ज़िंदगी में तुम्हारा आना आ कर फिर चले जाना उसी तरह काम कर गया जैसे जख़्म पर नमक लगाना

मेरे हाथों की लकीरों में भले तुम्हारा नाम नहीं  पर मेरी हर सांस तुम्हारी मुस्कान से चलती है

मुझ पर बंदूक चलाकर क्या फायदा? बस एक बार प्यार से देखकर मुस्कुरा दो मैं ख़ुद-ब-ख़ुद मर जाऊंगा

यूं तो बदनामी से बड़ा डर लगता है मुझे पर तुम्हारे इश्क़ में यह दाग भी कंजूर है

यूं तो मेरी ज़िंदगी का हर लम्हा एक-एक सदी के समान गुजरता है पर जब तुम पास आती हो वक़्त को जैसे पंख लग जाते हैं

आंखों में जिनके सपने पलते हैं चुनौतियां ललकारकर आगे बढ़ते हैं