द्वादश ज्योतिर्लिंग श्री नागेश्वर महादेव क्यों प्रसिद्ध हैं?

यह भारत का दसवां और गुजरात का दूसरा दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है, जहां भगवान भोलेनाथ स्वयं प्रकट हुए थे।

भगवान शिव की 25 मीटर ऊंची प्रतिमा, पेड़ों से घिरा मनमोहक वन और तालाब आकर्षण के मुख्य केंद्र हैं।

यहां भगवान शंकर की नाग रूप और देवी पार्वती की नागिन रूप में पूजा की जाती है।

अपने जीवन की रक्षा के लिए गंगाजल के अभिषेक के साथ नाग-नागिन का जोड़ा चढ़ाने का महत्त्व है।

द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग में पूजा-अभिषेक करते थे।

नाग दोष, सर्प दोष, आदि जैसी समस्याओं से निजात मिलती है

इस दिव्य मंदिर को श्री नागनाथ मंदिर, श्री नागेश्वर महादेव और श्री नागेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है।

यह पौराणिक, ऐतिहासिक और सुप्रसिद्ध तीर्थस्थल, गुजरात के सौराष्ट्र में स्थित है।