Triveni Mahasangam Gujarat 2023: भक्ति और रोमांच का संगम

जीवन में यदि कभी सोमनाथ जाने का सौभाग्य मिले, तो त्रिवेणी महासंगम देखना और उसके पावन जल में डुबकी लगाना बिल्कुल भी मत भूलना। श्री सोमनाथ मंदिर से महज एक किलीमीटर की दूरी पर स्थित त्रिवेणी महासंगम (Triveni Mahasangam Gujarat 2023) की महिमा अनंत है।

त्रिवेणी महासंगम का महत्त्व

Triveni Mahasangam Gujarat 2023: कई युग आए और कई बीत गए, लेकिन त्रिवेणी महासंगम युगों से आस्था और विश्वास का केंद्र रहा है।

हिरण, कपिला और सरस्वती नदियों के महासंगम की वजह से इस पवित्र तीर्थस्थल को त्रिवेणी महासंगम कहा जाता है।

ऐसा माना जाता है कि त्रिवेणी महासंगम ही वह पवित्र स्थान है, जहां भगवान श्री कृष्ण के नश्वर देह का अग्नि संस्कार किया गया था।

अन्य मत के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण ने गोलोक धाम की यात्रा से ठीक पहले इसी पवित्र जल में स्नान किया था।

यही कारण है कि त्रिवेणी महासंगम के पावन जल में स्नान करने वालों को मनवांछित फल और पुण्य की प्राप्ति होती है।

हिंदू पौराणिक कथाओं और पुराणों की मानें तो त्रिवेणी महासंगम स्वयं में अति विशेष फल देने वाला सबसे महत्वपूर्ण स्थान है।

इस पवित्र तीर्थस्थल की अनूठी महिमा का उल्लेख महाकाव्य श्री रामायण और श्री महाभारत में पढ़ा जा सकता है।

ऐसा माना जाता है कि जो श्रद्धालु शुद्ध मन और सच्ची आस्था से त्रिवेणी महासंगम में स्नान करता है, उसके सारे पाप धुल जाते हैं।

साथ ही, भगवान श्री कृष्ण की कृपा और दया की प्राप्ति होती है।

छोटा तीर्थस्थल, महिमा बड़ी!

Triveni Mahasangam Gujarat 2023: यदि यह कहा जाए कि त्रिवेणी महासंगम सोमनाथ का सबसे महत्वपूर्ण, पवित्र और सुप्रसिद्ध तीर्थस्थल है, तो इसमें कोई गलत नहीं।  

हिरण, कपिला और सरस्वती नदी का अद्भुत संगम इस स्थान को सबसे विशेष बनाता है।

इस पवित्र स्थान को जन्म, जीवन और मृत्यु का प्रतीक माना जाता है।  

यह मोक्षदायिनी और जन्‍म-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाने वाली स्थली है।

इस दिव्य स्थल पर भगवान श्री कृष्ण की छतरी और मंदिर का निर्माण किया गया है।

उनकी सुनहरी यादों को सदा-सदा के लिए संजोने का प्रयास किया गया है।

श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों के स्नान, ध्यान और पूजा-पाठ के लिए त्रिवेणी महासंगम घाट को बेहतर ढंग से बनाया गया है।   

‘पितृदोष’ से मुक्ति पाने वाले लोगों का यहां हमेशा ताता लगा रहता है।

भारी संख्या में लोग यहां नियमित रूप से ‘श्राद्ध तर्पण’ या ‘पितृ पूजा’ करने आते रहते हैं।

जल की उपलब्धता बारहमासी सुनिश्चित करने के लिए थोड़ी दूर पर एक छोटे बांध का निर्माण किया गया है।

त्रिवेणी महासंगम का संक्षिप्त इतिहास

त्रिवेणी महासंगम हजारों वर्षों से भक्तों की आस्था का संगम रहा है।

इतिहास और पौराणिक ग्रंथों के सुनहरे पन्नों को पलटकर देखने पर पता चलता है कि इस तीर्थ-स्थल का महत्व सदियों से जगविख्यात है।

यह पवित्र स्थल तब से अस्तित्व में है, जब से पृथ्वी पर हिरण, कपिला और सरस्वती नदी की मौजूदगी है।

छोटी जगह, रोमांच के खजाने बड़े  

हिरण, कपिला और सरस्वती नदी का अनोखा संगम मन को कभी न मिलने वाला सुकून तो देता ही है, साथ ही पक्षियों का मधुर संगीत उस पल को और हसीन बना देता है।   

नदी के गहरे पानी में सीगल पक्षियों की रेस देखते ही बनती है। पर्यटकों को यह नज़ारा खूब भाता है।

बिना पंख हिलाए जिस तरह से वे स्विमिंग करते हैं, उनकी वह अदा निराली ही नहीं, रोमांच भी जगाती है।

पर्यटक उन पक्षियों का अनोखा खेल प्रदर्शन देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।

उस हसीन और यादगार पल को पर्यटक अपने मोबाइल के कैमरे में कैद करते नहीं थकते हैं।

प्रकृति का ऐसा अनोखा चमत्कार आपको केवल त्रिवेणी महासंगम पर ही देखने को मिल सकता है।

घाट पर बने छोटे-छोटे मंदिर के आकार में बने पूजा स्थल और चेंजिंग रूम स्नान करने वाले तीर्थयात्रियों के लिजाह से बेहतर तो है ही, साथ ही आर्कषक का केंद्र हैं।

गेट के अंदर प्रवेश करते ही देवस्थल वाला अहसास मन में जाग उठता है।

दूर देखने पर नदियों की धारा के साथ एक तरफ अरब सागर का किनारा हर्षित करता है।

नदी के उस पार हरियाली का दिलकश नज़ारा लुभाता है।

किसी दिशा में मंदिरों का शहर, तो कहीं नदी की गोद में बसा बांध रोमांचित करता है।

पर्यटकों को खूब भाए

नदियों की सादगी, सरलता और सुंदरता मन को गजब की शांति देती है।   

यहीं से ये तीनों नदियां एक-दूसरे के रंग में रंगते हुए अरब सागर में मिल जाती हैं।

हिरण, कपिला और सरस्वती के महासंगम में पक्षियों का रोमांच और नाव सवारी का आनंद अवश्य उठाएं।

स्वच्छता बेजोड़   

अपनी यात्रा के दौरान मैंने सबसे ज़्यादा जिस बात को नोटिस किया, वह थी स्वच्छता।

जिस तरफ नज़रें पड़तीं, साफ-सुथरे नज़ारे दिखाई देते।

घाट हो, नदी हो या फिर दूर तक बिछे इंटरलॉकिंग टाइल्स हों, सब जगह स्वच्छता की बहार है। 

खुलने का समय

त्रिवेणी महासंगम तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए हर दिन सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहता है।

अतुल्य योगदान, भव्य निर्माण   

त्रिवेणी महासंगम तीर्थ-स्थल के विकास में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री मोरारजी भाई देसाई की भूमिका अतुल्य है।

1967 से 1995 तक वे श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष रहें।

उस दौरान उन्होंने इस पवित्र तीर्थ-स्थल का निर्माण कराकर बेहतर बुनियादी सुविधाओं से सुसज्जित किया।

उनकी याद और सम्मान में त्रिवेणी महासंगम पर उनकी एक प्रतिमा स्थापित की गई है, जिसका अनावरण 30 मार्च, 2006 को किया गया था।   

त्रिवेणी महासंगम कब जाएं?

माना जाता है कि त्रिवेणी महासंगम में बारह महीने भक्तों की भीड़ उमड़ी रहती है।

लेकिन, घूमने के लिहाज से सबसे अच्छा समय नवंबर से फरवरी के बीच माना जाता है।   

गुजरात पर्यटन की वेबसाइट पर प्राप्त जानकारी के अनुसार, यहां हर साल जनवरी में माघ मेला का आयोजन किया जाता है।

साथ ही, बारह वर्षों में एक बार कुंभ मेला का आयोजन किया जाता है।

त्रिवेणी महासंगम कैसे जाएं? 

चलिए जानते हैं सबसे आसान तरीका।

त्रिवेणी महासंगम श्री सोमनाथ मंदिर यानी प्रथम ज्योतिर्लिंग से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

इस तीर्थस्थल पर पहुंचने के लिए श्री सोमनाथ मंदिर के सामने से निजी ऑटो मिलती है।

पांच-छह सौ में ऑटो बुक करके चार-पांच जगह एक साथ घूम सकते हैं।

जिसमें त्रिवेणी महासंगम, श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर, श्री सूर्य मंदिर और श्री गीता मंदिर शामिल हैं।

ये सभी तीर्थस्थल श्री सोमनाथ मंदिर से केवल 2-4 किमी के दायरे में स्थित हैं।  

श्री सोमनाथ मंदिर कैसे जाएं?

अब अगर मन में यह सवाल आता है कि सोमनाथ कैसे जाएं? तो इसका सटीक उत्तर नीचे दिए लिंक पर मौजूद है।

यह लेख श्री सोमनाथ धाम पर लिखे गए हर आर्टिकल से ज़्यादा ज्ञानवर्धक और रोमांचक है।

श्री सोमनाथ मंदिर से जुड़ी हर जानकारी को बारीकी से जानने के लिए यह पढ़ें: https://gyanmanch.in/somnath-temple-gujarat   

त्रिवेणी महासंगम की खूबसूरत तस्वीरें यहां देखें: https://gyanmanch.in/web-stories/triveni-mahasangam-gujarat-2023/

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