घनी हो चाहे जितनी काली रात सुबह होने से कहां रोक पाती है लहरें हों चाहे जितनी भी तूफ़ानी हौसले के आगे कहां टिक पाती हैं?

जो सुकून तेरी जुल्फों में है वो पीपल की छांव में कहां  जो मदहोशी तेरी सांसों में है वो फूलों की खुशबू में कहां

जो लचक तेरी कमर में है वो नागिन की चाल में कहां  जो तेज़ तेरे मुखड़े पर है वो चांद के टुकड़े में कहां

जो मिठास तेरी आवाज़ में है वो कोयल की बोल में नहीं   जो सुकून तेरी पनाहों में है  वो किसी और दौलत में नहीं 

 

हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं