भारत के कई पवित्र राज्यों में स्थापित भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग विशेष महत्व रखते हैं।

इनमें से एक है ऐतिहासिक मंदिर है श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (Somnath Jyotirlinga Gujarat) का।

यह मंदिर अपने अद्भुत सौंदर्य, आस्था, भक्ति और विश्वास के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है।

अनगिनत शिव भक्तों की आस्था का केंद्र है।

गुजरात प्रांत के काठियावाड़ क्षेत्र में भगवान सोमनाथ का विश्व प्रसिद्ध मंदिर स्थापित है।

इस ज्योतिर्लिंग को सोमनाथ अर्थात् ‘चंद्र के स्वामी’ के नाम से जाना जाता है।

भगवान श्री सोमनाथ के दर्शन-पूजा करने से भक्तों को जन्म-जन्मांतर के पुण्य की प्राप्ति होती है।

मोक्ष का मार्ग मिलता है।

ऋग्वेद में श्री सोमेश्वर महादेव की महिमा को विस्तार से पढ़ा जा सकता है।

Somnath Jyotirlinga Gujarat की विशेषता

  • श्री सोमनाथ का मंदिर 150 फीट ऊंचा है, जो गर्भगृह, सभामंडप व नृत्यमंडप सहित तीन भागों में विभाजित है।
  • 27 फीट ऊंचा धर्मध्वज समुद्र की लहरों के साथ सदैव मंदिर की शोभा बढ़ाता रहता है।
  • यह मंदिर अपनी भव्यता और सुंदरता के लिए विश्व विख्यात है।

श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग कहां है?

Somnath Jyotirlinga Gujarat: श्री सोमनाथ मंदिर, सोमनाथ, प्रभास पाटन, वेरावल के पास, ज़िला गिर-सोमनाथ, गुजरात, भारत में स्थित है।

यह भव्य और दिव्य मंदिर भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमी भाग में अरब महासागर के तट पर बसा है। 

“वैसे तो मैं हर पल, हर जगह मौजूद हूं। पर, 12 ज्योतिर्लिंगों में मैं विशेष रूप से उपस्थित रहता हूं।“

श्री शिवपुराण और श्री नंदी उपपुराण में भगवान भोलेनाथ ने कहा है

12 ज्योतिर्लिंगों के पवित्र स्थानों में से श्री सोमनाथ धाम एक है।

बारह पवित्र शिव ज्योतिर्लिंगों में श्री सोमनाथ प्रथम ज्योतिर्लिंग है।

आकर्षण मंदिर के भीतर

श्री सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple Gujarat) का रंग शहद की तरह लुभावना और नक्काशी बेजोड़ है।

मंदिर की दीवारों में देवी-देवताओं की प्रतिमाएं बड़ी शिद्दत से तराशी गई हैं।

हाथी आदि की खूबसूरत मूर्तियों में बेहतरीन कारीगरी की झलक दिखती है।

पवित्र सोमनाथ में भगवान शिव ‘प्रकाश के उग्र स्तंभ’ (Fiery Column of Light) के रूप में प्रकट हुए थे।

श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (Somnath Jyotirlinga) मंदिर प्राचीन त्रिवेणी संगम यानी कपिला, हिरण और सरस्वती नदी के संगम पर स्थित है।

यह सिर्फ़ गुजरात का ही नहीं, बल्कि अतुल्य भारत का महत्वपूर्ण तीर्थ और पर्यटन स्थल है।

अरब सागर की लहरें जब महादेव के मंदिर परिसर की विशाल दीवारों को छूती हुई बहती हैं, तो वह नज़ारा बेहद शानदार होता है।

दर्शनार्थी घंटों परिसर के अंदर और समुद्र तट पर बने चबूतरे पर बैठकर, दूर तक स्वच्छ पानी की लहरों का अनोखा लुफ्त उठाते बोर नहीं होते हैं।

साउंड एंड लाइट शो

श्री सोमनाथ मंदिर परिसर के भीतर हर रात 7:45 बजे से 8.45 बजे तक ‘जय सोमनाथ’ साउंड एंड लाइट शो का आनंद उठा सकते हैं।

दिव्य शो का मज़ा उठाने के लिए तीर्थयात्रियों के लिए बैठने की बेहतर सुविधा है।

रात के सन्नाटे और महासागर की लहरों की गुनगुनाहट में साउंड एंड लाइट शो का अलौकिक अनुभव किया जा सकता है।

साउंड एंड लाइट शो का आनंद उठाने के लिए 3D ग्लास दी जाती है।

जिस डायोरामा में साउंड एंड लाइट शो का आयोजन होता है, वह बेहद कलरफुल और ओपन डायोरामा है।

मंदिर के पीछे वाले गार्डन में स्थित है।

महानायक अमिताभ बच्चन की दमदार आवाज़ में साउंड एंड लाइट शो का लुफ्त और बढ़ जाता है।

उनके मुखारबिंदु और मधुर साउंड के बीच भगवान शिव की कथा सुनते ही बनती है।

3D पिक्चर या वीडियो का प्रदर्शन श्री सोमनाथ मंदिर की दीवारों पर किया जाता है।

साउंड एंड लाइट शो टिकट काउंटर मंदिर परिसर के अंदर ही मौजूद है।

टिकट की कीमत प्रति भारतीय व्यस्क 25 रुपए और प्रति भारतीय बच्चे 15 रुपए है। टिकट बड़ी जल्दी सेल हो जाती है।    

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व्यक्तिगत अनुभव (Personal Experience)

Somnath Jyotirlinga Gujarat: वैसे तो हम कई देवस्थान दर्शन के लिए गए हैं, पर सोमनाथ मंदिर की बात ही निराली है।

श्री सोमनाथ मंदिर गुजरात की आन और भारत की शान है।

यह एक ऐसा तीर्थ स्थल है, जहां शिव भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी होती है।

मंदिर का शांत, हरा-भरा, रंग-बिरंगा और भक्तिमय माहौल मन मोह लेता है।

परम खुशी की चरम सीमा क्या होती है, श्री सोमनाथ महादेव (Somnath Jyotirlinga) के दर्शन के बाद जाना।

दो दिन, एक रात के ठिकाने में अनगिनत बार भगवान के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

भक्त बार-बार मंदिर घूम-घूमकर आते हैं, बार-बार कतार लगाते हैं। क्योंकि, महादेव के भव्य दर्शन से एक बार में मन नहीं भरता है।

लोग अपने प्रभु के निर्मल स्वरूप को बस निहारते रहना चाहते हैं।

सुरक्षा-कर्मियों द्वारा दो बार जांच के बाद श्री सोमनाथ मंदिर (Somnath Jyotirlinga Gujarat) में प्रवेश मिलता है।

मंदिर के परिसर में पहुंचते ही महादेव का दिव्य दर्शन दीवार पर सजे बड़े-बड़े पोस्टरों में होने लगता है।

एलईडी टीवी के जरिए भी दूर से दर्शन का सौभाग्य मिलता रहता है।

भक्तों के आराम के लिए जगह-जगह पर बेंचेस की सुविधा मौजूद है। भीड़भाड़ के दौरान इनकी बहुत जरुरत पड़ती है।

व्यक्तिगत अनुभव (Personal Experience

Somnath Jyotirlinga Gujarat: हर-हर महादेव की गूंज के साथ कदम महादेव के दरबार की ओर बढ़ते हैं।

मंदिर के अग्रभाग पर भगवान ब्रम्हा, महेश और विष्णु की प्रतिमा के दिव्य दर्शन से मन प्रसन्न हो उठता है।

वहीं, सरदार वल्लभभाई पटेल का स्मारक देखकर सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है।

सरदार जी की प्रतिमा मंदिर परिसर के भीतर स्थापित है और वे श्री सोमनाथ महादेव की ओर देख रहे हैं।

मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करते ही दाईं ओर भगवान श्री गणेश जी और बाईं ओर भगवान श्री हनुमान जी के दर्शन होते हैं।

ठीक सामने महादेव के परम भक्त नंदी महाराज जी की विशाल मूर्ति का दर्शन होता है।

नंदी बाबा के कदमों को छूते और कानों में मन की मुरादें कहते भक्त महादेव के दर्शन के लिए थोड़ा आगे बढ़ते हैं।

उसके बाद होता है श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का भव्य दर्शन।

महादेव का यह ज्योतिर्लिंग काफी लंबा-चौड़ा है। अद्भुत है!

प्रभु के दर्शन होते ही जैसे लगा कि जीवन धन्य हो गया। ज्योतिर्लिंग छूने की अनुमति आम भक्तों को नहीं है।

भक्त थोड़ी दूर से दर्शन करते, जल छोड़ते, दान-दक्षिणा करते, फूल-माला और पूजा-पाठ की रस्में पंडित से करवाते एक बेहद सुंदर बगीचे में निकल जाते हैं।

गर्भगृह में दाखिल होते ही किसी राजमहल का अहसास होता है।

सोने से चमकता महल, जिसमें भोलेनाथ दिव्य रूप में विराजमान हैं।

भोले की दिव्यता की तारीफ शब्दों में नहीं की जा सकती है।

इसे सिर्फ़ महसूस किया जा सकता है। मंदिर के अंदर की बनावट भी बेजोड़ है। डिजाइन शानदार है।

परिसर के अंदर मंदिर के आकार वाले छोटे-छोटे तंबू सुंदर लगते हैं।

व्यक्तिगत अनुभव (Personal Experience

Somnath Jyotirlinga Gujarat: मंदिर का वातावरण स्वर्ग की अनुभूति कराता है।

महादेव के दर्शन के बाद मंदिर के सामने एक विशालकाय वाट वृक्ष की छांव में बैठकर कई घंटे शुद्ध हवा का लाभ लिया जा सकता है।

मंदिर परिसर में एक सुंदर और विशाल गार्डन है।

उसमें मौजूद तरह-तरह के रंग-बिरंगे फूलों वाले पौधे दिल जीत लेते हैं।

गार्डन में बैठकर समुद्र के अलौकिक रूप का दीदार करना, किसी हसीन और यादगार लम्हे से कम नहीं।

शाम को सूर्यदेव जब दुनिया घूमकर समुद्र की गोद में आराम फरमाने के लिए जाते हैं, तो वह नज़ारा कभी भुलाया नहीं जा सकता।

यहां सूर्यास्त का अनदेखा यानी बेहद खूबसूरत रूप दिखाई देता है।

श्री सूर्य भगवान, श्री सोमनाथ भगवान के दर्शन करते हुए आराम करने जाते हैं।

यह अनुभव भी सिर्फ़ यहीं किया जा सकता है।

Somnath Jyotirlinga Gujarat: शाम के वक़्त एलईडी लाइट्स से जगमगाते श्री सोमनाथ मंदिर और परिसर का नज़ारा मंत्रमुग्ध कर देता है।

मंदिर की दीवारों पर छोटे-छोटे मंदिरों में स्थापित देवी-देवताओं की प्रतिमाएं, रात के समय रंग-बिरंगी लाइटों की सजावट में बेहद सुंदर लगती हैं।      

भक्तों के दर्शन के लिए मंदिर के भव्य आंगन में 12 ज्योतिर्लिंगों की स्थापना भी की गई है।

उन ज्योतिर्लिंगों का आकार मूल आकार की तरह ही है। जिस तरह वे अपने मूल मंदिर में स्थापित हैं।

हर ज्योतिर्लिंग की स्थापना के पीछे की कहानी और महिमा आदि पढ़ी जा सकती है।

कांच के अंदर सुंदर डिस्प्ले में सुसज्जित 12 ज्योतिर्लिंगों के दिव्य दर्शन से भक्त मदमस्त हो जाते हैं।  

व्यक्तिगत अनुभव (Personal Experience

Somnath Jyotirlinga Gujarat: मंदिर परिसर के भीतर श्री सोमनाथ ट्रस्ट के काउंटर पर प्रसाद, रुद्राक्ष, गंगाजल, मालाएं, धार्मिक पुस्तकें, भस्म आदि की खरीदारी की जा सकती है।

याद रहे इन चीज़ों के भुगतान के लिए मात्र दो विकल्प हैं। पहला नकद (कैश), दूसरा क्रेडिट या डेबिट कार्ड।

जैसा कि मंदिर परिसर में मोबाइल फोन ले जाने पर पाबंदी है, इसलिए जीपे या फोनपे इत्यादि का इस्तेमाल कैसे होगा?

स्वच्छता के मामले में गुजरात का कोई मुकाबला नहीं। सोमनाथ इस असर से बाकी नहीं रहा है।

साफ-सफाई हर कोने में दिखाई देगी।

मंदिर के भीतर भी और पूरे शहर के अंदर भी।

हर देवस्थल पर स्वच्छता और बेहतर मूलभूत सुविधा मिलनी जैसे आम बात है।

ध्यान देने वाली बातें:
  • मंदिर परिसर के भीतर मोबाइल फोन, इलेक्ट्रिक आइटम, हैंडबैग, लगेज, चमड़ा बेल्ट, थ्री-फोर्थ-छोटे कपड़े, खाने-पीने की चीज़ें आदि ले जाने पर सख्त मनाई है।
  • तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की सुविधा के लिए मंदिर के प्रवेश द्वार के सामने लॉकर की सुविधा मौजूद है। जहां आप मोबाइल जैसी अपनी अन्य अनमोल वस्तुओं को सुरक्षित रख सकते हैं।
  • अगर होटल नजदीक है, तो बेहतर होगा मोबाइल आदि रूम में ही रखें। इससे आपका टाइम बचेगा। मोबाइल काउंटर पर कतार नहीं लगानी पड़ेगी।
  • मंदिर के मुख्य गर्भगृह में प्रवेश से पहले दो बार जांच सुरक्षा के दायरे से गुजरना होता है। महिला और पुरुष पुलिसकर्मी कदम-कदम पर तैनात रहते हैं।
  • थोड़ी-थोड़ी दूरी पर पेयजल और बेंचेस की सुविधाएं मौजूद हैं।

Somnath Jyotirlinga Gujarat: श्री सोमनाथ मंदिर के सामने यानी बाहर सतरंगी ख्वाहिशों से सजी दुनिया दिखाई देती है।

उम्मीदों और हसरतों से भरा मेला।

जहां आप तरह-तरह की वस्तुओं की खरीदारी कर सकते हैं।

छोटे-बड़े शंख, हाथ से बनी कलाकृतियों की प्रदर्शनी का आनंद ले सकते हैं।

गुजरात की हस्तकला/हस्तशिल्प जैसे पर्स, हैंडबैग, कपड़े, जैकेट, इत्यादि की शॉपिंग कर सकते हैं।

महादेव के छोटे-बड़े दिव्य लिंग अपने साथ घर ले जा सकते हैं।

अपनों के लिए रक्षासूत्र, रुद्राक्ष माला, बच्चों के लिए खिलौने आदि खरीद सकते हैं।

कहां खाएं

Somnath Jyotirlinga Gujarat: तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और श्री सोमनाथ की शरण में रहने वालों के लिए श्री सोमनाथ ट्रस्ट की ओर से सुबह और शाम फ्री प्रसाद (भोजन) की व्यवस्था की जाती है।

प्रसादालय मंदिर परिसर के बाहर, बाईं तरह मुड़ी सड़क की एक गली में स्थित है।

इस भंडारे में लोग भरपेट भोजन का आनंद उठाते हैं।

आप कूपन के जरिए फ्री और स्वादिष्ट गुजराती थाली का आनंद उठा सकते हैं।

भोजन करने के बाद अक्सर लोग दान पेटी में अपनी स्वेच्छा से कुछ न कुछ दान ज़रूर डाल देते हैं।

खाने के बाद बर्तन भी स्वयं लोग धोकर रख देते हैं।

प्रसादालय में बैठकर भोजन करने के लिए बेंच और टेबल की सुविधा मौजूद है।

प्रसादालय के प्रसाद में गुजराती टेस्ट चार-चांद लगा देता है।

Somnath Jyotirlinga Gujarat: इसके अलावा, सोमनाथ में कई बढ़िया रेस्टोरेंट खाने-पीने के लिए मिल जाएंगे।

जहां आप देसी-विदेसी डिस का लुफ्त उठा सकते हैं।

यहां के लोकल डिश और गुजराती थाली आपको अलग अनुभव दे सकते हैं।

महादेव के भक्तों और पर्यटकों की सुविधा के लिए सोमनाथ धाम में बेहतर सुविधाएं मौजूद हैं। 

मंदिर की संरचना, बनावट और सजावट बेजोड़ है। इस युग की बेमिसाल कारीगरी कही जा सकती है। मंदिर के हर भाग में बहुत बारीक काम दिखाई देता है। 21वीं सदी में इतने भव्य, दिव्य और आकर्षक मंदिर के निर्माण को आधुनिक भारत की कारीगरी का बेमिसाल नमूना कहा जा सकता है। इंच-इंच पर अनूठा हुनर दिखता है। मंदिर की बनावट देखकर खुशी और हैरानी, दोनों होती है। मंदिर के सबसे ऊंचे शिखर पर त्रिशूल और डमरू दूर से ही अपनी दिव्यता की अमृत वर्षा भक्तों के ऊपर करते रहते हैं।

कृष्णा

मंदिर के अन्य स्थानों में वल्लभघाट के अलावा श्री कपार्डी विनायक और श्री हनुमान मंदिर हैं।

वल्लभघाट एक खूबसूरत सूर्यास्त बिंदु से अद्भुत शाम का आनंद लिया जा सकता है।   

श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन का समय

हर दिन सुबह 6 बजे से लेकर रात 10 बजे तक श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (Somnath Jyotirlinga Gujarat) के दर्शन किए जा सकते हैं।

महादेव की आरती में सुबह 7 बजे, दोपहर 12 बजे और रात 7 बजे शामिल हुआ जा सकता है।

‘जय सोमनाथ’ साउंड एंड लाइट शो का आनंद शाम 7.45 बजे से लिया जा सकता है।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग कैसे पहुंचें?

हवाई मार्ग: दीव एयरपोर्ट आइए। यह श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (Somnath Jyotirlinga Gujarat) पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है।

दीव से सोमनाथ की दूरी लगभग 85-90 किमी है। दीव एयरपोर्ट से आप श्री सोमनाथ मंदिर के लिए टैक्सी ले सकते हैं।

मौजूदा समय में टैक्सी का किराया 2,000 रुपए के करीब हो सकता है या उससे थोड़ा ज़्यादा।

इसके अलावा, दीव से आप सोमनाथ के लिए बस सेवा भी ले सकते हैं।

दीव के अलावा अन्य नजदीकी एयरपोर्ट पोरबंदर लगभग 120 किमी और राजकोट सिविल एयरपोर्ट लगभग 160 किमी दूर स्थित हैं।

फ्लाइट बुकिंग या चल रहे ऑफर की जानकारी इस लिंक पर पाई जा सकती है।

सड़क मार्ग: श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (Somnath Jyotirlinga Gujarat) सड़क मार्ग से सभी बड़े शहरों से जुड़ा है।

निजी गाड़ियों से सड़क मार्ग से सोमनाथ आसानी से पहुंचा जा सकता है।

अहमदाबाद और वड़ोदरा, गुजरात से श्री सोमनाथ मंदिर के लिए बस सेवा ली जा सकती है।

अहमदाबाद से लग्जरी, एसी और नॉन-एसी प्राइवेट एवं सरकारी बसें उपलब्ध हैं।

अपने बजट के अनुसार बस सेवा का लाभ उठा सकते हैं।

आप दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई सहित भारत के किसी भी राज्य से अहमदाबाद या वड़ोदरा बड़ी आसानी से पहुंच सकते हैं।

यहां से आप सोमनाथ टैक्सी या ख़ुद की कार आदि से भी पहुंच सकते हैं।

Somnath Jyotirlinga Gujarat बस से कैसे पहुंचें?

अहमदाबाद से बस पकड़िए। 9 से 12 घंटे का सफर कीजिए और सोमनाथ धाम पहुंचिए।

बस बुकिंग का लाभ मेक माय ट्रिप और रेड बस के द्वारा उठाया जा सकता है।

मेक माय ट्रिप पर गुजरात राज्य सड़क परिवहन निगम (जीएसआरटीसी) और प्राइवेट बसों की टिकटें बुक की जा सकती हैं।

लग्जरी, एसी और नॉन-एसी स्लीपर बसों के जरिए सोमनाथ पहुंचा जा सकता है।

Somnath Jyotirlinga Gujarat ट्रेन से कैसे पहुंचें?
श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग
श्री सोमनाथ की तस्वीर- gyanmanch के सौजन्य से  

अगर आप ट्रेन से सोमनाथ पहुंचना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको वेरावल रेलवे स्टेशन (VRL) उतरना होगा।

वेरावल से श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की दूरी लगभग 5-7 किमी है।

वेरावल रेलवे के बाहर से रिज़र्व या शेयर ऑटो और टैक्सी बड़ी आसानी से मिल जाती है।

सोमनाथ एक छोटा रेलवे स्टेशन है, लेकिन वेरावल जंक्शन है।

सोमनाथ के मुकाबले वेरावल आने-जाने के लिए ट्रेनों की संख्या ज़्यादा है।

कुल मिलाकर वेरावल जंक्शन श्री सोमनाथ मंदिर की यात्रा के लिए मुख्य स्टेशन के रूप में जाना जाता है।    

अहमदाबाद (ADI) से वेरावल (VRL) जाने वाली ट्रेनें

  • 22957 सोमनाथ एक्सप्रेस  
  • 19119 अहमदाबाद-सोमनाथ इंटरसिटी एक्सप्रेस  
  • 19217 बांद्रा-वेरावल सौराष्ट्र जनता एक्सप्रेस
  • 11464 जबलपुर- सोमनाथ एक्सप्रेस

वेरावल (VRL) से अहमदाबाद (ADI) आने वाली ट्रेनें

  • 22958 सोमनाथ एक्सप्रेस
  • 19218 वेरावल-बांद्रा सौराष्ट्र जनता एक्सप्रेस
  • 11465 सोमनाथ-जबलपुर एक्सप्रेस
  • 19120 सोमनाथ-अहमदाबाद इंटरसिटी एक्सप्रेस

बांद्रा (BDTS) से वेरावल (VRL) जाने वाली ट्रेन

  • हर दोपहर 13:40 बजे 19217 सौराष्ट्र जनता एक्सप्रेस पकड़िए।
  • 17 घंटे 30 मिनट की यात्रा कीजिए।
  • सुबह 7:10 बजे वेरावल जंक्शन, गुजरात उतर जाइए।

वेरावल (VRL) से बांद्रा (BDTS) से आने वाली ट्रेन  

  • हर सुबह 11:50 बजे 19218 सौराष्ट्र जनता एक्सप्रेस पकड़िए।
  • 17 घंटे 55 मिनट की यात्रा कीजिए।
  • सुबह 5:45 बजे बांद्रा टर्मिनस, मुंबई उतर जाइए।
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग कब जाएं?

सोमनाथ मंदिर की यात्रा का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से फरवरी तक माना जाता है।

वैसे तो शिव भक्तों का ताता बारहों महीने लगा रहता है।

महाशिवरात्रि, नागपंचमी और कार्तिक पूर्णिमा यानी दिवाली बड़े उत्साह से मनाई जाती है।

सावन का पूरा महीना भक्तों के मेले से सजा रहता है।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग में होटल?

सबसे बेस्ट और किफायती ऑप्शन है MakeMyTrip, goibibo, Cleartrip या श्री सोमनाथ ट्रस्ट की वेबसाइट पर जाएं और ऑनलाइन रूम बुक करें।

MakeMyTrip पर होटल बुकिंग पर 20% तक डिस्काउंट का लाभ उठा सकते हैं।

आप इस लिंक पर जाकर, सागर दर्शन गेस्ट हाउस, लीलावती अतिथि भवन, माहेश्वरी अतिथि भवन में ऑनलाइन होटल बुक कर सकते हैं।

श्री सोमनाथ ट्रस्ट के होटलों के बारे में पूरी जानकारी और सुविधाएं आदि प्राप्त कर सकते हैं।

इस वेबसाइट पर ऑनलाइन डोनेशन/पूजा विधि, ऑनलाइन प्रसाद बुकिंग, ऑनलाइन रूम बुकिंग और लाइव दर्शन का आनंद उठा सकते हैं।

आप अपने बजट के मुताबिक होटल, लॉज, धर्मशाला आदि में स्टे कर सकते हैं।

सोमनाथ में तीर्थयात्री संबंधी सुविधाओं के बारे में अन्य जानकारी यहां पाई जा सकती है।

श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के आसपास घूमने की अन्य जगहें सूरज मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर, त्रिवेणी घाट, भलका तीर्थ, सोमनाथ बीच, पांच पांडव गुफा, गीता मंदिर आदि हैं।

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क्या पता यह जानकारी किसी श्री सोमनाथ जाने वाले भक्त के काम आ जाए।

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Somnath Temple Gujarat जाएं, तो यहां जरूर जाएं – जानें:  https://gyanmanch.in/devbhoomi-dwarka-gujarat/

तकनीकी कहानी के लिए संदर्भ लिंक 1, 2 और 3