Wildlife Sanctuary in Uttarakhand: एडवेंचर के साथ नेचर का मज़ा

Wildlife Sanctuary in Uttarakhand: इस आर्टिकल में जानिए कि उत्तराखंड का सबसे बड़ा पार्क कौन-सा है? गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान (Gangotri National Park Uttarakhand) में कौन-सा जानवर प्रसिद्ध है? गंगोत्री नेशनल पार्क कहां है? पार्क की स्थापना कब हुई? पार्क में क्या देखें? गंगोत्री कब जाना चाहिए? गंगोत्री नेशनल पार्क कैसे पहुंचें? जानिए सबकुछ इस एक आर्टिकल में।

जहां प्रकृति की सुंदरता देख नज़रें थम जाती हैं।

सफेद बर्फ की चादर में लिपटे पहाड़, जब संगमरमर से चमकते हैं, तो आंखें खुली की खुली रह जाती हैं।

दूर तक फैले हिमनद (ग्लेशियर) का अलग अंदाज़, मन को गज़ब के सुकून देता है।

एक तरफ शंकुधारी वनों की खूबसूरती, दूसरी तरफ पशु-पक्षियों की अनोखी बोलियां आकर्षित करती हैं।

ऐसी ही अनगिनत खूबियों से गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान उत्तराखंड (Gangotri National Park Uttarakhand) सुसज्जित है।

प्रकृति और वन्यजीवों का अनोखा मिलन इस उद्यान को उत्तराखंड का सबसे बड़ा पार्क (Wildlife Sanctuary In Uttarakhand) बनाता है।

अगर आप रोमांचक, प्राकृतिक, ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक की अद्भुत सैर करना चाहते हैं, तो देवभूमि उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में बसा गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान आपका स्वागत करता है।

पर्वतों, नदियों, जंगलों और वन्यजीवों का अद्भुत और बेजोड़ संगम इस पार्क को औरों से अलग बनाता है।  

उत्तराखंड का सबसे बड़ा पार्क (Wildlife Sanctuary In Uttarakhand)

चलिए, सबसे पहले यह जानते हैं कि यह उत्तराखंड का सबसे बड़ा पार्क कौन-सा है?

तो इसका सही उत्तर ‘गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान’ है।

अंग्रेज़ी में लोग इसे गंगोत्री नेशनल पार्क उत्तराखंड (Gangotri National Park Uttarakhand) के नाम से जानते हैं।

यह प्रसिद्ध पर्यटक स्थल प्रकृति और रोमांच प्रेमियों का गढ़ है।

ट्रेकिंग का मज़ा उठाने के साथ, पर्यटक इस पार्क में प्रकृति के अनदेखे नज़ारे को देखने के लिए आते हैं।  

गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान कहां है?

गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान उत्तराखंड (Gangotri National Park Uttarakhand) उत्तरकाशी जिले में स्थित है।

भागीरथी नदी का ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र ही इसका घर है।

1989 में स्थापित यह उद्यान उत्तराखंड का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है।

2390.02 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैला यह पार्क शंकुधारी पेड़ों से सुसज्जित है।

इस शंकुधारी वन में पाइन, देवदार, फर, प्रसरल, बांज और बुरांश आदि पाए जाते हैं।

जिनमें 150 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां निवास करती हैं।

वहीं, स्तनधारियों की लगभग 15 प्रजातियां इस वन की शान बढ़ाती हैं।

यानी इस पार्क में हिम तेंदुआ, काला भालू, कस्तूरी मृग, हिमालयी मोनाल आदि जैसे वन्यजीव पाए जाते हैं।

गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान में कौन-सा जानवर प्रसिद्ध है?

यह बड़ा दिलचस्प सवाल है।

गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान जाने से पहले यह जानना बहुत ज़रूरी है कि पार्क कौन-से जानवर के लिए प्रसिद्ध है?

और क्या-क्या वहां देखे जा सकते हैं?

अद्वितीय भौगोलिक स्थिति (Unique Geographic Location) की वजह से गंगोत्री नेशनल पार्क (Gangotri National Park Uttarakhand) वनस्पतियों और वन्यजीवों (Flora and Fauna) से समृद्ध है।

इस पार्क में ख़ासकर पशु-पक्षियों की कई लुप्त हो रही प्रजातियों को देखा जा सकता है।

गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान भरल (नीली भेड़), काला भालू, भूरा भालू, हिमालयी मोनाल, हिमालयन स्नोकॉक (हिमालय का रामचकोर), हिमालयन थार, कस्तूरी मृग और हिम तेंदुआ जैसी कई लुप्तप्राय प्रजातियों का घर है।

ऐसे ही और कई मनमोहक जीव-जंतु, पेड़-पौधे, हरियाली और पहाड़, गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान को शानदार पर्यटन स्थल बनाते हैं।

गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान में तीतर, बुलबुल, पैराकेट, पार्टिडेज, कबूतर, और हिमालयन बारबेट जैसी कई विदेशी पक्षियों की प्रजातियां भी पाई जाती हैं।

अन्य पर्यटन आकर्षण

Wildlife Sanctuary In Uttarakhand: गंगोत्री नेशनल पार्क में जीप सफारी के साथ हैंग-ग्लाइडिंग, पैराग्लाइडिंग, माउंटेनियरिंग, रिवर राफ्टिंग, स्कीइंग और साहसिक ट्रेकिंग जैसी अन्य कई एक्टिविटीज का आनंद उठाया जा सकता है।

पार्क प्राकृतिक सुंदरता और रोमांचकारी गतिविधियों के जरिए पर्यटकों का मन मगन कर देता है।

गंगोत्री नेशनल पार्क, उत्तराखंड के सबसे मशहूर पर्यटक स्थलों में से एक है।

गंगोत्री ग्लेशियर की वजह से इस उद्यान का महत्व एवं आकर्षण, और ज़्यादा बढ़ जाता है।

यह उत्तराखंड का ही नहीं, बल्कि भारत का सुप्रसिद्ध वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuary) है।

यह पार्क गढ़वाल क्षेत्र की प्राकृतिक गोद में 7,083 मीटर ऊंचाई पर बसा है।

बर्फ से ढके पहाड़ और हिमनद इस उद्यान के साथ दूर तक फैले हुए हैं।

पतित-पावनी मां गंगा का उद्गम स्थल यानी गोमुख का दिव्य दर्शन भी इसी पार्क के अंदर किया जा सकता है।

यही वजह है कि इस पार्क का नाम गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान रखा गया है।

तीर्थाटन के नज़रिए से गंगोत्री धाम पवित्र स्थलों में से एक है।

सुकून का असली अहसास

Wildlife Sanctuary In Uttarakhand: चमकते पहाड़ों के साथ शंकुधारी पेड़ों की सुंदरता, गंगोत्री नेशनल पार्क को और अधिक मनमोहक बनाती है।

पहाड़ों के सीने में बने चुनौती वाले रास्तों पर ट्रैकिंग का मज़ा रोमांच से भरा होता है।

पार्क में प्रवेश करते ही मन अपने आप हंसने लगता है।

वन्यजीवों की जिंदादिली देख, तन की तरंगे बजने लगती है।

पक्षियों के गीत-संगीत कानों को गज़ब की राहत देते हैं।

शहर की भागदौड़ और ज़िंदगी की हलचल से दूर, गंगोत्री नेशनल पार्क रोमांच के साथ-साथ शांति और सुकून की मंज़िल है।     

गंगोत्री नेशनल पार्क की पूर्वोत्तर सीमा, तिब्बत के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटी हुई है।

गगनचुंबी पर्वत श्रृंखलाएं, ढलवां चट्टानें, तीर-से नुकीले हिमनद और संकरी घाटियां, इस उद्यान को ख़ास ही नहीं, बल्कि आकर्षक का केंद्र बनाती हैं।

यहां उपोष्णकटिबंधीय माहौल (Subtropical Environment) के बीच अल्पाइन चारागाह भी पर्यटकों को खूब आकर्षित करते हैं।

गोमुख के अलावा पार्क के अंदर और कई नदियां बहती हैं।

भक्ति और रोमांच का संगम गंगोत्री नेशनल पार्क पर्यटकों के दिलों में विशेष स्थान रखता है।

गंगोत्री में हर साल भारी संख्या में तीर्थयात्री, टूरिस्ट, वाइल्डलाइफ लवर और ट्रेकर्स आते हैं।

गोमुख, गंगोत्री भोजवासा और गंगोत्री चिरबासा जैसे चुनौतियों से भरे ट्रेकिंग पॉइंट्स, ट्रेकर्स के बीच काफी मशहूर हैं।

इस राष्ट्रीय उद्यान में सबसे ऊंचाई पर स्थित केदारताल, तपोवन की बंजर भूमि और ठंडी रेगिस्तान की घाटी का मनोरम दृश्य देखते ही बनता है।

गंगोत्री धाम के बारे में

Wildlife Sanctuary In Uttarakhand: देवभूमि उत्तराखंड की इस पवित्र भूमि का इतिहास युगों पुराना है।

गंगोत्री में कई ऐसे स्थान मौजूद हैं, जो महाभारत काल की कथाओं से संबंध रखते हैं।

प्राकृतिक सुंदरता की मिसाल कहा जाने वाला यह स्थान, कई अनगिनत रहस्यों के लिए प्रसिद्ध है।

जैसा कि आप जानते ही हैं कि उत्तराखंड में चारधाम हैं- केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री। यानी गंगोत्री चारधाम यात्रा में से एक है।

सनातन धर्म में ‘गंगोत्री’ को प्रथम तीर्थस्थल के रूप में पूजा जाता है।

गंगोत्री नेशनल पार्क में क्या देखें?   

Wildlife Sanctuary In Uttarakhand: अगर आप नेचर, एडवेंचर और वाइल्डलाइफ लवर हैं, तो गंगोत्री नेशनल पार्क आपकी उम्मीदों पर खरा साबित हो सकता है।

चलिए जानते हैं कि गंगोत्री नेशनल पार्क में क्या देखें और करें?   

  • यहां आप पर्वत की ऊंची चोटियों पर ट्रेकिंग का अनूठा रोमांच उठा सकते हैं।
  • दूर तलक नदी और हरियाली के बीच लंबी पैदल यात्रा के जरिए अपनी ट्रिप यादगार बना सकते हैं।
  • वन्यजीवों की कई प्रजातियों को करीब से देख सकते हैं।
  • पक्षियों और पार्क के हसीन नज़ारों को अपने कैमरे में सदा के लिए कैद कर सकते हैं।
  • गंगोत्री गोमुख का अलौकिक दर्शन कर सकते हैं।
  • किराए पर टेंट लेकर गंगोत्री नेशनल पार्क के वन्यप्राणियों के साथ सुकून और उमंग भरे लम्हे जी सकते हैं।
  • परिवार के साथ यादगार वक़्त बिताने के लिए परफेक्ट टूरिस्ट डेस्टिनेशन बना सकते हैं।
गंगोत्री क्यों प्रसिद्ध है?

Wildlife Sanctuary In Uttarakhand: भक्ति, श्रद्धा और विश्वास के नज़रिए से गंगोत्री धाम में मां गंगा को समर्पित सबसे ऊंचा मंदिर मुख्य आकर्षण का केंद्र है।

सफेद ग्रेनाइट और 20 फुट ऊंची संरचना, इस मंदिर को अति सुंदर बनाती है।

अपनी चारधाम यात्रा के दौरान तीर्थयात्री, गंगा नदी में स्नान और गंगोत्री मंदिर में मां गंगा की पूजा करते हैं।

उसके बाद यात्रा के अगले पड़ाव की ओर बढ़ते हैं।

गंगोत्री धाम ही गंगा नदी का उद्गम स्थान है।

उत्तराखंड की चारधाम तीर्थयात्रा में से एक।

गंगोत्री धाम में नदी के स्रोत को भागीरथी कहा जाता है।

देवप्रयाग के बाद से यह नदी अलकनंदा में मिलती है और वहां से मां गंगा के नाम से पुकारी जाती हैं।

गंगोत्री के पट कब बंद होते हैं?

अगर आप उत्तराखंड के इस खूबसूरत स्थान को देखना चाहते हैं, तो अक्टूबर-नवंबर तक यात्रा पूरी कर लें।

क्योंकि उसके बाद गंगोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो जाते हैं। 

गंगोत्री नेशनल पार्क का प्रवेश शुल्क  
  • 150 रुपए प्रति भारतीय पर्यटक
  • 600 रुपए प्रति विदेशी पर्यटक
उद्यान का समय
  • गंगोत्री नेशनल पार्क सुबह 6 बजे से शाम तक खुला रहता है।
गंगोत्री नेशनल पार्क के आसपास अन्य लोकप्रिय पर्यटक स्थल  
  • गंगोत्री मंदिर । विश्वनाथ मंदिर । भैरोंघाटी गंगोत्री । जलमग्न शिवलिंग । सूर्या कुंड गंगोत्री धाम
  • भोजवासा गंगोत्री । गंगनानी । हर्षिल घाटी उत्तराखंड । धराली गंगोत्री । केदारताल गंगोत्री
  • गंगोत्री हिमनद (ग्लेशियर) । ऑडेन कोल गंगोत्री । मनेरी गंगोत्री । गौमुख तपोवन ट्रेक  
  • डोडी ताल झील उत्तरकाशी । तपोवन जोशीमठ । जोगिन एडवांस बेस कैंप ट्रेक गंगोत्री
मुझे गंगोत्री कब जाना चाहिए?

Wildlife Sanctuary In Uttarakhand: गंगोत्री में सालभर ठंड रहता है।

इस लिहाज से गंगोत्री नेशनल पार्क जाने का सबसे सही समय अप्रैल-जून और सितंबर-अक्टूबर माना जाता है।

उस दौरान मौसम काफी सुहावना रहता है और पर्यटक भारी संख्या में आते हैं।

समर के दौरान भी यहां न्यूनतम तापमान मानइस दो डिग्री सेल्सियस के करीब और अधिकतम तापमान 5-15 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है।

इसलिए ध्यान रहे, ट्रिप पर निकलते समय गर्म कपड़े साथ रखना न भूलें।

होटल कहां लें?   

गंगोत्री नेशनल पार्क (Gangotri National Park Uttarakhand) के आसपास के क्षेत्रों या फिर उत्तरकाशी में होटल ले सकते हैं।

यहां कम बजट से ज़्यादा बजट वाले होटल मौजूद हैं।

इसके अलावा होम स्टे की सुविधा भी उपलब्ध है।

पर्याप्त होटल के साथ कई धर्मशालाएं भी हैं।

भोजवासा में एक आश्रम और गढ़वाल मंडल विकास निगम का गेस्ट हाउस है।  

ट्रेकर्स के लिए ध्यान देने वाली बातें

  • उपजिलाधिकारी कार्यालय, उत्तरकाशी से इनर लाइन की अनुमति लेने के बाद नेलांग घाटी की यात्रा शुरू होती है।
  • अनुमति एक दिन में मिल जाती है। नेलांग में ठहरने की सुविधा न होने की वजह से एक दिन में सैर पूरी करनी पड़ती है।
  • गोमुख, भोजवासा, तपोवन और केदारताल की ट्रेकिंग की अनुमति गंगोत्री नेशनल पार्क कार्यालय, गंगोत्री धाम से लेनी पड़ती है। और यात्रा के लिए कम से कम दो दिन का समय लगता है।
  • केदारताल की ट्रेकिंग में तीन दिन का समय लगता है। कम से कम 3-4 दिन का समय अवश्य निकालें।
  • ट्रेकिंग के लिए आप ट्रेकिंग एजेंसी की मदद ले सकते हैं। गंगोत्री और उत्तरकाशी में कई ट्रेकिंग एजेंसियां आपकी सेवा के लिए तैयार रहती हैं।  
  • गंगोत्री से 12 किमी पहले भैरव घाटी से नेलांग घाटी की सैर का लुफ्त सड़क मार्ग से ही उठाया जाता है।
  • गंगोत्री से 13 किमी पहले भैरव घाटी पुल से गर्तांगली की सैर दो किमी लंबे पैदल मार्ग से शुरू होती है।
  • गंगोत्री-गोमुख-तपोवन ट्रैक 24 किमी और गंगोत्री-केदारताल ट्रैक 20 किमी है।

ऐसी ही कई खास खूबियों से सुसज्जित है गंगोत्री नेशनल पार्क, जो इसे उत्तराखंड का सबसे बड़ा पार्क बनाता है।

कैसे पहुंचें?   

गंगोत्री नेशनल पार्क (Gangotri National Park Uttarakhand), उत्तरकाशी का सबसे प्रसिद्ध टूरिस्ट प्लेस है।

यह स्थान उत्तरकाशी के साथ-साथ उत्तराखंड और भारत के कई शहरों से वेल कनेक्टेड है।

आप देहरादून, ऋषिकेश और हरिद्वार के जरिए आसानी से सड़क मार्ग द्वारा पहुंच सकते हैं।

नजदीकी एयरपोर्ट

गंगोत्री नेशनल पार्क (Gangotri National Park Uttarakhand) फ्लाइट से जाने के लिए आपको जॉली ग्रांट एयरपोर्ट, देहरादून उतरना पड़ेगा।

एयरपोर्ट से उत्तरकाशी मुख्यालय लगभग 200 किमी दूर है।

आप यहां से गंगोत्री के लिए निजी टैक्सी या बस सेवाएं ले सकते हैं।

नजदीकी रेलवे स्टेशन   

गंगोत्री नेशनल पार्क (Gangotri National Park Uttarakhand) पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश (लगभग 200 किमी) है।

वहीं, देहरादून से लगभग 200 किमी और हरिद्वार से करीब 290 किमी है।

इन तीनों रेलवे स्टेशनों से आप बस द्वारा किफायती और आरामदायक सफ़र का आनंद उठा सकते हैं।

इसके अलावा, आप गंगोत्री के लिए निजी टैक्सी भी ले सकते हैं।

गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान सड़क मार्ग से कैसे पहुंचे?

गंगोत्री नेशनल पार्क (Gangotri National Park Uttarakhand) सड़क मार्ग से पहुंचने के लिए दो रास्ते हैं:

  • ऋषिकेश से उत्तरकाशी होते हुए 265 किमी गंगोत्री धाम जाएं।
  • देहरादून से सुवाखोली होते हुए गंगोत्री 240 किमी की यात्रा करें।

इस पार्क के बारे में अधिक जानकारी के लिए उत्तराखंड पर्यटन की वेबसाइट पर जाएं।

यह भी पढ़ें: भारत की अतुल्य नदी!

यह जानकारी अपनों के साथ अवश्य शेयर करें। ऐसे ही बेहतरीन और दिलचस्प जानकारी के लिए पढ़ते रहिए gyanmanch, क्योंकि ज्ञान नया, मिलेगा यहां!

Gangotri National Park: इस आर्टिकल में आपने जाना कि गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान में कौन-सा जानवर प्रसिद्ध है और उत्तराखंड का सबसे बड़ा पार्क कौन-सा है?

4 thoughts on “Wildlife Sanctuary in Uttarakhand: एडवेंचर के साथ नेचर का मज़ा”

Leave a Comment